ईरान-अमेरिका की जंग में कई हथियारों का इस्तेमाल हुआ है. लेकिन एक हथियार ऐसा है जिसने अमेरिका के स्टेल्थ कहे जाने वाले जेट्स का घमंड तोड़ दिया. ये घमंड की वो कहीं भी बेफिक्र जा सकते हैं और कोई रडार उन्हें पकड़ नहीं पाएगा. लेकिन कंधे से फायर होने वाले इस हथियार ने सारा गेम बदल लिया. इस हथियार का नाम मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADs) है. ये कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल/रॉकेट है. इसने पिछले दो दशकों में अमेरिका को पहली बार युद्ध में नुकसान भी पहुंचाया है.
ईरान के साथ जंग में अमेरिका के लिए काल बना MANPADs, बेजोड़ है इसकी मारक क्षमता
MANPADs का मतलब कंधे पर रखकर चलाई जाने वाला एक रॉकेट है. ये इन्फ्रारेड-गाइडेड एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें होती हैं जिन्हें कोई अकेला सैनिक अपने साथ ले जाकर चला सकता है. ये सस्ती होती हैं और इन्हें छिपाना, ले जाना और इस्तेमाल करना भी आसान होता है. यही बात इन्हें खतरनाक बनाती है.


एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार जंग के दौरान अमेरिका के प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने कई बार कहा कि ईरान की 'एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमता' खत्म हो चुकी है. उन्होंने ईरान के रडार सेंटर्स को भी तबाह करने का दावा किया था. लेकिन ईरान के अमेरिका के एक F-15E Strike Eagle और एक A-10 Warthog को मार गिराने की पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा, ईरान ने 5 KC-135 Stratotanker, E-3 Sentry AWACS विमान को भी हिट किया है. जो बची हुई कसर थी, वो 3 F-15 गिरने से पूरी हो गई. इन्हें अमेरिका के सहयोगी कुवैत ने ही 'गलती' से मार गिराया था. लेकिन सबसे अधिक चर्चा एक हजार करोड़ के F-35 की है. ईरान ने इसे हिट कर के एक नया इतिहस रच दिया.
MANPADs सबसे बड़ा खतराप्रेसिडेंट ट्रंप अगर ईरान पर जमीनी हमला करते हैं, तो उन्हें सबसे अधिक खतरा MANPADs से ही होगा. ये हथियार उनके जेट्स से लेकर हेलीकॉप्टर तक को चुटकियों में टारगेट कर सकता है. अगर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को खत्म किए बिना जमीन पर सेना उतारने से जान-माल के नुकसान का खतरा रहता है. अगर अमेरिकी सेना बिना एयर डिफेंस को तबाह किए अंदर घुसती है, तो उन्हें ज्यादातर MANPADs से ही निशाना बनाया जाता है. MANPADs को नीचे, धीमी गति से और करीब उड़ने वाले विमानों का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है.
अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने CNN को बताया कि ईरान को जल्द ही चीन से 1,000 से ज्यादा MANPADS मिल सकते हैं. जाहिर तौर पर ये हथियार किसी तीसरे पक्ष के जरिए भेजे जाएंगे, ताकि अमेरिका की कार्रवाई और ट्रंप के गुस्से से बचा जा सके.
क्या हैं MANPADs?आसान शब्दों में कहें तो MANPADs का मतलब कंधे पर रखकर चलाया जाने वाला एक रॉकेट है. MANPADs या मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम, इन्फ्रारेड-गाइडेड एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें होती हैं जिन्हें कोई अकेला सैनिक अपने साथ ले जाकर चला सकता है. ये सस्ती होती हैं और इन्हें छिपाना, ले जाना और इस्तेमाल करना भी आसान होता है. खासकर उन सेनाओं या फिर आतंकवादियों के लिए भी ये एक शानदार हथियार है जिनका बजट सीमित रहता है.
इनका मुकाबला करना मुश्किल होता है, क्योंकि US की मिसाइलों या बमों के लिए इन्हें ट्रैक करने लायक कोई रडार सिग्नेचर नहीं होता. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक ये किसी तय जगह, जैसे कि किसी मिलिट्री बेस से काम नहीं करतीं। साथ ही, इन्हें तेजी से कहीं भी ले जाया जा सकता है. मिसाइल अपने निशाने को कैसे ट्रैक करती है, इस आधार पर इन्हें तीन कैटेगरी में बांटा गया है.
- इन्फ्रारेड सिस्टम जो गर्मी के सिग्नेचर को पकड़ते हैं.
- लाइन-ऑफ-साइट सिस्टम जिन्हें सैनिक खुद गाइड करता है.
- लेजर बीम सिस्टम जो टारगेट को मार्क करते हैं.
ये मिसाइलें आवाज की रफ्तार से दोगुनी स्पीड से चलती हैं और अधिकतर 5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकती हैं. यानी ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद उन टारगेट के खिलाफ ये बेअसर है जो स्टैंडऑफ (काफी दूर से हमला करने वाले), या सिंगल स्ट्राइक मिशन पर होते हैं. US के अधिकतर हवाई ऑपरेशन्स का प्रोफाइल भी कुछ ऐसा ही है. लेकिन फिर भी कन्फर्म तौर पर उसके जेट्स हिट हुए. जब US के विमान कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं, तो वे MANPADs, का निशाना बन सकते हैं.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन ने MANPADs में से कौन सा मॉडल ईरान को बेचा जा सकता है. ऐसी अटकलें हैं कि QW-2 और QW-18 मॉडल तेहरान भेजे जा सकते हैं. इन दोनों की रेंज चार किलोमीटर है. चीन किस रास्ते ईरान को हथियार भेजेगा, या भेज सकता है, ये अभी तय नहीं है. लेकिन रिपोर्ट के मुताबित तुर्किए इस मामले में चीन का प्रॉक्सी हो सकता है.
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