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शिवसेना ने विरोध में वोट डाला, बिल पास नहीं हुआ तो प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- 'ये दुख भरा दिन...'

Shiv Sena की पूर्व राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने Women Reservation Bill के पास न हो पाने पर अफसोस जाहिर किया है.

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प्रियंका चतुर्वेदी महिला आरक्षण बिल पास न होने पर नाखुश. (फोटो- आज तक)

शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गुट की पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने संविधान संशोधन बिल पास न होने पर दुख जाहिर किया है. उन्होंने इस दिन को उन महिलाओं के लिए दुख भरा दिन बताया, जो देश की संसद और राज्य के विधानसभाओं में अपनी जगह बनाने के उम्मीद करती हैं. हालांकि, प्रियंका के इस बयान को उनकी पार्टी के स्टैंड से अलग माना जा रहा है. प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,

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भारत की उन महिलाओं के लिए यह एक दुखद दिन है, जिन्होंने संसद या विधानसभा में अपनी जगह बनाने की उम्मीद की थी.

Priyanka Chaturvedi
प्रियंका चतुर्वेदी का बयान.

इसके बाद प्रियंका ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक और पोस्ट किया. पोस्ट में उन्होंने लिखा,

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महिलाओं के आरक्षण पर मेरा एक स्पष्ट रुख है, जो हमेशा से रहा है. मैं इसे आगे भी जाहिर करती रहूंगी. आपको इससे निपटना ही होगा.

Priyanka Chaturvedi
प्रियंका चतुर्वेदी का बयान

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले ही शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की ओर से महिला आरक्षण बिल पर बयान आया था. पार्टी के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार से अपील की कि वो लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण देने वाले 2023 के कानून को तुरंत लागू करें. साथ ही ठाकरे ने परिसीमन की प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की थी. उद्धव ठाकरे ने अपने एक बयान में कहा कि परिसीमन किसी एक पार्टी के राजनीतिक भविष्य के बारे में नहीं है. बल्कि, यह देश के भविष्य के बारे में है.

महिला आरक्षण बिल के बारे में बात करें तो केंद्र सरकार की ओर से संसद में इस बिल को पेश किया गया था. लेकिन वोटों की कमी की वजह से यह बिल निचले सदन यानी लोकसभा में पास नहीं हो पाया. बिल के पक्ष में 298 सदस्यों ने वोट किया. जबकि, 230 सांसदों ने इस बिल के खिलाफ वोट दिया. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) भी विरोध में वोट करने वाली पार्टियों में शामिल थी.

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दरअसल, इस बिल को पास करने के लिए  निचले सदन के 528 सदस्यों में से 352 वोटों की जरूरत थी. यानी दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. अगर यह बिल संसद में पास हो जाता, तो 2029 तक विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होता. साथ ही लोकसभा की सीटों की संख्या भी बढ़ जाती. यानी वर्तमान के 543 सीट बढ़कर 850 हो जाते. 

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