"विनोद तिवारी को पूछताछ के लिए बुलाया गया. आचार संहिता लगने की वजह से किसी भी तरह की गतिविधि न करने की हिदायत दी, लेकिन वो मुझे अपने पक्ष में लाने की कोशिश करने लगे. जब बात नहीं बनी, फिर वो गुस्सा दिखाने लगे. राजनीतिक रसूख दिखाने लगे. ऊटपटांग बातें करने लगे. फिर वापिस जाने के दौरान भी धमकी दी. तहसीलदार के साथ हाथापाई करने की कोशिश की. साथ ही ये भी कहा कि वो पहले से ही 2 महीने जेल में रहे चुके हैं. पॉलिटिकल आदमी हैं और आप बलिया के नेता को जानते नहीं हैं. जिसके बाद मामले की शिकायत थाने में कर दी गई."
पूछताछ के लिए ऑफिस बुलाए गए बीजेपी नेता को बलिया के डीएम ने कहा- अपराधी हो, बैठो मत...
अब दोनों तरफ से हाथापाई के आरोप लगाए जा रहे हैं.
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बीजेपी नेता पर बलिया के ज़िलाधिकारी के साथ हाथापाई के आरोप (तस्वीर- बाई तरफ बीजेपी नेता विनोद तिवारी, दाएं तरफ बलिया के ज़िलाधिकारी भवानी सिंह)
गैंग्स ऑफ वासेपुर का पहला पार्ट देखे हैं? उसमें जब सरदार खान (मनोज वाजपेयी) और असगर खान (जमील खान) की जेल में एंट्री होती है. तो जेल में घुसते ही कहते हैं ‘विधायक जेपी सिंह को कूट दिए, एसपीये आफिस में, वो भी उसके बाप के सामने. सरदार खान नाम है हमारा बता दीजियेगा सबको’. फिल्म में प्रो लेवल की भौकाली करते हैं दोनों. वो तो फिल्म थी. मगर यहां असल में ऐसी ही घटना सामने आई है. घटना यूपी के बलिया में हुई है. आरोप है कि बीजेपी नेता ने ज़िलाधिकारी के आफिस में डीएम और तहसीलदार के साथ हाथापाई की. जिसके बाद मामले की शिकायत हुई फिर बीजेपी नेता को गिरफ्तार कर लिया गया. अब पूरा माज़रा समझिए- यूपी के बलिया के बीजेपी नेता हैं विनोद तिवारी. बलिया के जिला कार्य समिति के सदस्य हैं. बलिया के ज़िलाधिकारी भवानी सिंह के मुताबिक उन पर एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. चूंकि आचार संहिता लागू हो गई है. इसीलिए ज़िलाधिकारी भवानी सिंह ने विनोद तिवारी पर दर्ज मुकदमे के सिलसिले में बात करने के लिए दफ्तर बुलाया. लेकिन डीएम के मुताबिक बातचीत की जगह वो हाथापाई पर उतर आए. बलिया के ज़िलाधिकारी भवानी सिंह ने मीडिया के सामने आकर बयान दिया:
डीएम की शिकायत के बाद विनोद तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया. दूसरी तरफ बीजेपी नेता विनोद तिवारी के मुताबिक उन्होंने किसी तरह की कोई हाथापाई नहीं की. उल्टे ज़िलाधिकारी और तहसीलदार ने हाथ उठाने की कोशिश की. वो ज़िलाधिकारी के बुलाने पर उनसे मिलने गए थे लेकिन जैसे ही वो कुर्सी पर बैठे डीएम ने उन्हें अपराधी कहकर बैठने नहीं दिया. जिस पर विनोद तिवारी ने कहा कि उनके ऊपर सारे राजनीतिक मुकदमे हैं वो अपराधी नहीं हैं. इस पर जिलाधिकारी कुछ से कुछ कहने लगे. गुस्सा होकर उन्होंने हाथ भी उठाने की कोशिश की जिसे उन्होंने पकड़ लिया. विनोद तिवारी का कहना है कि अगर उनके ऊपर आपराधिक मुकदमे हैं तो नियम के मुताबिक कार्रवाई करते. डीएम को बुलाने की क्या ज़रूरत थी. अब ज़िलाधिकारी की शिकायत के बाद विनोद तिवारी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है.
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