'हमारा शरीर इतने गर्म मौसम में दौड़ने का आदी नहीं है. हमें 42 डिग्री टेम्परेचर में दौड़ना था. और जितने पानी का इंतजाम था, वो नाकाफी था... रेस ख़त्म करना बहुत मुश्किल था. मुझे आश्चर्य है कि बिना पानी के ये दौड़ कैसे करवाई गई. मुझे याद है कि मैं बेहोश हो गई थी और जब आंख खुली, दो घंटे बीत चुके थे. [...] अगले 6 महीने तक प्रैक्टिस भी करना मुमकिन नहीं है. मेरा शरीर पूरी तरह से खाली हो चुका है. प्रैक्टिस शुरू करने के पहले मुझे पर्याप्त आराम चाहिए. मैं केरल पहुंचकर आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट लूंगी.'और फिर हम कहते हैं कि हम ऐथलेटिक्स में पिछड़े हुए हैं.
रियो में ये था भारत का इंतजाम, पानी न देने से 2 घंटे बेहोश पड़ी रही खिलाड़ी
मैराथन रनर ओपी जैशा ने दिखाई ओलंपिक में इंडियन मैनेजमेंट की हालत.
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फोटो - thelallantop
ओलंपिक्स की खूब तस्वीरें देखीं हमने. साक्षी और सिंधू ने जब मेडल जीता, सबका राष्ट्रवाद जाग उठा. सबने उन दोनों की तारीफ की. लेकिन किसी ने ये सवाल नहीं किया कि टोटल 120 खिलाड़ियों में 2 ही मेडल तक क्यों पहुंच पाईं. और जिन 2 लोगों ने मेडल जीता, उनको कितनी जीतोड़ मेहनत करनी पड़ी, वहां तक पहुंचने के लिए. क्योंकि जिस तरह की सुविधाएं देश उनको दे रहा है, दो मेडल लाना भी नामुमकिन सा लगता है. इंडियन मैराथन रनर ओपी जैशा ने इंडिया टुडे को बताया कि दौड़ के समय इंडियन काउंटर खाली पड़े थे. न पानी, न एनर्जी ड्रिंक और न ही कुछ खाने को था. जबकि इस इवेंट में हर देश का एक स्टॉल होता है. जिसमें हर 2.5 किलोमीटर पर पानी और शहद दिया जाता है. पर इंडिया वाले काउंटर खाली पड़े थे. उनको पानी केवल आयोजकों के काउंटर पर मिला, जो 8 किलोमीटर दूर थे.
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