साल था 1925. जगह थी बिहार के मुंगेर का लाखोचक गांव. ये बिहार में जातिगत हिंसा का शुरुआती दौर था. इसके बाद भी कई बार जातिगत हिंसा ने बिहार की धरती को लाल किया. आगे चलकर इस सामाजिक टकराव ने राजनिति का चोला ओढ़ लिया. आज जब बिहार चुनाव के चक्र में व्यस्त है. असल मुद्दे मांद में सुस्ता रहे हैं, और कास्ट-पॉलिटिक्स फिर से चर्चा में है. इसी बाबत आते हैं कुछ सवाल-
क्या है बिहार की जातिगत राजनीति की जड़? इसने कितने लिबास बदले? कितने ही छरछंद हुए? इसका जिम्मेदार कौन? जानने के लिए देखें तारीख का ये एपिसोड.
तारीख: कहानी बिहार के जनेऊ आंदोलन की जिसने वहां की पॉलिटिक्स को पूरी तरह बदल दिया
20वीं सदी के शुरुआती दशकों में उभरा जनेऊ आंदोलन, एक सिंबॉलिक मूवमेंट से कहीं ज्यादा था. ये पिछड़े वर्ग के मुखर होने का औज़ार बना. इस आंदोलन ने बिहार में राजनीति के डायमेंशन को मौलिक रूप से बदल दिया.
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