
फोटोः फेसबुक
शनमुगनाथन 68 साल के हैं. तमिलनाडु से आते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस और भाजपा से जुड़े रहे हैं. उन्हें 2015 में मेघालय का राज्यपाल बनाया गया. अगस्त 2016 में नजमा हेप्तुल्ला को मणिपुर की राज्यपाल बनाए जाने तक उनके पास मणिपुर का चार्ज भी था. इसके बाद सितंबर 2016 को वे अरुणाचल प्रदेश के कार्यकारी राज्यपाल बनाए गए जब जे. पी. राजखोवा को उनके पद से हटाया गया. तब से वे ईटानगर और शिलॉन्ग के बीच वक्त बिताते थे.
बकौल इंडियन एक्सप्रेस, अपने पांच पन्नों के पत्र में राजभवन के स्टाफ ने लिखा था कि शनमुगनाथन की हरकतें राजभवन की गरिमा के खिलाफ हैं. उन्होंने राजभवन को एक लेडीज़ क्लब में तब्दील कर दिया है. औरतें अपनी मर्ज़ी से राजभवन आती जाती हैं और ये सब राज्यपाल के कहने पर होता है. इस सब से राजभवन के कर्मचारी दुखी हैं.
इससे पहले शनमुगनाथन पर एक महिला ने ये इलज़ाम लगाया था कि उन्होंने उसका इंटरव्यू लेने के बहाने उस के साथ छेड़छाड़ की. द वायर पर छपी खबर के मुताबिक इस महिला को पब्लिक रिलेशन अफसर के पद के इंटरव्यू के लिए 8 दिसंबर 2016 को राजभवन बुलाया गया. जबकि इस पद पर 7 दिसंबर को ही एक दूसरी महिला की नियुक्ति हो गई थी. शनमुगनाथन ने कथित तौर पर महिला को गले लगाने और किस करने की कोशिश की. महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी, लेकिन पुलिस ने मामले पर सरकार से निर्देश मांग लिए थे और कानूनी राय भी चाही थी. मुख्य मंत्री मुकुल संगमा ने पीटीआई से कह दिया था कि वे केंद्र से 'संपर्क' में हैं.
पहले भी फंसे हैं विवादों में
शनमुगनाथन अगस्त 2016 में मणिपुर के राज्यपाल के हैसियत से इंफाल में मणिपुर स्टेट फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट और यूनिवर्सिटी ऑफ कल्चर का उद्घाटन करने पहुंचे थे. बकौल इंडिया टुडे, शनमुगनाथन वहां मणिपुर के माने हुए बुद्धिजीवियों से कह गए कि 100 शब्दों में 'संस्कृति' क्या है समझाते हुए एक लेटर लिख दें, तो कॉफी और नकद इनाम के मिलेगा. इस बात का मणिपुर के बुद्धिजीवियों ने काफी बुरा माना था.शनमुगनाथन पहले राज्यपाल नहीं हैं जिन्हें इस तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. 2009 में एन. डी. तिवारी का नाम उनके आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए सेक्स स्कैंडल में सामने आया था. तब उनके खिलाफ महिला संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए थे. खुद कांग्रेस ने उनपर इस्तीफा देने का दबाव बनाया तब जाकर उन्होंने इस्तीफा दिया था.
शनमुगनाथन ने छेड़खानी वाली बात से इनकार किया था. लेकिन राजभवन के कर्मचारियों की चिट्ठी पर उनका पक्ष सामने नहीं आया था.
केंद्र में जिस पार्टी की सरकार होती है, वो अपने रिटायर हो चुके नेताओं को राज्यपाल बनाकर 'सम्मानजनक' विदाई देती है. 'महामहिम' बनकर नेता भी खुश हो जाते हैं और पार्टी के बाकी नेताओं के लिए रोड़ा नहीं बनते. लेकिन ये विन विन सिचुएशन हमेशा नहीं रहती. कई बार ये सफेद हाथी सही में महंगे पड़ जाते हैं. लगता है इस बार भी यही हुआ है.
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