बीएसएफ और सीआरपीएफ जवान के बाद अब वीडियो सामने आया है सेना के जवान का. पहले दाल और रूखी रोटियां. फिर सीआरपीएफ के जवान की सुविधाओं की शिकायत. और अब ऐसी परेशानी सामने आई है. जिससे अफसरों की करतूतों पर आपको हैरानी होगी. लांस नायक यज्ञ प्रताप सिंह देहरादून में तैनात हैं. यज्ञ प्रताप का आरोप है कि सैनिक से कपड़े धुलवाना, बूट पॉलिश करवाना, कुत्ते घुमवाना जैसे काम काम करवाए जाते हैं. एक के बाद एक वीडियो आ रहे हैं. जहां हर समस्या को सोल्जर, सोल्जर बोलकर खामोश कर दिया जा रहा था. वहां जवानों की परेशानियों के वीडियो हैरान करने वाले हैं.
आर्मी के जवान यज्ञ प्रताप सिंह के मुताबिक उन्होंने पिछले साल 15 जून को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी. जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह जवानों के साथ बुरा सलूक किया जाता है. बाद में जब सेना के अफसरों को इस बारे में पता चली तो उसको काफी डांट फटकार पड़ी. यज्ञ प्रताप सिंह का कहना है, 'अब ऐसा लग रहा है कि इसी मामले में उनका कोर्ट मार्शल हो सकता है.' जवान का कहना है, 'जिस तरह शिकायत करने के बाद मेरे साथ बर्ताव हुआ उसके बाद कोई भी सुसाइड कर लेता. लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा.'
यज्ञ प्रताप ने कहा, 'सेना में कई जगह पर एक सैनिक से कपड़े धुलवाना, बूट पॉलिश करवाना, कुत्ते घुमवाना जैसे काम करवाना गलत है.' सेना के इस जवान से सीधे प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में दखल दें, क्योंकि उसने चट्ठी लिखकर कोई गलत काम नहीं किया है. इस वीडियो के सामने आने पर सेना की तरफ से भी ब्यान आ गया है. सेना का कहना है कि इतनी बड़ी फ़ौज में किसी एक सैनिक की शिकायत को हम ख़ारिज नहीं कर सकते. सेना में ऐसी शिकायतों को निपटाने के लिए एक सिस्टम है. उसी सिस्टम के तहत इस जवान की शिकायत को भी देखा जा रहा है.
क्या कहा सेना के जवान ने
श्रीमान मैं लांस नायक यज्ञ प्रताप. सबसे पहले भारतीय सेना के सभी जवानो की तरफ से श्रीमान जी को जय हिंद जय भारत. श्रीमान मैं सेना में 15 साल 6 महीने से सर्विस कर रहा हूं, जिसके दौरान मैंने देखा कि भारतीय सेना के अधिकारियों द्वारा जवानों का किस तरह से शोषण किया जाता है, इसके बारे मैं काफी दिनों से परेशान था, लेकिन हिम्मत जुटाना बड़ा मुश्किल हो रहा था, क्योंकि सारी पॉवर अधिकारियों के हाथ में है, अगर शिकायत करते हैं तो वो अधिकारी हमारे ऊपर नाराज़ हो जाएंगे, गलत कार्रवाई करेंगे. लेकिन मैंने ये सब कुछ सोचते हुए लास्ट में ये फैसला लिया कि मैं इसकी आवाज़ जरूर उठाऊंगा. और मैंने 15-6-2016 को एक ऐप्लिकेशन लिखी थी. जो भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, गृहमंत्री, उच्चतम न्यायालय के पास भेजी थी. इसके बाद प्रधानमंत्री ऑफिस से ये जवाब मांगा गया. इसके बाद हमारे अफसरों ने और प्रताड़ित किया. अगर कोई और होता तो कुछ भी गलत कदम उठा लेता. सुसाइड कर लेता. लेकिन मैं कोई आम इन्सान नहीं हूं, जवान हूं ऐसा नहीं करूंगा. जब मैं दुश्मन को मार सकता हूं. देश के लिए मर सकता हूं तो मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा जिससे वर्दी की बदनामी हो. मुझे कोर्ट मार्शल के लिए बुलाया गया. हो सकता है हो भी जाए. मगर मैं माननीय प्रधानमंत्री से निवेदन करूंगा. मैंने ऐसा क्या कर दिया जो कोर्ट मार्शल किया जा रहा है. एक शिकायत की चिट्ठी ही तो लिखी थी.
इससे पहले सीआरपीएफ के जवान जीत सिंह ने पीएम से गुज़ारिश की थी कि पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों को भी वे सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जो सेना के जवानों को मिलती हैं. जीत का दर्द है जब इनके भी जवान सरहद पर गोली खाते हैं, देश के भीतर आंतकवादियों और माओवादियों से लड़ते हैं तो फिर सुविधाओं के मामले में उनके साथ भेदभाव क्यों किया जाता है. इस तरफ ध्यान देना चाहिए. जीत से पहले जम्मू-कश्मीर में तैनात बीएसएफ के एक जवान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. जिसने BSF अफसरों पर राशन बेचकर खा जाने का इल्ज़ाम लगाया. खाने में मिलने वाली पानी भरी दाल दिखाई. जली हुई और रूखी रोटी दिखाई.
इस BSF जवान को जली रोटी खाकर ड्यूटी देनी पड़ रही है: वायरल वीडियो