Anthropic के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने हाल ही में एआई की तुलना ‘एलियन’ से की है. उनका कहना है कि सुपर इंटेलिजेंस बनाने का कॉन्सेप्ट किसी एलियन को बुलाने जैसा है और ये काफी डरावना है. जैकब कॉक्सन के कहने का मतलब ये है कि जिस तरह हम एलियन सिविलाइजेशन और इंटेलिजेंस को नहीं जानते-समझते, उसी तरह हम सुपर इंटेलिजेंस के बारे में भी नहीं जानते. हमने इस जबरदस्त तकनीक को बना तो लिया है, लेकिन हमें असल में नहीं पता कि ये क्या है, कितनी सुरक्षित है, हमारे लिए इसका असल महत्व क्या है और क्या वाकई हमें इसकी जरूरत है भी.
'AI एलियन जैसा', Anthropic के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने फिर चौंकाया
Jacob Coxon के कहने का मतलब ये है कि जिस तरह हम एलियन इंटेलिजेंस को नहीं जानते, उसी तरह सुपर इंटेलिजेंस के बारे में भी नहीं जानते. हमने इस जबरदस्त तकनीक को बना तो लिया है, लेकिन हमें असल में नहीं पता कि ये क्या है, कितनी सुरक्षित है, हमारे लिए इसका असल महत्व क्या है और क्या वाकई हमें इसकी जरूरत है भी.

27 साल के जैकब कॉक्सन ने कंपनी से इस्तीफा देते हुए AI पर चिंता जताई थी. उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा था कि इस दशक (2030) के अंत तक एआई सभी इंसानों का खात्मा कर सकता है. इस तकनीक की ताकत को कम नहीं आंकना चाहिए. इस तकनीक के हमारे काबू से बाहर होते ही जल्द ही ऐसे 'सुपरह्यूमन' सिस्टम बन जाएंगे, जो किसी भी चीज को हैक कर सकते हैं.
सुपर इंटेलिजेंस यानी एलियन बुलाना?एक टीवी शो में बात करते हुए जैकब ने एआई की ताकत की तुलना एलियन से की. उन्होंने कहा,
“सुपर इंटेलिजेंस बनाने का कॉन्सेप्ट किसी एलियन को बुलाने जैसा है. मुझे लगता है कि किसी ऐसे एलियन दिमाग के बारे में सोचना, जिसे हम पूरी तरह नहीं समझते, काफी डरावना है. भले ही ऐसा कोई सिनेरियो सामने ना आया हो.”
उन्होंने ये भी कहा कि लोगों को खुद ध्यान देना चाहिए कि वे क्या कर रहे हैं. उन्होंने बातचीत के दौरान कहा,
“आप अभी चाहे जो भी कर रहे हों, लेकिन AI का आपकी जिंदगी पर काफी असर पड़ने वाला है. यह काफी जरूरी है कि आप इस बात पर नजर रखें कि चीजें किस तरफ जा रही हैं. सब कुछ सिर्फ उन्हें बनाने वालों पर न छोड़ दें. क्योंकि वे चाहते हैं कि लोग उनसे जुड़ें. असल में पिछले कुछ सालों में एक बड़ी समस्या यह रही है कि लोग उस खतरे को नहीं समझ पा रहे हैं, जो वे पैदा कर रहे हैं.”
जैकब कॉक्सन अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने AI के खतरे पर बात की है. उनसे पहले भी एंथ्रोपिक में AI के खतरों के बारे में चेतावनी देते हुए कई लोग नौकरी छोड़ चुके हैं. एलन मस्क भी मान चुके हैं कि AI काफी इंटेलिजेंट होता जा रहा है. मस्क ने कहा था, "मुझे अब भी लगता है कि AI और रोबोट से जुड़े कुछ जोखिम हैं. यह जोखिम पूरी तरह शून्य नहीं हैं."
"इंसानियत खत्म होने की संभावना 50%"AI फ्रंट पेज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल में मशीन लर्निंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डेविड क्रूगर ने AI के सुपर इंटेलिजेंस लेवल तक पहुंचने पर चिंता जताई है. उनका मानना है कि AI के ‘सुपरइंटेलिजेंस’ वाले लेवल तक पहुंचने से इंसानियत को खतरा होगा. इसे संभालने का कोई ब्लूप्रिंट हमारे पास नहीं है.
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डेविड ने कहा था कि अगर सुपर इंटेलिजेंस आ जाती है, तो "इंसानियत के खत्म होने" की संभावना 50% से ज्यादा होगी. उनका कहना है कि AI आज काफी कुछ खुद से कर रहा है. हम उसे और ताकत दे रहे हैं.
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