मालिन्यामिलाथा मंगलयम का मतलब होता है नो वेस्टेज वेडिंग, यानी शादी में किसी तरह का कचरा नहीं होगा. शर्त के मुताबिक किसी नए नवेले जोड़े को पंचायत की ओर से शादी का सर्टिफिकेट तभी दिया जा सकता है, जब वो इस बात को मान ले कि शादी में आने वाले मेहमानों को वो प्लास्टिक के प्लेट में नहीं, पत्तलों में खाना खिलाया जाएगा. इसके अलावा किसी तरह के प्लास्टिक के सामान का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

शादियों में खाने के बाद प्लास्टिक के पत्तल कूड़े में फेंक दिए जाते हैं, जो नष्ट नहीं होते हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
कोलायड पंचायत के फैसले के मुताबिक, पहले इस शर्त को सिर्फ शादियों पर लागू किया गया है. बाद में इसे उन आयोजनों में भी लागू किया जाएगा, जिसमें 100 से अधिक लोग शामिल होंगे. ऐसा कोई भी आयोजन, जिसमें 100 से अधिक लोग होंगे, उसके लिए पंचायत से परमिशन लेनी होगी. अगर किसी ने ऐसा नहीं किया तो उस परिवार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
इसके अलावा पंचायत ने ये भी फैसला किया है कि जो भी परिवार शादियों के लिए तय किए गए नियमों का पूरी तरह से पालन करेगा, उन्हें पंचायत की ओर से प्रशस्ति पत्र और प्रशस्ति चिन्ह दिया जाएगा.
पंचायत की पहल इस मामले में भी बेहद खूबसूरत है कि उसने गांव में लगने वाले प्लास्टिक के फ्लैक्स बोर्ड और बैनरों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. ये गांव अब स्कूली बच्चों के प्लास्टिक पेन और प्लास्टिक से बनी पानी की बोतलों को भी हटाने की कोशिश कर रहा है.

गांव ने प्लास्टिक के बैनर-पोस्टर पर भी रोक लगा दी है. (सांकेतिक तस्वीर)
इसके अलावा गांव में एक नवंबर 2017 के बाद से जो भी बिल्डिंग बनेगी, उसमें प्लास्टिक का किसी तरह का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी चीज़ का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. जिस किसी को भी गांव में घर बनवाना होगा, उसे पंचायत के सामने एप्लिकेशन देना होगा. उसमें लिखना होगा कि उसने पांच पेड़ लगाए हैं. एप्लिकेशन के साथ ही पेड़ की फोटो भी अटैच करनी होगी.

घर बनवाने से पहले पेड़ लगवाने होंगे (सांकेतिक तस्वीर)
जब पूरी दुनिया के ताकतवर लोग पेरिस में बैठकर जलवायु परिवर्तन पर बात कर रहे हैं, भारत के एक छोटे से गांव ने अपने स्तर पर ही, पर्यावरण बचाने की ठानी है. उस गांव और गांव के लोगों के जज़्बे को सलाम, जिन्होंने और लोगों को भी पर्यावरण के लिए जागरूक होने का हौसला दिया है.
वीडियो में देखें आधार कार्ड के लिए आने वाले फोन कॉल्स की सच्चाई ये भी पढ़ें:
मां-बाप ने इजाजत नहीं दी, तो देखो इस लड़के-लड़की ने क्या किया
कहानी अमरू की, जो बेटियों की शादी से हासिल रकम से ज़िंदगी चलाता था
मालाबार विद्रोह की पूरी कहानी, जिसे केरल बीजेपी के चीफ पहला जिहाद बता रहे हैं











