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ब्रिटिश हिंदू भारत का नहीं ब्रिटेन का साथ देंगे अगर... लंदन में मोहन भागवत क्या बोले?

Mohan Bhagwat on RSS ideology: मोहन भागवत इन दिनों विदेशों में संघ की सोच और उसके काम को समझाने के लिए कार्यक्रम कर रहे हैं. हालिया इवेंट लंदन में हुआ जहां उन्होंने 'हिंदुत्व' विचारधारा पर बात की. इससे पहले न्यूयॉर्क और टोरंटो में भी ऐसे कार्यक्रम कर चुके हैं.

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लंदन के इवेंट में RSS प्रमुख मोहन भागवत (दाएं) ने संघ की विचारधारा पर बात की. (फोटो-rss.org/website)

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  • मोहन भागवत ने लंदन के 'एकता का उत्सव' में हिंदू राष्ट्र, हिंदुत्व और युवाओं की भूमिका पर अपनी विचारधारा प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने हिंदू राष्ट्र की विविधता और एकता को महत्व दिया।
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख की यह विदेश यात्रा संघ की सोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझाने के संदर्भ में हो रही है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों से संवाद शामिल है।
  • भागवत के वक्तव्य ने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए भविष्य में संघ की विचारधारा को फैलाने के लिए नए संवाद और कार्यक्रम आयोजित करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुखिया मोहन भागवत इन दिनों विदेशों में संघ की सोच और उसके काम को समझाने के लिए कार्यक्रम कर रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने लंदन में एक कार्यक्रम को संबोधित किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग मौजूद थे. इस दौरान मोहन भागवत ने ‘हिंदू राष्ट्र’, ‘हिंदुत्व’, ‘राष्ट्र’ और युवाओं की भूमिका जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

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रविवार, 6 सितंबर को लंदन के ‘एकता का उत्सव’ इवेंट में मोहन भागवत ने हिस्सा लिया था. इसे RSS के undefined पर लाइव स्ट्रीम भी किया गया. क्वेश्चन-आंसर सेशन के दौरान मोहन भागवत से पूछा गया कि उनके लिए ‘हिंदू राष्ट्र’ का मतलब क्या है? इसपर उन्होंने जवाब दिया,

“हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी खास धर्म, पूजा-पद्धति या लाइफस्टाइल से नहीं है. इसका मतलब अलग-अलग विचारों, मान्यताओं और रास्तों को स्वीकार करना है. एकता के लिए सभी का एक जैसा होना जरूरी नहीं है. अलग-अलग विचार और मान्यताएं होने के बावजूद लोग एक साथ रह सकते हैं.”

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हिंदू शब्द का मतलब क्या है?

हिंदुत्व शब्द का मतलब समझाते हुए भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ को किसी एक धार्मिक तरीके या जीवनशैली तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. उनके मुताबिक हिंदू सोच की बुनियाद विविधता को स्वीकार करने और अलग-अलग विचारों का सम्मान करने में है. उन्होंने ये भी कहा कि भारत में अलग-अलग तरह की विचारधाराएं विकसित हुईं. यहां तक कि नास्तिकता की सोच को भी जगह मिली.

लंदन में मोहन भागवत से ‘नेशन’ और ‘राष्ट्र’ के बीच अंतर को लेकर भी सवाल पूछा गया. इस पर उन्होंने कहा,

“‘नेशन’ यानी देश में लोग भाषा, धर्म, शासन व्यवस्था या दूसरी समान पहचानों के आधार पर एक साथ आ सकते हैं. वहां एक सरकार और राज्य के नियम सभी पर लागू होते हैं. ‘राष्ट्र’ की बुनियाद किसी एक जैसी पहचान पर नहीं, बल्कि साझा उद्देश्य पर होती है.”

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मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू राष्ट्र का उद्देश्य दुनिया के सामने यह विचार रखना है कि अलग-अलग होना स्वाभाविक है, जबकि एकता ज्यादा महत्वपूर्ण है. उदाहरण देते हुए बताया कि देश पर कई बार हमले हुए और भारत लंबे समय तक गुलाम भी रहा, लेकिन इसके बावजूद भारत एक राष्ट्र बना रहा. उनका कहना है कि इससे तानाशाही और युद्ध जैसी स्थितियों से बचा जा सकता है.

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 ब्रिटिश हिंदुओं पर क्या कहा?

RSS प्रमुख ने कहा कि उन्हें आने वाली पीढ़ियों पर ज्यादा भरोसा है. उन्होंने कहा कि आज के युवा दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा रखते हैं और इसके लिए छोटी-छोटी बातों के मतभेद पीछे छोड़ने को तैयार हैं. युवाओं को लक्ष्य बताया जाना चाहिए, मगर उस तक पहुंचने का रास्ता उन्हें खुद ढूंढने देना चाहिए. 

मोहन भागवत ने ये भी कहा कि अगर कभी भारत और ब्रिटेन आमने-सामने आ जाएं तो ब्रिटिश हिंदू स्वाभाविक तौर पर ब्रिटेन के साथ खड़े होंगे. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व किसी व्यक्ति से उस जगह के साथ धोखा करने को नहीं कहता, जो उसकी कर्मभूमि है. इससे पहले मोहन भागवत RSS के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में न्यूयॉर्क और टोरंटो में भी ऐसे कार्यक्रम कर चुके हैं.

वीडियो: राजधानी: Gen-Z से RSS प्रमुख मोहन भागवत के संवाद के क्या मायने हैं?

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