कनाडा के क्यूबैक शहर में एक मस्ज़िद में घुस कर कुछ लोगों ने गोलियां चलाई. इस हमले में 6 लोग मारे गए और 8 लोगों के ज़ख़्मी होने की खबर है. दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है.आतंकवाद वो ज़हरीली बीमारी है जिसकी चपेट में हर कोई आता है. ये किसी को नहीं बख्शती. मुसलमानों को भी नहीं. हां, मुसलमानों को भी नहीं. कनाडा में एक मस्ज़िद पर हुए हमले से ये बात एक बार फिर उभर कर सामने आई है. ख़ून के प्यासे भेड़िए किसी को नहीं बख्शते.
पहले ये ख़बर आ रही थी कि हमलावर तीन थे. बाद में पुलिस ने कन्फर्म किया कि हमले में दो से ज़्यादा लोग शामिल नहीं थे. क्यूबैक पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि 35 से 70 की उम्र के बीच के 6 लोगों की मौत हो गई है और 8 लोगों को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया है. 39 लोग सकुशल हैं. संडे रात की नमाज़ के वक़्त ये हमला हुआ. उस वक़्त मस्ज़िद में 50 से ज़्यादा लोग थे. एक सस्पेक्ट के पास से एके-47 राइफल बरामद हुई है. उसकी उम्र 27 साल के करीब है.मस्ज़िद के प्रेसिडेंट मुहम्मद यांगुई ने बताया कि जब हमला हुआ वो मस्ज़िद में नहीं थे. उन्होंने कहा कि उनके पास दहशत भरे लोगों के ढेर सारे कॉल आए. इस पाशविकता पर वो अचंभित हैं. क्यूबैक में हुए हमले का असर अमेरिका में भी देखा जा रहा है. न्यूयॉर्क के मेयर ने बताया कि वहां भी मस्ज़िदों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है. क्यूबैक शहर के मेयर ने भी मस्ज़िदों की सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया है.
कनाडा के प्राइम मिनिस्टर जस्टिन ट्रुडो ने इसे ‘मुसलमानों पर हुआ आतंकी हमला’ बताया. उन्होंने कहा, “हम मुसलमानों पर हुए इस आतंकी हमले की निंदा करते हैं. इस मूर्खतापूर्ण हिंसा को देखना कष्टदायक है. विविधता हमारी ताकत है और धार्मिक सहिष्णुता वो गुण है जो हम कनाडा-वासियों को बेहद प्यारा है.”आगे उन्होंने कहा, “कैनेडियन-मुस्लिम हमारी राष्ट्रीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं और इस तरह की घटनाओं की हमारे समाज में, शहरों में और देश में कोई जगह नहीं है. कनाडा की क़ानून व्यवस्था सारे कैनेडियंस के अधिकारों की रक्षा करेगी और इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों को उनकी करतूत की सज़ा देने के लिए हर ज़रूरी चीज़ करेगी.” उन्होंने ट्विटर पर भी, मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी.
प्राइम मिनिस्टर जस्टिन ट्रुडो अपनी मानवीयता के लिए मशहूर रहे हैं.
एक दिन पहले जब अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शरणार्थियों के लिए अपने दरवाज़े बंद कर दिए थे तब ट्रुडो ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ऐलानिया तौर पर अपने मुल्क के दरवाज़े खोल दिए थे. उन्होंने एक ट्वीट कर के कहा था, “वो जो ज़ुल्म, दहशत और जंग से भाग रहे हैं उनका कनाडा स्वागत करता है. चाहे आप किसी भी धार्मिक विश्वास के हो. विविधता हमारी ताकत है.”धरती की पीठ पर कनाडा वो मुल्क है जिसने हमेशा मानवीयता को अहमियत दी है. चाहे एलजीबीटीक्यू अधिकारों का मसला हो या बाहरी मुल्कों के नागरिकों को वर्क परमिट देने की बात. या फिर युद्ध-पीड़ित मुल्कों से शरण मांगने आए लोग ही क्यों न हों, कनाडा ने हमेशा इंसानियत सर्वोपरि रखी है.
जब अमेरिका जैसा मुल्क एक इस्लामोफोबिक शख्स के शासन में धार्मिक आधार पर लोगों की आवाजाही को कंट्रोल करना चाह रहा है, तब कनाडा का बांहें खोल देना दर्शाता है कि इस मुल्क की बात ही अलग है.ये ताज़ा घटना मुसलमानों पर हमला तो है ही, साथ ही कनाडा की सच्ची सेक्युलर आत्मा पर भी प्रहार है.हमेशा मुसलमानों को आतंक का पर्याय मान के चलने वाले कुछ लोग इस हमले के बारे में क्या कहेंगे पता नहीं. लेकिन हम पुरज़ोर लहज़े में कहना चाहते हैं कि आतंकवाद किसी को भी, कभी भी दबोच सकता है. उम्मीद है एक ही तरह की लेबलिंग करने वाले लोग थोड़ा थमकर इस पर सोचेंगे.
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