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'याद नहीं पहले क्या बोला'- मालेगांव बम धमाके केस का 25वां गवाह भी पलट गया

गवाह ने NIA कोर्ट में कहा कि वो लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित के अलावा और किसी को नहीं जानता. पहले कही थी आरोपियों के साथ बैठक की बात.

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मालेगांव ब्लास्ट की फाइल फोटो (सोर्स-आजतक)

साल 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले (Malegaon Blast Case) में सुनवाई के दौरान एक और गवाह मुकर गया है. गुरूवार, 25 अगस्त को मामले पर स्पेशल NIA कोर्ट में सुनवाई चल रही थी. गवाही के लिए जब पूर्व सैन्यकर्मी को बुलाया गया, तो वो अपने बयान से मुकर (Witness turned Hostile) गया. जानकारी के मुताबिक, ये पुलिसकर्मी केस का 25वां गवाह है. गवाह ने कोर्ट में कहा कि उसे नहीं याद है कि उसने इसके पहले जांच एजेंसियों से क्या कहा था. 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवाह ने कोर्ट में सिर्फ लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को पहचानने की बात कही. उसने कहा कि वो अन्य किसी आरोपी को नहीं जानता और ना ही कभी उनसे मिला. NIA इस मामले में 235 लोगों की कोर्ट में गवाही दिलवा चुकी है.

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 में महाराष्ट्र ATS के सामने गवाह ने खुद बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि वो आरोपी व्यक्तियों की दो बैठकों में शामिल हुआ था. एक बैठक जनवरी 2008 में भोपाल में और दूसरी उसी साल अप्रैल में नई दिल्ली में हुई थी. ATS के मुताबिक, हमले की योजना बनाने के लिए दक्षिणपंथी समूह ‘अभिनव भारत’ के सदस्यों द्वारा बैठकें आयोजित की गई थीं.

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लेकिन अब गवाह ने कोर्ट में कहा है कि उसने कभी भी ‘अभिनव भारत’ की किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया.

क्या है मालेगांव विस्फोट मामला?

29 सितंबर, 2008 को मुंबई से करीब 200 किलोमीटर दूर मालेगांव (Malegaon Blast Case) शहर में एक मस्जिद के पास एक दोपहिया वाहन से बंधा विस्फोटक फट जाने से 6 लोगों की मौत हो गई थी. 100 से अधिक घायल हो गए थे. ये धमाका रमजान के महीने में उस वक्त किया गया था, जब मुस्लिम समुदाय के बहुत सारे लोग नमाज पढ़ने जा रहे थे. इस धमाके के पीछे कट्टरपंथी हिंदू संगठनों का हाथ होने की बात सामने आई थी. NIA ने जांच के बाद दावा किया था कि इस विस्फोट को दक्षिणपंथी संगठन 'अभिनव भारत' ने अंजाम दिया था.

प्रज्ञा ठाकुर पर क्या आरोप ?

धमाके के बाद 30 सितंबर 2008 को मालेगांव के आजाद नगर पुलिस थाने में मामले दर्ज किए गए. मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर, असीमानंद और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को मुख्य आरोपी बनाया गया था. हालांकि, साल 2016 में NIA की मांग पर कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कठोर धाराओं को हटा दिया था. प्रज्ञा ठाकुर बाद में जमानत पर बाहर आ गईं.

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गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की कई धाराओं के तहत प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ आरोप जारी हैं. आरोप हैं कि मालेगांव के भीकू चौक पर सुनहरे रंग की LML बाइक पर विस्फोटक रखे गए और ये बाइक प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड है.

देखें वीडियो- प्रज्ञा ठाकुर जिस मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी, उसका 21वां गवाह पलटा, कोर्ट में क्या कह दिया?

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