बीते दिनों साइप्रस के प्रेसिडेंट निकोस क्रिस्टोडुलिडेस भारत की यात्रा पर थे. इस विजिट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. प्रेसिडेंट निकोस की यात्रा के दौरान भारत-साइप्रस के बीच एक MoU साइन हुआ. इस MoU में आतंकवाद पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी. साथ ही, साइबर सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा पर भी बातें हुईं. लेकिन सबसे अधिक चर्चा उस चीज की हो रही है, जिस पर कोई कागज नहीं साइन हुआ. खबरें हैं कि साइप्रस ने भारतीय हथियारों जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, स्काई स्ट्राइकर और नागास्त्र कामिकाजे ड्रोन्स में दिलचस्पी दिखाई है.
भारत ने साइप्रस को ब्रह्मोस दिया तो तुर्किए-पाकिस्तान दोनों की उड़ेगी नींद?
Cyprus के President Nikos Christodoulides की भारत यात्रा के दौरान कई समझौते हुए. इस दौरे पर Cyprus ने Brahmos Missile, Sky Striker और Nagastra Kamikaze Drones में दिलचस्पी दिखाई है. यह खबर पाकिस्तान और तुर्किए की नींद उड़ा सकती है.


भारत को किसी मित्र देश से हथियार का ऑर्डर मिले, ये निश्चित तौर पर अच्छा संकेत है. लेकिन यहां साइप्रस की लोकेशन एक बहुत अहम रोल निभाती है. साइप्रस Mediterranean Sea में पड़ने वाला एक टापू है. स्ट्रेटेजिक रूप से साइप्रस की लोकेशन काफी अहम है क्योंकि इसके दक्षिण में सुएज नहर (Suez Canal) है. ये वो समुद्री तट है जो यूरोप-एशिया के बीच गुजरने वाले जहाजों के लिए काफी अहम है. एक और कारण है जिससे साइप्रस भारत के लिए काफी अहम है.
साइप्रस के उत्तर में 'तुर्किए' है. तुर्किए और भारत के रिश्ते जगजाहिर हैं. वजह है, भारत का प्यारा पड़ोसी पाकिस्तान. ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कई पाकिस्तानी ड्रोन्स को मार गिराया था. दिलचस्प बात ये है कि इनमें से कई ड्रोन तुर्किए मेड थे. और तुर्किए कश्मीर के मुद्दे पर भी पाकिस्तान का साथ देता आया है.

अब कहानी ये है कि तुर्किए और साइप्रस की भी नहीं बनती. कई दशकों तक इस टापू पर ग्रीक और तुर्क समुदाय के बीच मतभेद रहे हैं. साथ ही यहां उत्तरी इलाके में तुर्किए का कब्जा है. हालांकि, इसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है लेकिन तुर्किए हमेशा से इसे अपना इलाका बताता आया है. यही वजह है कि दोनों देश एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते. दोनों इलाकों के बीच एक बफर जोन है जिसे यूनाईटेड नेशंस कंट्रोल करता है.
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल ने शानदार प्रदर्शन किया. इसने पाकिस्तानी ठिकानों को इतना नुकसान पहुंचाया कि 10 मई, 2025 को वहां के DGMO फोन कर के सीजफायर की मांग करने लगे थे. लिहाजा कई देश, जो भारत के मित्र हैं वो भी इसे खरीदना चाहते हैं. साइप्रस भी उन्हीं देशों में शामिल है.

तुर्किए ने जब पाकिस्तान को ड्रोन दिए, तो उसे अच्छी तरह पता था कि वो इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ करेगा ही. लेकिन उसने ये नहीं सोचा कि नॉर्थ साइप्रस, जिसपर उसने कब्जा किया हुआ है, वो भारत के दोस्त साइप्रस के लिए अहम है. ऐसे में अगर भारत तुर्किए को ब्रह्मोस, स्काई स्ट्राइकर या नागास्त्र ड्रोन्स बेचता है तो संभव है वो इसे तुर्किए की ओर ही ताने रखेगा. यही वजह है कि ये 'संभावित' डील तुर्किए के लिए पर चिंता की बात है. क्योंकि मैक 3 (1 मैक=1234.8 किलोमीटर प्रति घंटा) आ रही ब्रह्मोस को रोकना लगभग नामुमकिन है.
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