इनकी मदद के लिए आगे आया एक 14 साल का लड़का आयुष किशोर. आयुष को 2016 में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्हें ये पुरस्कार गणित में अच्छी परफॉर्मेंस के चलते मिला था. राष्ट्रपति से उन्हें 10 हज़ार रुपए प्राइज़ मनी मिली थी. वहीं स्कूल में हर तरह से सबसे अच्छा स्टूडेंट होने के चलते उन्हें 28 हज़ार रुपए दिए गए थे. इन पैसों को आयुष उन चार कैदियों को दे रहे हैं ताकि वो अपना आज़ाद होने का सपना पूरा कर सकें. ये चारों कैदी इस 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर रिहा हो जाएंगे.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से सम्मान पाते आयुष किशोर.
चार कैदियों में से एक 46 साल के श्रीजन सिंह हैं. उन पर हत्या का आरोप है लेकिन जेल में अच्छे आचरण के चलते उन्हें सज़ा पूरी होने से पहले रिहा किया जा रहा है. जेल में काम करते हुए श्रीजन ने कुछ फ़ाइन तो चुका दिया था. लेकिन अब भी पांच हज़ार रुपए देने बाकी थे. श्रीजन की मदद के लिए कभी कोई घरवाला आगे नहीं आता, ये बात वो जानते हैं क्योंकि घरवाले पहले ही उनका त्याग कर चुके थे. ऐसे में आयुष उनके लिए उम्मीद की किरण बने.
आयुष की मां विनीता मालवीय एक पुलिस अधिकारी हैं. उन्होंने बताया कि उनका बेटा अक्सर जेल की ज़िंदगी के बारे में सवाल करता रहता है. आयुष बताते हैं, 'मेरी मां ने मुझे बताया कि कुछ कैदी बहुत ही ज़्यादा गरीब हैं. वो जेल में कई साल काम करते हैं, ताकि उससे मिली कमाई से अपना फ़ाइन भर सकें. कुछ तो अपनी आज़ादी के लिए दो हज़ार तक नहीं चुका पाते.'
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