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वो जज जिन्होंने कहा कि जब अपने बाप को नहीं छोड़ा तो मोदी को क्या छोड़ूंगा

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर रिटायर हो रहे हैं.

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फोटो - thelallantop
आज सुप्रीम कोर्ट के 43वें चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर रिटायर हो रहे हैं. जस्टिस के एस केहर नये चीफ जस्टिस बनेंगे.
टी एस ठाकुर का जन्म 4 जनवरी 1952 को हुआ था. पिताजी डीडी ठाकुर थे. जम्मू-कश्मीर में वकील थे. बाद में वहीं के डिप्टी सीएम भी बने. गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार में. वो सरकार गड़बड़ियों के लिए जानी जाती थी. ये वही दौर था जब कश्मीर में आतंकवाद शुरू हुआ था. टी एस ठाकुर ने अपने पिता को बर्खास्त करने की मांग कर दी थी एक मसले में. ठाकुर एक बार चुनाव भी लड़ चुके हैं. 1987 के विधानसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर के रामबन विधानसभा से कांग्रेस के भरत गांधी से लड़े थे. पर हार गये थे. कहते हैं कि राजनीतिक तिकड़म नहीं लगा पाये थे.
टी एस ठाकुर ने 1972 से वकालत शुरू की. बाद में वहीं के हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने. 1994 में कर्नाटक हाईकोर्ट चले गये. जुलाई 2004 में उनका ट्रांसफर दिल्ली हो गया. अप्रैल 2008 में ये यहीं एक्टिंग चीफ जस्टिस बने. 2008 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया. 2009 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने. फिर 3 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने.
चीफ जस्टिस पद की शपथ लेते हुए
चीफ जस्टिस पद की शपथ लेते हुए

एक कांफ्रेंस में जजों की स्थिति पर बात करते हुए ठाकुर रो पड़े थे. कहा था कि मोदी जी हम लोग छुट्टियां मनाने मनाली नहीं जाते. टी एस ठाकुर को कई जजमेंट और खुल के बोलने के लिए याद किया जाएगा-
1. जाते-जाते जस्टिस ठाकुर की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय बेंच ने बहुमत से फैसला दिया कि चुनाव में धर्म, जाति और भाषा को लेकर कोई अपील नहीं की जा सकती.
2. लोढ़ा कमिटी के मसले पर जस्टिस ठाकुर ने बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को हटा दिया. खेलों के मामले में ये बहुत बड़ा फैसला माना जा रहा है.
3. बहुमत वाली केंद्र सरकार के खिलाफ जस्टिस ठाकुर ने कई बार बोला. ये भी कहा कि सरकार न्यायपालिका को ठप कर रही है. स्वतंत्रता दिवस पर मोदी के भाषण के बारे में बात करते हुए ये भी कहा था कि जब मैं अपने पिता को नहीं बख्शते तो मोदी को क्यों छोड़ देंगे.
4. ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली में पॉल्यूशन कोड को मंजूरी दी. कहा कि केंद्र सरकार पॉल्यूशन ग्रेडिंग सिस्टम को लागू करे ताकि दिल्ली में प्रदूषण मॉनीटर किया जा सके. केजरीवाल के ऑड-इवन फैसले के सपोर्ट में ठाकुर ने जजों को भी कार-पूलिंग करने के लिए कहा.
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5. इनकी अध्यक्षता वाली बेंच ने ही नेशनल हाईवे पर शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया था.
6. इंटॉलरेंस के मुद्दे पर जब देश में बहस छिड़ी थी तब ठाकुर ने कहा था कि हम लोग हर वर्ग के लोगों के अधिकारों को बचाने में सक्षम हैं. ये हमारी जिम्मेदारी है. कानून और संविधान में सब दिया हुआ है. किसी भी तरह का डर नहीं होना चाहिए.
7. न्यायपालिका में गड़बड़ियों पर कहा कि जजों के उटपटांग बिहैवियर को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे. ये स्वीकार नहीं किया जाएगा. कॉलेजियम के मुद्दे पर सरकार से न्यायपालिका की भिड़ंत हुई. ठाकुर ने इसके लिए एक बेंच बनाई. जस्टिस केहर की अध्यक्षता में. इस बेंच ने न्यायपालिका को राजनीति से स्वतंत्र रखने के लिए ऐतिहासिक फैसला दिया.
8. जैन धर्म के पर्यूषण त्यौहार पर महाराष्ट्र में मीट बैन कर दिया गया. इसके खिलाफ सुनवाई करते हुए ठाकुर ने फैसला दिया कि मीट बैन किसी के गले में नहीं ठूंसा जा सकता. देश और समाज में फैली हुई इन बहसों पर ये फैसला मार्गदर्शन करेगा.
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9. इस्लाम में बहुविवाह पर उठे विवाद पर ठाकुर ने फैसला दिया कि किसी भी धर्म में बहुविवाह मान्य नहीं है. और सरकार इसको रोकने के लिए कानून बना सकती है.
10. 2012 में जस्टिस ठाकुर ने पंजाब में ड्रग्स को लेकर फैसला दिया था कि दस साल में जितना ड्रग पकड़ा गया उसका डाटा निकाला जाए. ऑफिशियल तौर पर ये पहला ऐसा फैसला था पंजाब में. तीन साल के ऑपरेशन के बाद पता चला कि 51 लाख किलोग्राम ड्रग पकड़े गए थे जिनमें से मात्र 16 लाख को ही डिस्ट्रॉय किया गया था.

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