इस शख्स का नाम कभी पंजाब के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में लिया जाता था. इस पर 47 आपराधिक मामले दर्ज हैं. इस आरोपी को छुड़ाने के लिए पंजाब की हाई-सिक्योरिटी नाभा जेल पर हथियारबंद हमला हुआ था. आज वही शख्स पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ नजर आए. गले में आम आदमी पार्टी का पटका है. अब उनकी पहचान एक राजनेता की है. नाम है गुरप्रीत सिंह सेखों.
CM भगवंत मान के साथ नजर आया नाभा जेल ब्रेक का मुख्य आरोपी, कौन हैं गुरप्रीत सेखों?
Who is Gurpreet Singh Sekhon? जिस शख्स के खिलाफ 47 आपराधिक मामले दर्ज हैं, आज वही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ खड़े हैं. जानिए कौन हैं गुरप्रीत सिंह सेखों जिसके गले में AAP का पटका अब नजर आएगा.

लेकिन सवाल ये है कि आखिर गुरप्रीत सेखों कौन है? उनका वो अतीत क्या है, जिसे लेकर पंजाब की सियासत में हंगामा मचा है? गैंगस्टर से पॉलिटिशियन बनने तक का ये सफर कैसे तय हुआ?
कौन हैं गुरप्रीत सिंह सेखों?6 सितंबर 2026. पंजाब के फिरोजपुर ज़िले के जीरा इलाके में मुख्यमंत्री भगवंत मान की रैली थी. रैली के मंच पर गुरप्रीत सिंह सेखों पहुंचे. सीएम भगवंत मान ने उनके गले में AAP का पटका डाला और उसे पार्टी में शामिल कर लिया. राजनीति में सेखों की एंट्री इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उनके खिलाफ 47 आपराधिक मामले दर्ज हैं. लेकिन उसके अतीत का सबसे चर्चित अध्याय है 2016 का नाभा जेल ब्रेक.
27 नवंबर 2016. पंजाब की हाई-सिक्योरिटी नाभा जेल. रविवार का दिन था. पुलिस की वर्दी में हथियारबंद लोग जेल के बाहर पहुंचते हैं. फायरिंग होती है और देखते ही देखते छह कैदी जेल से फरार हो जाते हैं. इनमें गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों, विक्की गोंदर और नीता देओल समेत चार गैंगस्टर और दो कथित आतंकवादी शामिल थे.
पुलिस ने सेखों को इस जेल ब्रेक का प्रमुख आरोपी बताया था. इस घटना ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए थे. उस वक्त आम आदमी पार्टी ने भी तत्कालीन पंजाब सरकार को घेरा था. तब प्रदेश में भाजपा समर्थित शिरोमणि अकाली दल की सरकार थी. और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल थे. जेल ब्रेक के बाद सेखों फरार हो गए. लेकिन करीब तीन महीने बाद, फरवरी 2017 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
नाभा जेल ब्रेक मामले में आरोपीमामला अदालत पहुंचा. नाभा जेल ब्रेक मामले में कुल 36 आरोपी थे. मार्च 2023 में पटियाला की स्पेशल कोर्ट के जज एच.एस. ग्रेवाल ने इनमें से 22 को दोषी ठहराया. छह को बरी कर दिया गया. दो आरोपियों की मौत हो गई, जबकि छह को भगोड़ा करार दिया गया.
22 दोषियों में गुरप्रीत सिंह सेखों समेत तीन आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाई गई. उस पर आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश, हथियारों से जुड़े अपराध और डकैती जैसी धाराएं लगाई गई थीं. हालांकि नवंबर 2023 में उसे जमानत मिल गई. और जेल से बाहर आने के बाद सेखों ने अपनी छवि बदलने की कोशिश शुरू की.
उसके समर्थकों के मुताबिक उसने गरीब परिवारों की मदद, जरूरतमंदों की शादियों में सहायता और बाढ़ के दौरान राहत सामग्री बांटने जैसे सामाजिक काम किए. समर्थकों का दावा है कि पिछले करीब तीन साल में उसके खिलाफ कोई नया आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ.
यानी सेखों अब अपने अतीत को पीछे छोड़कर नई पहचान बनाने की कोशिश में जुट गए. और इसी के साथ उसकी नजर राजनीति पर भी टिक गई.
राजनीतिक सफर कैसे शुरू हुआ?फिर आता है साल 2025. जिला परिषद चुनाव में उसके परिवार की दो महिलाएं चुनाव जीतती हैं. पत्नी मंदीप कौर सेखों बाजिदपुर सीट से और करीबी रिश्तेदार कुलजीत कौर सेखों ने फिरोज़शाह सीट जीत दर्ज की. उस वक्त उनके उम्मीदवारों को शिरोमणि अकाली दल का समर्थन मिला था.
इसके बाद सेखों ने जीरा में अपना राजनीतिक कार्यालय खोला और 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी के इशारे देने लगा. पहले चर्चा थी कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकता है. लेकिन फिर कहानी ने अचानक करवट ली. और आज वो मुख्यमंत्री के साथ AAP के मंच पर खड़ा है.

इस दौरान जब सेखों से 2027 के विधानसभा चुनाव और टिकट को लेकर सवाल पूछा गया तो उसने कहा कि टिकट का फैसला पार्टी करेगी.
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गुरप्रीत सेखों ने क्या बताया?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सेखों का कहना है कि उसने अपनी जिंदगी पूरी तरह से बदल ली है. उनका दावा है कि उसके खिलाफ चल रहे सभी केस अब खत्म हो चुके हैं. रैली में सेखों ने भगवंत मान को अपना बड़ा भाई बताया. उसने कहा कि वो हमेशा उनका साथ देंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, सेखों का कहना है कि वो पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ थे. लेकिन उसके समर्थकों ने AAP में शामिल होने की सलाह दी. सेखों ने कहा, ‘मुझे SAD से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन मेरे समर्थकों ने मुझे AAP में जाने को कहा. इसलिए मैं पार्टी में शामिल हो रहा हूं.’
इस सभा को संबोधित करते हुए सीएम भगवंत मान सेखों का बचाव करते नज़र आए. उन्होंने कहा, ‘कई बार हालात इंसान को कुछ फैसले लेने पर मजबूर कर देते हैं. लेकिन जब कोई सही रास्ते पर लौटकर लोगों की सेवा करने लगता है, तो लोग उसे स्वीकार भी करते हैं और उसका साथ भी देते हैं.’
अब आम आदमी पार्टी में गुरप्रीत सिंह सेखों की एंट्री ने पंजाब की सियासत में बहस छेड़ दी है. कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने AAP के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष का कहना है कि एक तरफ सरकार पंजाब में गैंगस्टर संस्कृति के खिलाफ कार्रवाई की बात करती है और दूसरी तरफ गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी रह चुके व्यक्ति को राजनीतिक मंच दिया जा रहा है. अब देखना होगा कि क्या आम आदमी पार्टी गुरप्रीत सेखों को सम्मान के साथ-साथ टिकट भी देगी?
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