फेस्टिव सीजन आने वाला है. लेकिन इस बार त्योहारों की मिठास थोड़ी फीकी पड़ सकती है. वजह है चीनी की बढ़ती कीमतें. जी हां, चीनी महंगी होने से खाने-पीने की चीजें बनाने वाली कंपनियां दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं. खास तौर पर मिठाइयों, बिस्कुट, चॉकलेट और दूसरे चीनी से बनी चीजों के दाम बढ़ाए जा सकते हैं. इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि खाद्य कंपनियां चीनी की बढ़ती लागत से जूझ रही हैं. इसका सीधा असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने की आशंका है.
त्योहारी सीजन की मिठास रहेगी फीकी, मिठाई से लेकर चॉकलेट तक सब होंगे महंगे!
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में चीनी का औसत रिटेल प्राइस करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया. जून में यह 47 रुपये प्रति किलो था. कीमत में आए इस भारी इजाफे का असर चीनी से बनने वाले प्रोडक्ट्स पर पड़ सकता है.

पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में जोरदार तेजी आई है. इस चलते बिस्कुट और चॉकलेट वगैरा बनाने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ा है. इसके अलावा मिठाई बनाने वाले दुकानदार भी महंगी चीनी का दबाव महसूस कर रहे हैं. आमतौर पर त्योहारों के दौरान के चीनी महंगी हो जाती है. अब तो पहले से कीमतें आसमान छू रही हैं . ऐसे में अगर दाम और बढ़ते हैं तो त्योहारी सीजन पर लोगों को अपनी जेब और ढीली करनी पड़ सकती है.
कीमत बढ़ाने के साथ वजन घटा सकती हैं कंपनियांरिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनियां अब चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की भरपाई के लिए खुदरा कीमतों में इजाफा कर सकती हैं. इसके अलावा, पैकेट साइज (वजन घटाने) छोटा करने पर विचार कर रही हैं.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में चीनी का औसत रिटेल प्राइस करीब 62 रुपये प्रति किलोग्राम रहा. जून में यह 47 रुपये प्रति किलोग्राम था. लेकिन पिछले कुछ दिनों में चीनी की सप्लाई में कमी से चीनी के दाम तेजी से बढ़ गए हैं. चीनी की त्योहारी मांग बढ़ी है.
अगस्त में चीनी की कीमतों में जोरदार तेजी आई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 20 अगस्त को 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया. लेकिन पहले के मुकाबले दाम घटे हैं. 2 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में औसत खुदरा मूल्य 3.85% गिरकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया. हालांकि, थोक कीमतों में भी गिरावट आई. लेकिन खाद्य कंपनियों की लागत में इस कमी का पूरा असर अभी तक नहीं दिखा है.
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इसका सबसे बड़ा कारण चीनी की सप्लाई में कमी है. 2025-26 सीज़न के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान अब लगभग 3 करोड़ 6 लाख टन लगाया गया है, जो कि शुरुआती अनुमान 3 करोड़ 43 लाख टन से काफी कम है. आमतौर पर प्रमुख त्योहारों से पहले चीनी की मांग बढ़ जाती है क्योंकि आम लोग, मिठाई बेचने वाले दुकानदार और खाने-पीने की चीजें बनाने वाली कंपनियां चीनी का स्टॉक जमा कर लेते हैं.
भारत में चीनी का सीजन खत्म होने वाला है और स्टॉक अपेक्षाकृत कम है. इससे त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. त्योहारों पर चीनी की मांग काफी ज्यादा रहती है.
दाम बढ़ाने लगी कंपनियांकई कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने लगी हैं. उदाहरण के तौर पर, बीकाजी फूड्स ने अपनी सभी मिठाइयों की कीमतों में लगभग 2% की बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी ऋषभ जैन ने बताया कि चीनी पिछले महीने की तुलना में लगभग 20% अधिक महंगी हुई है. इसका असर जाहिर तौर पर उन प्रोडक्ट्स पर पड़ेगा, जिनमें चीनी का इस्तेमाल होता है. इससे बिस्कुट, कुकीज, मिठाई, चॉकलेट और पेय पदार्थों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है.
वहीं, सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी के लिए स्टॉक जमा करने से रोकने के लिए नियमों को भी सख्त कर दिया है. 1 सितंबर से, चीनी के बड़े उपभोक्ताओं को अपनी खपत के मुताबिक 15 दिनों तक का ही स्टॉक रखने की सीमा तय की गई थी.
इसके अलावा, सरकार ने घोषणा की है कि डीलरों के लिए स्टॉक सीमा 15 सितंबर से 30 नवंबर तक 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी जाएगी. इन उपायों से कीमतों में कुछ हद तक स्थिरता आई है. लेकिन इस गिरावट का असर अभी तक उत्पादों की कीमतों पर नहीं दिख रहा है.
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