त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में दूध, खोवा, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की मिलावट के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है. पिछले हफ्ते ही उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने डेयरी यूनिट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. जांच के दौरान कुछ जगहों पर ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई जिनका दूध या दूध से बने उत्पादों में होना सामान्य नहीं है. इनमें टैलकम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, रिफाइंड ऑयल और दूसरे केमिकल शामिल हैं.
दूध-मावे में मिलावट का बड़ा खेल, यूपी में छापेमारी के दौरान डिटर्जेंट और केमिकल बरामद
UP Cracks Down on Adulterated Milk and Khoya: उत्तर प्रदेश में त्योहारों से पहले मिलावटी दूध, खोवा, पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है. जांच में डिटर्जेंट, टैलकम पाउडर और दूसरे संदिग्ध पदार्थों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है. जानिए प्रशासन की कार्रवाई, FSSAI के नियम और घर पर मिलावट की शुरुआती जांच करने के आसान तरीके.

नकली खोवा आखिर बनता कैसे है
मिलावट का खेल सिर्फ दूध में पानी मिलाने तक सीमित नहीं है. कुछ मामलों में कम कीमत वाले गैर-डेयरी पदार्थों का इस्तेमाल करके दूध से बने उत्पाद जैसा रंग, बनावट और वजन तैयार करने की कोशिश की जाती है. 2025 में उत्तर प्रदेश की एक कार्रवाई में नकली खोवा तैयार करने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर, कॉर्न स्टार्च और वनस्पति घी के साथ एक सफेद पाउडर के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, जिसकी पहचान को लेकर डिटर्जेंट या टैलकम पाउडर की आशंका जताई गई थी.
यानी मामला सिर्फ स्वाद का नहीं है. अगर कोई गैर-डेयरी सामग्री या हानिकारक रसायन दूध या खोवे के नाम पर बेचा जा रहा है तो ग्राहक को पता ही नहीं होता कि उसने असल में क्या खरीदा है.
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सरकार ने अब क्या सख्ती की है
उत्तर प्रदेश प्रशासन ने साफ किया है कि जिन यूनिट्स में हानिकारक केमिकल, बाहरी फैट या मिलावट पाई जाती है, वहां संदिग्ध उत्पाद जब्त करके नष्ट किए जा सकते हैं और संबंधित यूनिट के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. राज्य में नकली या एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए नया SOP भी सामने आया है.
ये पहली बार नहीं है जब त्योहारों से पहले ऐसी कार्रवाई हो रही है. अक्टूबर 2025 में दिवाली से पहले यूपी में करीब 3,000 क्विंटल मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त की गई थी और हजारों सैंपल लिए गए थे.
घर पर दूध में डिटर्जेंट की जांच कैसे करें
FSSAI का DART यानी Detect Adulteration with Rapid Test कार्यक्रम आम लोगों को कुछ आसान घरेलू जांच के तरीके बताता है. दूध में डिटर्जेंट की जांच के लिए 5 से 10 ml दूध लें और उसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं. FSSAI के मुताबिक अगर घना झाग बनता है तो डिटर्जेंट की मौजूदगी का संकेत हो सकता है. सामान्य दूध को हिलाने पर भी झाग बन सकता है, लेकिन उसकी परत बहुत पतली होती है.
खोवे में स्टार्च की जांच भी हो सकती है
खोवा, छैना और पनीर में स्टार्च की जांच के लिए FSSAI 2 से 3 ग्राम सैंपल को पानी के साथ उबालकर ठंडा करने और फिर टिंचर आयोडीन की 2 से 3 बूंद डालने का तरीका बताता है. नीला रंग बनने पर स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिलता है.
लेकिन एक जरूरी सावधानी है. घर का टेस्ट सिर्फ शुरुआती संकेत देता है, अंतिम वैज्ञानिक प्रमाण नहीं. किसी खाद्य पदार्थ पर गंभीर शक हो तो उसे खाने से बचें और सैंपल को अधिकृत खाद्य परीक्षण लैब में जांच के लिए भेजना ज्यादा भरोसेमंद तरीका है. FSSAI के मुताबिक उपभोक्ता notified laboratory में खाद्य पदार्थ की जांच करा सकता है और खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत भी कर सकता है.
ग्राहक क्या करे
मिठाई या खोवा खरीदते समय सिर्फ रंग, खुशबू और कीमत देखकर फैसला न करें. पैक्ड प्रोडक्ट में लेबल, सामग्री, तारीख और लाइसेंस संबंधी जानकारी देखें. खुला खोवा या मिठाई खरीद रहे हैं तो साफ-सफाई और दुकान की विश्वसनीयता पर ध्यान दें. बहुत असामान्य रंग, गंध, बनावट या स्वाद मिले तो उसे सामान्य मानकर खाना ठीक नहीं है.
सबसे जरूरी बात ये है कि FSSAI के घरेलू टेस्ट जागरूकता के लिए हैं, हर तरह की मिलावट पकड़ने की गारंटी नहीं देते. FSSAI खुद DART में 50 से ज्यादा घरेलू परीक्षणों की जानकारी देता है.
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