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'ताने, मीम बनने और कैमरे से बचें', CJP प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस को ये सब सलाह मिली है

Jantar Mantar पर हुए भारी विरोध प्रदर्शन के बाद Delhi Police के जवानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है. एडवाइजरी में यह बताया गया है कि उन्हें प्रदर्शन के समय क्या करना है और क्या करने से बचना है.

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दिल्ली पुलिस के लिए एडवाइजरी जारी की गई. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली पुलिस के लिए अगस्त 2025 में नई गाइडलाइंस जारी की गईं हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों से व्यवहार के आधुनिक तरीकों और बचाव के नियमों को विस्तार से बताया गया है।
  • ये गाइडलाइंस सेंट्रल एजेंसियों की एडवाइजरी के आधार पर तैयार की गई हैं, जिसका मकसद पुलिस को नए दौर के प्रदर्शनकारियों के साथ न्यायसंगत और संयमित व्यवहार की रणनीति देना है।
  • गाइडलाइंस के अनुसार, पुलिसकर्मियों को कैमरे पर रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कंटेंट से बचते हुए संयमित और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना होगा, साथ ही जरूरत पड़ने पर घायल या असहाय लोगों की मदद करनी होगी।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के एक्शन पर काफी सवाल उठे थे. अब खबर है कि जेन जी प्रोटेस्टर्स से टकराव के बाद दिल्ली पुलिस के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई है, जिसमें खासतौर पर बताया गया है कि पुलिस को ‘नए जमाने के’ प्रदर्शनकारियों को साथ कैसे निपटना है. साथ ही यह भी बताया गया कि उन्हें विरोध प्रदर्शनों के दौरान किन चीजों से बचना है.

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सेंट्रल एजेंसियों ने एडवाइजरी तैयार की

गाइडलाइंस में दिल्ली पुलिस को बताया गया कि उन्हें इस बात पर खास ध्यान रखना होगा कि वो हमेशा कैमरे की नजर में हैं. इसी महीने (अगस्त 2025) की शुरुआत में सेंट्रल एजेंसियों ने एक एडवाइजरी तैयार की थी. इसे दिल्ली पुलिस के सभी 15 जिलों के साथ रेलवे और मेट्रो यूनिट्स को भी दिया गया. एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य है कि आज के दौर के प्रदर्शनकारियों से किस तरह से निपटना है. खासतौर पर 18 से 28 साल वालों के साथ. सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस जमाने के प्रदर्शनकारी शायद पुराने तरीकों से उकसाने की कोशिश न करें लेकिन इसके बदले वो गुस्सा दिलाने की कोशिश करेंगे और उस क्लिप को रिकॉर्ड कर वायरल रील्स और मीम के तौर पर ऑनलाइन ‘कंटेंट’ बना देंगे.  

महिला प्रदर्शनकारियों को न छुएं

एडवाइजरी में महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर खास निर्देश दिए गए हैं. निर्देश के मुताबिक, मेल पुलिस को महिला प्रदर्शनकारियों को छूने से मना किया गया है. उन्हें बताया गया कि महिला प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को आगे लाया जाए. जरूरत पड़ने पर मदद करने के लिए खड़े रहें.

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रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों से शांति, संयम और पॉजिटिव व्यवहार से डील करने के लिए कहा गया है. यह भी बताया गया कि अगर प्रदर्शनकारी उनके मुंह के पास फोन लाकर पर्सनल कमेंट करें. जैसे- ‘क्या उन्हें ये सब करके गर्व महसूस हो रहा?’, ‘वे रात में कैसे सो सकते हैं?’ या ‘वो अपने बच्चों को क्या बताएंगे?’ ऐसे कमेंट्स को सुनने के बाद उन्हें बस ‘सीधे सामने देखने’ को कहा गया है.

एडवाइजरी में पुलिस को कुछ हरकतों से बचने की भी चेतावनी दी गई है. जैसे- प्रदर्शनकारियों के फोन को फेंकना नहीं है. सामान नहीं छीनना है. उनकी चीजें फेंकना या उन पर चिल्लाना या मजाक बनाना सख्त मना है. प्रदर्शनकारियों के डांस, ताने, नकली सलामी या उनकी ओर दिखाए जा रहे प्लेकार्ड पर कोई रिएक्शन नहीं देना है. मोटा-मोटी बात, पुलिसकर्मियों को ऐसा कोई भी रिएक्शन देने से मना किया गया है, जो कैमरे पर रिकॉर्ड हो और बाद में ‘कंटेंट’ की तरह सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए.

बॉडी लैंग्वेज को सामान्य रखें

एडवाइजरी में यह भी बताया गया कि प्रदर्शनकारी उन्हें फूल, मिठाई, पानी की बोतलें या चाय दे सकते हैं. ऐसे में वो ऐसी चीजों को प्यार और शालीनता से ले लें या शालीनता से मना कर दें. पुलिस को खासतौर पर ‘मीम ट्रैप’ और ‘सोशल मीडिया जाल’ से बचने की भी चेतावनी दी गई है. जैसे अगर कोई प्रदर्शनकारी ट्रेंडिंग गाने बजाए, नारों में पुलिस वालों का नाम ले या पुलिस लाइन के पास वीडियो बनाए तो ऐसे समय पर पुलिसकर्मियों को अपने चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज को सामान्य और कंट्रोल में रखने की सलाह दी गई है. 

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गाइडलाइंस में ऐसी चीजों को बैकग्राउंड में होने वाले शोर की तरह लेने के लिए कहा गया है. इसके अलावा पुलिसकर्मियों को कुछ जरूरी और मानवीय काम करने के भी निर्देश दिए गए हैं. जैसे- अगर कोई प्रदर्शनकारी बेहोश हो जाए, गिर जाए या कोई घायल हो जाए तो ऐसी स्थिति में पुलिस को सबसे पहले आगे आने की सलाह दी गई है. ऐसी परिस्थिति में घायलों को उठाने, एम्बुलेंस बुलाने और रास्ता साफ कर उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाने की सलाह दी गई है. साथ ही बच्चों और मरीजों को इलाके से गुजरने के लिए बैरिकेड को हटाने में मदद करना भी शामिल है. 

छोटे बच्चों और विकलांगों की मदद

इसके अलावा विकलांग लोगों को पुलिस लाइन पार करने या गाड़ियों तक आसानी से पहुंचने में मदद करना शामिल है. एक सूत्र ने अखबार को बताया कि पुलिस को यह भी कहा गया है कि अगर कोई छोटा बच्चा अपने माता-पिता से भीड़ में बिछड़ गया हो, तो उसके साथ तब-तक रहना है, जब तक कि उसके माता-पिता मिल न जाएं. प्रदर्शन के समय भी पुलिसकर्मियों की भाषा और बॉडी लैंग्वेज ‘सम्मानजनक’ होनी चाहिए.  जैसे- अंकल, आंटी, सर, प्लीज हेल्प करिए, भीड़ को बढ़ाने के लिए हाथ जोड़कर अपील करना शामिल है. एडवाइजरी में इस तरीके को लाठी उठाने से ज्यादा ‘असरदार’ बताया है.

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