‘पाकिस्तान सरकार ने मुरीदके और बहावलपुर में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से बनाने के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया है. IMF से मिलने वाले एक अरब डॉलर का एक बड़ा हिस्सा निश्चित रूप से इस आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को फंड करने में इस्तेमाल किया जाएगा.’ 16 मई 2025 को भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज एयरबेस पर ये बयान दिया था. ये बयान सीजफायर यानी 10 मई के कुछ ही दिन बाद आया था और अब कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे रक्षामंत्री की ये बात सच होती दिखाई दे रही है.
ऑपरेशन सिंदूर में तबाह जैश का हेडक्वार्टर फिर तैयार हो गया, वीडियो भी आया सामने
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मरकज सुभानअल्लाह को निशाना बनाया था. अब सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि मरकज में मरम्मत का काम पूरा हो चुका है. यानी जिस आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत ने तबाह किया था, पाकिस्तान उसे फिर खड़ा कर रहा है.

पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर मरकज सुभानअल्लाह फिर से बनकर तैयार हो गया है. बाकायदा इसका वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में दिख रहा है कि भारतीय हमलों के बाद तबाह हो चुके इस कैंप में नया बना फर्श चमचमा रहा है. साथ ही छत की भी मरम्मत की गई है.
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने इस कैंप पर हमला करने के लिए एयरफोर्स के विमानों से मिसाइलें दागी थी. ये कौन से हथियार या मिसाइलें थीं, ये तो एक ऑपरेशनल सीक्रेट है. लेकिन संभावनाएं और कड़ियां जोड़ने पर पता चलता है कि ये सुखोई या रफाल से किया गया हमला था. विमानों से लॉन्च होने वाले हथियार बिल्कुल सटीकता से हमले कर रहे थे. ये वो हथियार थे, जो पहले बिल्डिंग की छत तोड़कर अंदर घुसते हैं. इसके बाद इनमें जबरदस्त ब्लास्ट होता है. आसपास इंसान हो या लोहा. सबके परखच्चे उड़ जाते हैं. सैटेलाइट तस्वीरों को देखें तो भी इसकी पुष्टि होती है.

मई 2026 में इंडिया टुडे टीवी की रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की थी. इंडिया टुडे ने तब हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों की जांच की थी, जिनमें तबाह गुंबद गहरे रंग के दिख रहे थे. इससे पता चलता था कि वहां नया सीमेंट का काम हुआ है और कॉम्प्लेक्स से मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा था. एक जियो-इंटेलिजेंस रिसर्चर ने कहा कि इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि इस जगह को फिर से चालू करने की कोशिश की जा रही है.

अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित 'मरकज़ सुभान अल्लाह', JeM का एक अहम ठिकाना था. इसका इस्तेमाल उसके कैडरों की भर्ती, ट्रेनिंग और उन्हें कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जाता था. 18 एकड़ के इस कॉम्प्लेक्स में, जिसे 'उस्मान-ओ-अली कैंपस' के नाम से भी जाना जाता है, एक मस्जिद और अन्य सुविधाएं भी थीं. बहावलपुर कैंप लंबे समय से भारत के खिलाफ JeM की गतिविधियों से जुड़ा रहा है.
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यह आतंकी समूह कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा है, जिनमें 2001 का संसद हमला, 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 का पुलवामा आत्मघाती बम धमाका शामिल है. माना जाता है कि पुलवामा हमले की योजना भी 'सुभानअल्लाह' कैंप में ही बनाई गई थी. इसके तबाह होने के बाद पाकिस्तान ने इसे फिर से बनवा दिया है क्योंकि सीधी लड़ाई में वो भारत से जीत नहीं पाता. लिहाजा वो प्रॉक्सी का इस्तेमाल करता है जिससे भारत में अस्थिरता लाई जा सके.
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