ऑपरेशन लोटस. एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर भाजपा की विरोधी पार्टियों के कान खड़े हो जाते हैं. आरोप लगते हैं कि इस ऑपरेशन में भाजपा ‘साम-दाम-दंड-भेद’ जैसे तमाम जुगत लगाकर विरोधी पार्टियों को तोड़ने का काम करती है. खबर हैं कि अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस ‘ऑपरेशन लोटस’ से आशंकित हैं. उन्होंने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का आरोप लगाया है. अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा ने उनकी सरकार गिराने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को लुभाने की कोशिश की है.
'विधायकों को 20-30 करोड़, मंत्री पद का लालच...', उमर अब्दुल्ला ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
Omar Abdullah ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का Statehood बहाल करने के मामले में उनके सब्र को कमजोरी न समझा जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार साफ करे कि इस कदम के लिए 'सही समय' से उनका क्या मतलब है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधायक को पाला बदलने यानी BJP में शामिल होने के बदले 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव दिया था.


11 जुलाई को श्रीनगर में सीएम उमर अब्दुल्ला की एक रैली थी. इस रैली को संबोधित करते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि बीजेपी के एक नेता और सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने उनके एक विधायक से संपर्क किया था. आरोप है कि उन्होंने विधायक को पाला बदलने यानी भाजपा में शामिल होने के बदले 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव दिया था. सीएम अब्दुल्ला ने कहा,
उन्होंने (बीजेपी ने) उन्हें 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव दिया. लेकिन वे हमारे एक भी विधायक को खरीदने में कामयाब नहीं हो पाए.
सीएम अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर बीजेपी उनकी पार्टी के हर विधायक को 100 करोड़ रुपये भी दे, तब भी वो अपने काम में सफल नहीं होगी. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हालिया नंबर गेम देखें तो सीएम उमर अब्दुल्ला को बहुमत की दिक्कत नहीं है. 90 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत होती है. उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास अभी 41 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 6 विधायक उन्हें बाहर से समर्थन दे रहे हैं. साथी ही 5 निर्दलीय और CPM के एक विधायक भी अब्दुल्ला सरकार के सपोर्ट में हैं.
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पूर्ण राज्य को लेकर केंद्र सरकार पर निशानासीएम अब्दुल्ला ने बीजेपी को न सिर्फ पार्टी तोड़ने, बल्कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मामले पर भी घेरा. इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार सुनील जी भट्ट की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के मामले में उनके सब्र को कमजोरी न समझा जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार साफ करे कि इस कदम के लिए सही समय से उनका क्या मतलब है? सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि उनके सब्र का मतलब खामोशी नहीं है और उन्होंने चेतावनी दी कि इसका गलत फायदा न उठाया जाए. उन्होंने कहा,
मैं उनसे पूछता हूं. खुदा के लिए (हमें बताएं) हमें कैसे पता चलेगा कि सही समय आ गया है? उस सही समय तक पहुंचने के लिए मुझे और मेरे साथियों को क्या करना होगा?
सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि अपनी सरकार बनने के बाद उन्होंने केंद्र को अपने वादे पूरे करने के लिए समय दिया था. लेकिन उनका आरोप है कि वे (केंद्र सरकार) यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं.
20 जुलाई को दिल्ली में विरोध प्रदर्शनसीएम अब्दुल्ला ने बताया कि वो 20 जुलाई को पूर्ण राज्य की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं. उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हों. उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज कर दिया कि इस मुद्दे पर राज्य के बाकि ग्रुप्स के साथ चर्चा नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग सिर्फ नेशनल कॉन्फ्रेंस या उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की पूरी आबादी से जुड़ा मुद्दा है.
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