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सोनम वांगचुक ने सरकार से मीटिंग की, बाहर निकलते दी बड़ी धमकी, अब मसला उनके 'घर' का है

लद्दाख सोनम वांगचुक का घर है. इसे लेकर उनकी कई मांगें हैं. इनपर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच एक बार फिर बातचीत हुई. लेकिन सोनम वांगचुक के मुताबिक कोई समाधान नहीं निकला. बैठक के बाद उन्होंने तंज कसते हुए कहा- “चाय अच्छी थी, लेकिन आगे कुछ नहीं बढ़ा.”

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सोनम वांगचुक ने कहा कि वो मीटिंग से संतुष्ट नहीं हैं (PHOTO- ANI)

लद्दाख के मुद्दे पर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच एक बार फिर बातचीत हुई. और इस बातचीच के बाद एक बार फिर से निराशा सामने आई है. पर्यावरणविद और लद्दाख की मांगों की प्रमुख आवाज रहे सोनम वांगचुक ने बातचीत के बाद प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि बैठक में माहौल भले ही अच्छा रहा हो, लेकिन असल मुद्दों पर कोई ठोस डेवलपमेंट नहीं हुआ. 

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वांगचुक ने बैठक के बाद तंज कसते हुए कहा, 'चाय अच्छी थी, लेकिन आगे कुछ नहीं बढ़ा.’

बातचीत में क्या हुआ?

ये पूरी बातचीत 9 सितंबर को हुई थी. इस दिन दिल्ली में गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई. इस बैठक से उम्मीद थी कि लद्दाख की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर कोई ठोस रास्ता निकलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सोनम वांगचुक के मुताबिक, जो भी डिस्कशंस हुए, वो ऑलरेडी पिछले मीटिंग में डिस्कस हो चुके थे. सोनम ने कहा,

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‘हम बहुत उम्मीदें लेकर आए थे. पिछली मीटिंग चार महीने पहले हुई थी. उस समय कहा गया था कि एक ड्राफ्ट बनाया जाएगा जिसपर चर्चा होगी. ड्राफ्ट के लिए हमने कुछ जरूरी बातों की लिस्ट भी दी थी. लेकिन मीटिंग में ऐसा कुछ नहीं हुआ. मीटिंग बुलाए जाने की वजह से हमने अपनी प्रस्तावित पदयात्रा स्थगित कर दी. गृह मंत्रालय चाहता है कि मामला सुलझे. लेकिन LG साहब लद्दाख में जमीन जैसे मुद्दों पर पॉलिसी में कई फेरबदल कर रहे हैं. हमने 19-24 सितंबर तक पदयात्रा रखी है. हम चाहते हैं कि लोग आएं और हमारा समर्थन करें.’

10 सितंबर से निकलने वाली थी पदयात्रा

यही नहीं, सोनम वांगचुक ने ये भी कहा कि 10 सितंबर से 24 सितंबर तक एक पद यात्रा निकलने वाली थी. इसमें देश भर से लोग समर्थन में आने वाले थे. उसे होल्ड करके सभी प्रतिनिधि दिल्ली में ये वाली मीटिंग अटेन्ड करने आए थे. लेकिन उनके मुताबिक, मीटिंग का फायदा कुछ हुआ नहीं.

तो ब्रीफली समझते हैं कि आखिर लद्दाख से आए प्रतिनिधि क्या मांग कर रहे हैं. लद्दाख के प्रतिनिधियों की लंबे समय से चार बड़ी मांगें रही हैं.

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  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
  • संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा
  • लोक सेवा आयोग और लेह-कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें
  • राजनीतिक अधिकार और स्थानीय स्तर पर फैसले लेने की ताकत
2019 से उठ रही मांग

2019 में जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश यानी Union Territory बनाया गया था. लेकिन इसे विधानसभा नहीं मिली. इसके बाद से ही स्थानीय संगठन ज्यादा राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं. इस बातचीत में केंद्र ने लद्दाख के लिए संविधान में नया प्रावधान Article 371(K) जोड़ने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत लद्दाख में सीधे चुनी जाने वाली एक UT-level संस्था को कुछ लेजिस्लेटिव अथॉरिटी दिए जाने की बात है.

इस संस्था को जमीन, कल्चर, भाषा, जंगल, एनवाइरनमेंट और नैचुरल रिसोर्सेज जैसे केसेस में कानून बनाने की ताकत देने का प्रस्ताव है. यानी केंद्र ने एक नया मॉडल सामने रखा है, लेकिन अभी इसकी पूरी तस्वीर साफ नहीं है.

लेकिन फिर सोनम वांगचुक नाराज क्यों हैं? क्योंकि इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि इस प्रस्तावित संस्था के पास असल कितनी ताकत होगी. लद्दाख के प्रतिनिधि चाहते हैं कि चुनी हुई संस्था के पास सिर्फ कागजी अधिकार न हों, बल्कि एग्जीक्यूटिव, बजटीय और प्लानिंग से जुड़े अधिकार भी हों. इसके अलावा पुलिस और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है.

ऑफिसर्स से ज्यादा अधिकार मांग रहे सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक का कहना है कि चुनी हुई सरकार या संस्था के पास अधिकारियों से ज्यादा अधिकार होने चाहिए. पुलिस और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी उसी के हाथ में होनी चाहिए. लेकिन केंद्र ने कहा है कि अब इन मुद्दों पर अक्टूबर में आगे चर्चा होगी.

यानी फिलहाल केंद्र का प्रस्ताव सामने आया है, लेकिन उसका ड्राफ्ट अभी तैयार नहीं है. और यही बात लद्दाख के प्रतिनिधियों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है. उनका कहना है कि जब तक ये साफ नहीं होता कि नए प्रावधान में असल अधिकार क्या होंगे, तब तक सिर्फ प्रस्ताव के आधार पर भरोसा करना मुश्किल है. यही नहीं, सोनम वांगचुक ने ऐसा हिंट किया है कि अगर सरकार की तरफ से जल्द ठोस कदम नहीं उठाया गया तो एक प्रदर्शन और पद यात्रा निकाली जाएगी. और उन्होंने सरकार से एक हफ्ते के अंदर क्लेरिटी और ठोस प्रस्ताव की उम्मीद जताई है.

(यह भी पढ़ें: सोनम वांगचुक को क्यों नहीं मिल रही अपने पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत?)

अगली अहम बातचीत अक्टूबर के पहले हफ्ते में होने की उम्मीद है. उसमें Article 371(K) के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर चर्चा होगी. तो फिलहाल केंद्र ने लद्दाख के लिए नया संवैधानिक मॉडल सामने रखा है, लेकिन लद्दाख के नेताओं को उसमें अभी भी राजनीतिक ताकत नजर नहीं आ रही. 

वीडियो: लद्दाख लौटे सोनम वांगचुक ने Gen Z Protest पर क्या कहा?

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