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IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग: लालू-राबड़ी समेत 9 लोगों पर आरोप तय, लेकिन दामाद बरी

Lalu Yadav family money laundering case: IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू यादव और उनके परिवार पर आरोप तय किए गए हैं. कोर्ट ने लालू यादव के दामाद राहुल यादव समेत 7 आरोपियों को मामले से बरी भी किया है

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यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं जबकि 7 आरोपियों को बरी किया गया।
  • यह मामला 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल का है, जिसमें आरोप है कि रेलवे के होटलों का ठेका नियमों का उल्लंघन कर निजी कंपनी सुजाता होटल्स को दिया गया था।
  • कोर्ट ने आरोप तय करने के बाद मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को रखी है, जो उनके खिलाफ चल रही जांच और कानूनी प्रक्रिया की दिशा निर्धारित करेगी।

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. हालांकि कोर्ट ने लालू यादव के दामाद राहुल यादव के साथ 7 आरोपियों को बरी कर दिया है.

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राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (PC एक्ट) विशाल गोगने ने यह आदेश दिया है. अदालत ने लारा प्रोजेक्ट्स, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, सुजाता होटल्स, विनय कोचर और विजय कोचर के खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए हैं.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा,

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"राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर अपराध से मिली कमाई का इस्तेमाल करने का गंभीर संदेह है. दोनों पटना की उस जमीन का फायदा उठा रहे हैं, जो उन्हें लालू प्रसाद यादव के कहने पर 2005 और 2014 के बीच ट्रांसफर की गई थी. तब वे केंद्रीय रेल मंत्री थे."

कोर्ट ने आगे कहा कि इससे संकेत मिलता है कि जब लालू रेल मंत्री थे, तब रेलवे अधिकारियों ने रांची और पुरी में होटलों की लीज देने के लिए टेंडर में हेर-फेर किया था. अदालत ने मामले में जिन लोगों को बरी किया है, उनके नाम हैं- राहुल यादव (लालू यादव के दामाद), गौरव गुप्ता, नाथ मल कंकणिया, विजय त्रिपाठी, डीएन तुलस्यान, राजीव रेलन और अभिषेक फाइनेंस.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है. तब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे. आरोप है कि उन्होंने रेलवे के रांची और पुरी स्थित बीएनआर (BNR) होटलों के रखरखाव का ठेका नियमों का उल्लंघन करते हुए निजी कंपनी 'सुजाता होटल्स' को दिया था. आरोपों के मुताबिक, पटना में एक कीमती जमीन के बदले सुजाता होटल्स को ये कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे. 

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सुजाता होटल्स के मालिक विनय कोचर और विजय कोचर हैं. करोड़ों रुपये की कीमत वाली यह जमीन कथित तौर पर बाजार या सर्कल रेट से बहुत कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी कंपनी को ट्रांसफर कर दी गई थी.

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इंडिया टुडे से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में CBI ने आरोप लगाया कि जमीन का लेन-देन होटल कॉन्ट्रैक्ट के बदले में किया गया एक तरह का 'क्विड-प्रो-क्वो' (एक चीज के बदले दूसरी चीज) था. इसके बाद ED ने CBI के आरोपों के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया. और लेन-देन से हुई कथित अवैध कमाई की जांच शुरू की थी. कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी.

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