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संजय दत्त के मराठी वाले बयान पर बवाल, प्रताप सरनाईक भी घिरे

संजय दत्त ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मराठी में बोलने के आग्रह पर अपने येरवडा जेल प्रवास का जिक्र करते हुए मजाकिया जवाब दिया. इसके बाद BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने सरनाईक की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए. मामला महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही राजनीतिक बहस से जुड़ गया.

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मराठी विवाद के बीच संजय दत्त का बयान (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • ठाणे के एक दही हांडी कार्यक्रम में महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने अभिनेता संजय दत्त से मराठी में बोलने को कहा, जिसके जवाब में संजय दत्त ने अपने येरवडा जेल प्रवास का मजाकिया उल्लेख किया।
  • महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव और ऑटो-टैक्सी चालकों के मराठी ज्ञान की जांच के कारण यह टिप्पणी राजनीतिक विवाद का विषय बन गई, खासकर जब भाजपाई विधायक ने मंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए।
  • इस विवाद के बाद भाषा नियमों के समान लागू होने को लेकर बहस तेज हुई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि सार्वजनिक मंच पर प्रसिद्ध व्यक्तियों और आम जनता के प्रति नियमों का पालन बराबर होना चाहिए।

संजय दत्त का एक मजाकिया जवाब महाराष्ट्र की मराठी भाषा वाली सियासत में विवाद बन गया है. ठाणे के एक दही हांडी कार्यक्रम में महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने अभिनेता से मराठी में बोलने को कहा. संजय दत्त ने इसके जवाब में अपने पुराने जेल प्रवास का जिक्र किया और बात हंसी-मजाक से निकलकर राजनीतिक बहस तक पहुंच गई.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरनाईक के मराठी में बोलने के आग्रह पर संजय दत्त ने कहा कि वो येरवडा जेल में छह साल रहे, लेकिन फिर भी मराठी नहीं सीख पाए. अभिनेता ने ये बात हंसते हुए कही. सरनाईक भी उस वक्त हंसते नजर आए. इसके बाद BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने मंत्री की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए.

येरवडा का जिक्र क्यों आया?

संजय दत्त का येरवडा वाला जिक्र किसी नए आरोप या गंभीर दावे के तौर पर नहीं था. उन्होंने अपने पुराने जेल प्रवास को मराठी न सीख पाने वाले जवाब के साथ जोड़कर मजाक किया था. संजय दत्त को 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले में अवैध हथियार रखने के मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्होंने पुणे की येरवडा जेल में सजा का एक हिस्सा काटा था.

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कार्यक्रम में अभिनेता ने पहले मराठी में अभिवादन भी किया. इसके बाद उन्होंने जेल का संदर्भ देते हुए कहा कि छह साल येरवडा में रहने के बावजूद वो मराठी नहीं सीख पाए. यानी विवाद की बुनियाद ये दावा नहीं है कि जेल में मराठी सिखाई जाती थी या नहीं, बल्कि ये है कि मंत्री के सामने अभिनेता ने मराठी न जानने की बात मजाक में कही और मंत्री की प्रतिक्रिया क्या थी.

BJP ने मंत्री पर क्यों निशाना साधा?

यहीं से मामला राजनीतिक हो गया. BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि एक अभिनेता के मराठी न जानने पर हंसी-मजाक हो सकता है, लेकिन आम ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए भाषा को लेकर सख्ती क्यों की जा रही है. उनका तर्क था कि नियम और अपेक्षाएं सबके लिए एक जैसी होनी चाहिए.

महाराष्ट्र में ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि मराठी भाषा को लेकर हाल के महीनों में राजनीतिक तनाव बढ़ा है. सार्वजनिक जीवन में मराठी के इस्तेमाल से लेकर ऑटो और टैक्सी चालकों के भाषा ज्ञान तक, मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है.

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ऑटो-टैक्सी वालों का मुद्दा कहां से आया?

परिवहन विभाग की भाषा संबंधी कार्रवाई इसी बहस का बड़ा हिस्सा है. पहले चरण में मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के मराठी ज्ञान की जांच की गई थी. जिन ड्राइवरों को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं पाया गया, उन्हें सुधार के लिए समय दिया गया. इसी नीति को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं कि भाषा की अनिवार्यता लागू करने का तरीका क्या होना चाहिए.

ऐसे माहौल में संजय दत्त का हल्का-फुल्का बयान भी राजनीतिक निशाने में बदल गया. BJP का सवाल मूल रूप से यही है कि अगर भाषा को लेकर नियम और सख्ती आम लोगों पर लागू होती है, तो सार्वजनिक मंच पर किसी चर्चित शख्स के मराठी न जानने को लेकर अलग रवैया क्यों दिखाया गया.

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विवाद अब संजय दत्त से आगे निकल चुका है

इस पूरे मामले में संजय दत्त का बयान एक शुरुआत भर है. असली राजनीतिक बहस प्रताप सरनाईक की प्रतिक्रिया और महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर अपनाए जा रहे रवैये पर है. एक तरफ मराठी को स्थानीय पहचान और सार्वजनिक संवाद की भाषा के तौर पर मजबूत करने की कोशिश है, दूसरी तरफ विपक्ष और आलोचक इसके लागू होने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं.

यानी येरवडा वाला मजाक अपने आप में शायद कुछ सेकेंड की बात था, लेकिन महाराष्ट्र की मौजूदा भाषा राजनीति ने उसे बड़ा मुद्दा बना दिया. अब बहस ये नहीं रह गई है कि संजय दत्त मराठी बोलते हैं या नहीं. सवाल ये है कि भाषा के नाम पर बनाए जा रहे नियमों का पैमाना सबके लिए बराबर है या नहीं.

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