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सहारनपुर में हटाई मस्जिद के नीचे कुआं निकला, ओपी राजभर ने अखिलेश से पूछा- 'वहां फातिहा पढ़ेंगे?'

Uttar Pradesh के Saharanpur कलेक्ट्रेट परिसर में एक मस्जिद को बुलडोजर चलाकर गिरा दिया गया. मलबा हटाने पर उसके नीचे एक कुआं मिला है. मस्जिद को लेकर मंत्री Omprakash Rajbhar ने सपा प्रमुख Akhilesh Yadav पर निशाना साधा है.

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में गिराई गई मस्जिद के नीचे एक कुआं मिला है. (फोटो: ITG)

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  • उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध घोषित मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर से गिराया, जिससे जमीन के नीचे करीब 10-15 फीट गहरा एक कुआं उजागर हुआ है।
  • मस्जिद के अवैध निर्माण और कोर्ट के आदेश के बाद दी गई बेदखली तथा जुर्माना निर्धारित करने के कारण मस्जिद को हटाने का निर्णय लिया गया था।
  • प्रशासन ने ASI से कुएं की जांच करवाई है और वहां सुरक्षा व पुलिस तैनात कर कुएं की स्थिति व उम्र का पता लगाने की प्रक्रिया जारी रखी है।
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राहुल कुमार

उत्तर प्रदेश में सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद हटाए जाने के बाद नीचे एक कुआं मिला है. शनिवार, 5 सितंबर को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मस्जिद को गिरा दिया था. रविवार, 6 सितंबर की सुबह तक मलबा हटाने का काम जारी रहा. इसी दौरान जमीन के नीचे कुआं दिखाई दिया. अब प्रशासन कुएं की उम्र और उसकी स्थिति का पता लगाने की तैयारी कर रहा है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI से इसकी जांच कराई जाएगी.

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करीब 15 फीट गहरा है कुआं

इंडिया टुडे से जुड़े राहुल कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, कुआं करीब 10 से 15 फीट गहरा है. इसकी गोलाई करीब 4 से 5 फीट बताई जा रही है. सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में बैरिकेडिंग कर दी है. मौके पर पुलिस बल भी तैनात है. किसी को कुएं के पास जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है. पुलिस ने कुएं के ऊपर लोहे की चादर भी रख दी है, ताकि मलबा उसके अंदर न गिरे.

शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को हटाने का काम करीब 16 घंटे तक चला. चार बुलडोजर लगाकर मस्जिद को गिराया गया. रविवार सुबह तक मलबा हटाया गया, तो ये कुआं सामने आया. 

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ASI करेगा कुएं की जांच

SDM सदर सुबोध कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि ASI से कुएं की जांच कराई जाएगी. SDM ने कहा, 

"संबंधित एजेंसियां जांच करेंगी और बताएंगी कि ये कुआं कितना बड़ा है. तकनीकी टीमों की जांच के बाद ही सभी चीजें साफ हो पाएंगी... ये ईंटों से बना हुआ कुआं है और उसी से बनी संरचना है…पहली बार देखने से ये कुआं ही नजर आता है..."

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'कुएं की उम्र का पता लगे'

इस मामले के शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने भी जांच की मांग की है. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि ASI की टीम को मौके पर बुलाया जाए. पूरे परिसर का सर्वे कराया जाए और उसकी वीडियोग्राफी भी हो. उनका कहना है कि जांच से यह साफ होना चाहिए कि कुआं कितना पुराना है और इस जगह का पुराना स्वरूप क्या था.

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मस्जिद पक्ष इस इमारत को कई सौ साल पुरानी बता रहा था. ऐसे में उसके नीचे मिले कुएं की उम्र भी पता की जानी चाहिए. विकास ने कहा कि पूरे मामले की जांच ऐतिहासिक तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए.

‘मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे?’

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. ‘X’ पर उन्होंने लिखा,

“अखिलेश जी, सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? क्या आप मसूद भाई की बातों का समर्थन करेंगे? यूपी पूछ रहा है, बताइए ना?”

'मस्जिद नहीं, हमारा दिल टूटा है'

ओमप्रकाश राजभर ने यह टिप्पणी सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर की. मसूद ने मस्जिद गिराए जाने पर कहा,

“जो कुछ हुआ है, वो देश के संविधान के लिए, प्रदेश की न्यायिक प्रणाली के लिए बहुत ही दुखद है. पहली बात तो जिस आदेश के तहत कार्रवाई की गई, वह ध्वस्तीकरण का आदेश था ही नहीं. उसमें केवल बेदखली का आदेश था और उसमें 22 दिन का समय भी बचा हुआ था... आपने पूरा स्थान एक झटके के अंदर साफ कर दिया. मस्जिद की केवल इमारत नहीं टूटी है. ये हमारा दिल टूटा है.”

‘गवाह भी तुम, वकील भी तुम’

इस मामले पर कांग्रेस के राज्यसभा सासंद इमरान प्रतापगढ़ी की भी प्रतिक्रिया आई. उन्होंने सहारनपुर में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन की आलोचना की. ‘X’ पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा,

"अपील भी तुम, दलील भी तुम. गवाह भी तुम, वकील भी तुम. जिसे भी चाहो हराम लिख दो, जिसे भी चाहो हलाल कर दो."

ये भी पढ़ें: 'रोककर दिखा दो...' पुलिस के रोकने पर बोलीं सपा सांसद इकरा हसन, DM परिसर में मस्जिद पर चला बुलडोजर

क्या है विवाद?

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को लेकर विवाद करीब डेढ़ साल से चल रहा था. विकास त्यागी ने इसकी शिकायत की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि डीएम ऑफिस कॉम्प्लेक्स में मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया गया है.

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि कॉम्प्लेक्स का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों के लिए किया जा रहा था. यहां एक डाकघर और कुछ कमरे होने की बात भी कही गई. आरोप था कि इन कमरों को बाहरी लोगों को किराए पर दिया गया और मस्जिद कमेटी किराया वसूल रही थी.

कोर्ट पहुंचा मामला

मामला कोर्ट पहुंचा. सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने विवादित जमीन को सरकारी जमीन माना. आदेश में मस्जिद के निर्माण को अवैध बताया गया और इस पर कब्जा करने वालों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. साथ ही परिसर खाली करने का आदेश भी दिया गया.

वहीं मस्जिद पक्ष ने जमीन को वक्फ संपत्ति बताया. मस्जिद कमेटी का दावा था कि मस्जिद करीब 150 साल पुरानी है. हालांकि, अदालत में इस दावे के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए जा सके.

सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में अपील की. जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर को यह अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा गया. अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की तैयारी तेज कर दी.

मस्जिद पर चला बुलडोजर

शुक्रवार, 4 सितंबर की रात से ही कलेक्ट्रेट के बाहर राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई. सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर पूरे मामले पर अपनी बात रखी. सहारनपुर देहात के सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता भी कलेक्ट्रेट पहुंचे.

नेताओं को कलेक्ट्रेट के गेट के बाहर ही रोक दिया गया. बाद में नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात हुई. इस दौरान मस्जिद पर संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई. रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय प्रशासन की तरफ से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी. लेकिन शनिवार तड़के हालात बदल गए और मस्जिद को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई.

मस्जिद पक्ष से जुड़े लोगोें का आरोप है कि मस्जिद पर आए फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील करने के लिए उनके पास करीब 22 दिन थे. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने 22 दिन का इंतजार नहीं किया और मस्जिद पर बुलडोजर चला दिया. 

वीडियो: लखनऊ यूनिवर्सिटी के लाल बारादरी मस्जिद पर बवाल क्यों?

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