उत्तर प्रदेश के कानपुर में लगातार हो रही बारिश के बीच एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया. इस हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की दबकर मौत हो गई. मृतकों में पिता और उसकी तीन बेटियां शामिल हैं. एक बेटी गंभीर रूप से घायल है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. परिजनों ने पुलिस और मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही और मदद में देरी का आरोप लगाया है.
कानपुर में घर गिरने से पिता और 3 बेटियों की मौत, घायल चौथी बेटी की दिसंबर में शादी थी
Kanpur में लगातार बारिश से एक कच्चा मकान गिरने से पिता और तीन बेटियों की मौत हो गई. एक बेटी गंभीर रूप से घायल है. परिजनों ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. कानपुर में कच्चे मकान के गिरने से मौत का तीन दिन में यह दूसरा मामला है.

इंडिया टुडे से जुड़े सिमर चावला की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव का है. रविवार, 6 सितंबर की सुबह मुकेश कुमार अपनी चार बेटियों के साथ घर में थे. पिछले कई घंटों से रुक-रुककर बारिश हो रही थी. बारिश की वजह से मिट्टी से बना पुराना दो मंजिला मकान कमजोर हो गया और अचानक भरभराकर गिर गया. मकान गिरने के बाद मुकेश और उनकी चारों बेटियां मलबे के नीचे दब गईं.
घर गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों ने बिना इंतजार किए मलबा हटाना शुरू कर दिया. करीब दो घंटे तक लोग हाथों से मलबा हटाते रहे. बाद में पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य में मदद की. मलबे से सभी पांच लोगों को बाहर निकालकर पटारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.
दिसंबर में होनी थी बेटी की शादीअस्पताल में डॉक्टरों ने मुकेश कुमार और उनकी तीन बेटियों को मृत घोषित कर दिया. मृतकों में माया (17), नीतू (7) और पल्लवी (5) शामिल हैं. वहीं काजल उर्फ लक्ष्मी (20) गंभीर रूप से घायल हैं. प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
काजल की शादी इसी साल दिसंबर में होनी थी. अब परिवार में शादी की तैयारियों की जगह मातम है. मुकेश कुमार पेशे से किसान थे और अपनी बेटियों के साथ इसी कच्चे मकान में रहते थे. लगातार बारिश के बीच पुराना मिट्टी का ढांचा कमजोर हुआ और यह हादसा हो गया.
हादसे के बाद मृतकों के रिश्तेदारों ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. मुकेश के चचेरे भाई तेज बहादुर सिंह का आरोप है कि मकान गिरने के बाद साढ़ पुलिस को कई बार फोन किया गया, लेकिन तुरंत कोई मदद नहीं मिली. उनका यह भी आरोप है कि पटारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की मौजूदगी नहीं थी, जिसकी वजह से घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल सका. रिश्तेदारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
पुलिस ने क्या बताया?पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे. पुलिस ने बताया कि तीन फायर टेंडर और बचाव उपकरणों के साथ फायर ब्रिगेड की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद की. सभी पांच लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया. DCP (साउथ) दीपेन्द्र नाथ चौधरी ने बताया,
“घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और सभी लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया. चीफ मेडिकल ऑफिसर से भी संपर्क किया गया है. एसडीएम भी मौके पर मौजूद हैं. पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी.”
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कानपुर में तीन दिन में दूसरा हादसाकानपुर में कच्चे मकान के गिरने से मौत का यह तीन दिन में दूसरा मामला है. इससे पहले 3 सितंबर की रात कानपुर देहात के मूसानगर थाना क्षेत्र के जरसेन गांव में भी कच्चे मकान की दीवार गिर गई थी. उस समय मुकेश अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ घर में थे. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में 7 साल की बेटी और 3 साल के बेटे की मौत हो गई थी, जबकि मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था.
‘पक्का मकान मांगा था, नहीं मिला’घटना के बाद मुकेश की पत्नी को मानसिक आघात लगा है. परिवार का आरोप था कि उन्होंने कई बार प्रधान और अधिकारियों से पक्के आवास की मांग की थी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई. मुकेश मजदूरी करके परिवार चलाते थे और उनके पास जमीन का भी कोई टुकड़ा नहीं था. परिवार का आरोप था कि आवास के लिए उनसे पैसे भी मांगे गए.
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