जम्मू-कश्मीर के राजौरी से एक दुखद घटना सामने आई है. यहां 17 साल की एक बीमार बच्ची को अस्पताल ले जा रही गाड़ी कीचड़ में फंस गई. गाड़ी लगभग 3 घंटे तक वहां फंसी रही. इससे इलाज का कीमती वक्त हाथ से निकल गया और बच्ची की जान चली गई. जिला प्रशासन ने इस मामले में एक्शन लेते हुए एक सरकारी इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया. प्रशासन ने मामले की आगे की जांच के आदेश भी दिए हैं.
3 घंटे कीचड़ में फंसी रही गाड़ी, अस्पताल नहीं पहुंच पाई बीमार बच्ची, जान चली गई
वॉलंटियर्स ने गाड़ी को बाहर तो निकाल लिया, लेकिन लड़की की हालत बिगड़ गई. देरी पहले ही हो चुकी थी. लिहाजा अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई. इलाके के कई दूर-दराज गांवों के लिए एकमात्र सड़क ही है जो उनका बाकी शहरों से संपर्क है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना 7 अगस्त की है. मेथयानी गांव की रहने वाली एक लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ गई. उसे राजौरी के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) ले जाया जा रहा था. लेकिन तभी चक मेथयानी में मिट्टी खिसकने (मडस्लाइड) के कारण गाड़ी फंस गई. अधिकारियों के मुताबिक, बाद में वॉलंटियर्स ने गाड़ी को बाहर तो निकाल लिया, लेकिन लड़की की हालत बिगड़ गई. देरी पहले ही हो चुकी थी. लिहाजा अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई.
घटना चक मेथयानी-पांगलार-कोटेचारवाल रोड पर हुई. इलाके के कई दूर-दराज गांवों के लिए एकमात्र सड़क यही है जो उनका बाकी शहरों से संपर्क कराती है. पिछले साल मॉनसून के दौरान मेथयानी के पास यह सड़क बह गई थी. बाद में इसे अस्थायी रूप से ठीक भी किया गया था. अधिकारियों के मुताबिक करीब दो हफ्ते पहले इसी हिस्से में एक और बार मिट्टी खिसकने (मडस्लाइड) की घटना हुई थी. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी यह सड़क गाड़ियों के चलने लायक नहीं रह गई थी.
कोटरंका के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC) ने इस मामले में रिपोर्ट सबमिट की है. रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की लगभग एक महीने से बीमार थी. उसे पहले जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था. करीब दो हफ्ते पहले उसे डिस्चार्ज कर दिया गया था, लेकिन उसकी हालत फिर बिगड़ गई. इसके बाद परिवार वाले उसे GMC राजौरी ले गए. ADC की रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क बंद होने की वजह से करीब दो से तीन घंटे की देरी हुई.
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि भूस्खलन और गहरे गड्ढों के कारण सड़क की हालत बहुत खराब थी. इससे वह सड़क गाड़ियों की आवाजाही के लायक नहीं थी. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नारला बाम्बल, कोटचरवाल और पंगलार के निवासियों को मरीजों, अनाज और खाद को लाने-ले जाने में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था.
सड़क चलने लायक नहीं थीजिला प्रशासन ने बताया कि PMGSY डिवीजन राजौरी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने एक आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप पर मैसेज किया. उन्होंने बताया था कि सड़क ठीक कर दी गई है और आवाजाही के लायक है. जबकि ऐसा नहीं था. बाद में ADC की जांच रिपोर्ट में कुछ और ही बात सामने आई. रिपोर्ट पर राजौरी के जिला विकास आयुक्त (DDC) अभिषेक शर्मा ने संज्ञान लिया. DDC ने सड़क प्रोजेक्ट के इंचार्ज, PMGSY सब-डिवीजन कालाकोट के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) को जांच पूरी होने तक तुरंत सस्पेंड करने का आदेश दिया.
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बार-बार कहने पर भी नहीं बनी सड़कDDC ने कहा कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं हुई. ये दिखाता है कि घोर लापरवाही हुई है और आधिकारिक निर्देशों का पालन नहीं किया गया था. एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को बस सस्पेंशन पर नहीं छोड़ा गया. उनसे पूछा गया कि सड़क की स्थिति के बारे में गलत जानकारी देने और समय पर उसकी मरम्मत न करवा पाने के कारण उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?
इंजीनियर का स्पष्टीकरण आने और उस पर विचार होने तक उनकी सैलरी रोक दी गई है. साथ ही राजौरी के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कमिश्नर (ADDC) को निर्देश दिया गया है कि वो मामले की जांच कर 7 दिनों में पूरी रिपोर्ट सौंपें.
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