9 दिसंबर 2022. यांग्त्से. इसी दिन भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए थे. घटना ने खूब सुर्खियां बटोरीं. कई सवाल भी उठे. और अब, इस घटना के 1336 दिन बाद अरुणाचल प्रदेश से फिर ऐसे ही दावे सामने आए हैं. सोशल मीडिया पर भारत-चीन के सैनिकों के बीच ‘फेसऑफ’ की बातें कही जा रही हैं. हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. आखिर इस दावे की सच्चाई क्या है? ये 'स्टैंडऑफ' और 'फेसऑफ' क्या होता है? भारत सरकार इस पर क्या कह रही है? एक-एक करके सब समझते हैं.
भारत-चीन सैनिकों के बीच ‘फेसऑफ’ का दावा, आखिर इसका मतलब क्या होता है?
LAC के कई इलाकों को लेकर भारत और चीन की अलग-अलग धारणा है. इसी वजह से पेट्रोलिंग के दौरान दोनों सेनाएं कई बार आमने-सामने आ जाती हैं.

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज अपलोड किए जा रहे हैं, जिनमें भारत-चीन के सैनिक दिख रहे हैं. दावा है कि ये 'फेस-ऑफ' के दौरान का एक वीडियो है. इसमें दोनों देशों के सैनिक आपस में बात करते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, ये वीडियो कब का है? डीपफेक है? या किसी फ्रेंडली मीटिंग का, ये बात किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट नहीं है. सिर्फ वीडियो में बातें करते हुए सैनिक दिख रहे हैं. कहा जा रहा है कि ये फेस ऑफ का वीडियो है. लेकिन ये 'फेस-ऑफ' या ‘स्टैंडऑफ’ होता क्या है?
'स्टैंडऑफ' या 'फेस-ऑफ' क्या होता है?आमतौर पर चाहे वो इंटरनेशनल बॉर्डर हो. लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) हो या लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC). लगभग हर जगह भारत के सामने पाक-चीन की सेना होती है. LAC के कई इलाकों को लेकर भारत और चीन के अलग-अलग दावे हैं. इसी वजह से पेट्रोलिंग के दौरान दोनों सेनाएं कई बार आमने-सामने आ जाती हैं. अब LAC पर कई भारतीय इलाके ऐसे हैं, जिन पर चीन दावा करता रहता है. यही वजह है कि पेट्रोलिंग के दौरान कई बार दोनों सेनाएं आमने-सामने आ जाती हैं.
स्टैंडऑफ या फेस-ऑफ में जंग नहीं होती. आमतौर पर होता यह है कि
– दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाते हैं.
– दोनों अपनी-अपनी सीमा बताते हुए सामने खड़े रहते हैं.
– कई बार धक्का-मुक्की, बैनर दिखाना या तीखी बहस भी हो जाती है.
– सैनिकों के पास हथियार तो होते हैं, लेकिन आमतौर पर उनका इस्तेमाल नहीं किया जाता. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि तनाव न बढ़े.
‘फेस ऑफ’ का मतलब युद्ध नहीं होता. हालांकि, ऐसी स्थिति सीमा पर तनाव का संकेत मानी जाती है. भारत और चीन के बीच LAC की एक जैसी समझ नहीं है. भारत मानता है कि LAC किसी एक निश्चित पॉइंट तक है. लेकिन कई जगहों पर चीन उसे अलग मानता है. उदाहरण- अगर भारतीय और चीनी पेट्रोलिंग पार्टियां मिलीं. थोड़ी बातचीत हुई और दोनों लौट गए तो इसे ‘फेस-ऑफ’ कहा जाएगा. लेकिन अगर दोनों वहीं रुक गए. किसी ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और मामला कमांडर स्तर तक पहुंच गया, तो वह स्टैंडऑफ कहलाता है.
अब होता ये है कि भारतीय सेना अपनी समझ के अनुसार पेट्रोलिंग (गश्त) करती है. चीन की PLA भी अपनी समझ के अनुसार उसी इलाके तक आ जाती है. कई बार दोनों पेट्रोलिंग पार्टियां आमने-सामने आ जाती हैं. जब ये होता है तो इसे अक्सर स्थानीय कमांडर्स के लेवल पर सुलझा लिया जाता है. ताकि पेट्रोलिंग होती रहे और तनाव न बढ़े. जरूरत पड़ने पर स्थानीय कमांडर Flag Meeting करके मामला सुलझा लेते हैं. अधिकतर मामलों में कुछ घंटों या कुछ दिनों बाद दोनों पक्ष पीछे हट जाते हैं. हालांकि कई बार तनाव बढ़ भी जाता है और गलवान घाटी जैसी घटना सामने आती है.
इस बार जिस जगह 'ताकसिंग' से फेस-ऑफ के दावे सामने आए हैं, उसे भी समझ लेते हैं. ताकसिंग, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले का एक इलाका है. ये पहाड़ी, ठंडा और आबादी से काफी दूर है. यह LAC के काफी पास है. इसी वजह से इस इलाके को सैन्य रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है. ताकसिंग के कुछ इलाकों को लेकर 1959 से ही भारत-चीन के बीच मतभेद हैं. वैसे अभी तक तो ऐसा देखने को मिला है कि जब-जब चीन ने भारतीय इलाकों में घुसने की कोशिश की, भारतीय सेना ने मजबूती से उसका जवाब दिया है.
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स्टैंडऑफ के दावों पर सरकार ने क्या कहा?इस कथित भारत-चीन फेस-ऑफ से जुड़े वायरल वीडियो और तस्वीरों पर PIB ने एडवाइजरी जारी की है. PIB ने कहा है कि सोशल मीडिया पर मौजूद PLA के विजुअल्स वेरीफाईड नहीं हैं. केवल रक्षा मंत्रालय तथा भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा जारी आधिकारिक विजुअल्स पर भरोसा किया जाए.
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