करोड़ों UPI यूजर्स के मन में इन दिनों एक सवाल घूम रहा है. सवाल ये कि क्या अब हर ऑनलाइन पेमेंट पर जेब ढीली करनी पड़ेगी? सोशल मीडिया पर खबर फैली कि UPI पर चार्ज लगने वाला है. लेकिन अब इसे लेकर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार ने 8 अगस्त को बताया है कि आम लोगों को UPI पेमेंट पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा. यानी आप किसी को पैसे भेज रहे हैं. दुकान पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर रहे हैं या रोजमर्रा का कोई भुगतान कर रहे हैं, तो आपकी जेब से UPI का कोई अलग चार्ज नहीं लिया जाएगा.
UPI पर चार्ज लगेगा या नहीं? सरकार ने साफ कर दिया, लेकिन असली पेंच MDR में है
सरकार ने कहा है कि आने वाले समय में कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR यानी Merchant Discount Rate लगाया जा सकता है. हालांकि ये हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा.

लेकिन इसी के साथ UPI को लेकर एक और बड़ा बदलाव सामने आया है. इंडिया टुडे के मुताबिक, सरकार ने कहा है कि आने वाले समय में कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR यानी Merchant Discount Rate लगाया जा सकता है. हालांकि ये हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा.
MDR क्या होता है?जब आप किसी दुकान पर कार्ड या डिजिटल पेमेंट से पैसे देते हैं तो पेमेंट सिस्टम को चलाने वाली कंपनियों और बैंकों को एक फीस मिलती है. इसी फीस को MDR कहा जाता है. सरकार की बात के मुताबिक, अगर UPI पर MDR लागू किया भी गया तो इसका असर सिर्फ कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर होगा और एक तय रकम से ऊपर के पेमेंट पर ही होगा. सरकार ने ये भी कहा है कि अगर भविष्य में MDR लगाया जाता है तो इसकी दर डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होगी. ये चार्ज एक तय सीमा से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक ही सीमित रहेगा. यानी ऐसा नहीं होगा कि हर UPI पेमेंट पर एक जैसा चार्ज लग जाए.
Ministry of Finance ने कहा है कि आम लोगों के लिए Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री रहेंगे. सरकार ने ये भी कहा है कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा. तो फिर सवाल है कि सरकार ने ये बदलाव करने की जरूरत क्यों महसूस की?
दरअसल, लोकसभा ने एक दिन पहले Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव से जुड़ा बिल पास किया है. इस बदलाव से सरकार को UPI और कुछ दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम पर चार्ज लगाने की व्यवस्था करने की ताकत मिलती है. यहीं से ये बात कही जाने लगी कि अब UPI पेमेंट्स पर चार्ज लगेंगे. हालांकि, सरकार का कहना है कि इसका मतलब ये नहीं है कि अब हर UPI पेमेंट पर पैसे लगेंगे. ये एक तरह की कानूनी व्यवस्था है, ताकि जरूरत पड़ने पर UPI के लिए MDR तय किया जा सके.
UPI को मेंटेन करने का खर्चाइंडिया टुडे के मुताबिक, UPI पर हर महीने करोड़ों ट्रांजैक्शन हो रहे हैं. सिस्टम जितना बड़ा होता जा रहा है, उसे सुरक्षित रखने और चलाने का खर्च भी बढ़ रहा है. साइबर सिक्योरिटी, ऑनलाइन फ्रॉड रोकने, सर्वर और दूसरे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार अपग्रेड करने के लिए इंवेस्टमेंट की जरूरत है. सरकार का कहना है कि सिर्फ सरकारी सब्सिडी के भरोसे UPI को लंबे समय तक चलाना सही मॉडल नहीं होगा. इसलिए ऐसा सिस्टम तैयार करना जरूरी है, जिसमें डिजिटल पेमेंट का पूरा नेटवर्क अपने खर्च को संभाल सके और इस सेक्टर में ज्यादा कंपनियां भी आएं. इससे कंपटीशन बढ़ेगा और UPI को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
हालांकि इस पूरे फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. 6 अगस्त को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक लम्बा-चौड़ा ट्वीट किया. उसमें लिखा कि मोदी सरकार द्वारा लाया गया टैक्सेशन एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 उस वैधानिक गारंटी को समाप्त कर देता है, जो अब तक UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त बनाए हुए थी.
इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन इस पलटवार किया और कहा ‘जयराम रमेश जी, कोई गलत या भ्रामक बात फैलाने से पहले कृपया इन बातों पर भी गौर कर लीजिए.’ उन्होंने लिखा कि MDR का पैसा ग्राहकों से नहीं, बल्कि मर्चेंट्स से लिया जाता है. इससे बैंक और फिनटेक कंपनियां UPI की तकनीक, सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश कर सकेंगी. इसका फायदा सभी UPI यूजर्स को मिलेगा.
फिर जयराम रमेश ने इसका जवाब दिया. उनका कहना है, सरकार भले ही ये कह रही हो कि MDR दुकानदार से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं. लेकिन इसका असर आखिरकार ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. उनका तर्क है कि दुकानदार अपनी लागत निकालने के लिए सामान की कीमत बढ़ा सकते हैं. या अलग-अलग पेमेंट तरीकों के लिए अलग कीमत रख सकते हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि मर्चेंट सिर्फ बड़े कारोबारी नहीं होते. इसमें छोटे दुकानदार, किराना स्टोर और रेहड़ी-पटरी वाले भी शामिल हैं. यानी अगर कोई चार्ज आया तो उसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है. यानी सरकार और विपक्ष के बीच असली सवाल यही है कि अगर भविष्य में UPI पर MDR आता है, तो उसका बोझ आखिर किस पर पड़ेगा.
(यह भी पढ़ें: 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज, जानिए कितना एक्स्ट्रा पैसा कटेगा)
सरकार फिलहाल कह रही है कि आम यूजर से UPI पेमेंट के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा. Person-to-Person पेमेंट फ्री रहेगा और ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट भी फ्री रहेंगे. सरकार ने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि UPI से जुड़े इस बदलाव के पीछे किसी बाहरी दबाव का हाथ है. वित्त मंत्रालय ने इन दावों को गलत और भ्रामक बताया है. सरकार का कहना है कि UPI भारत का अपना डिजिटल पेमेंट सिस्टम है. इसे 2016 में शुरू किया गया था और जनवरी 2020 से इसे आम लोगों और मर्चेंट्स के लिए फ्री रखा गया है. National Payments Corporation of India के मुताबिक, जुलाई 2026 में UPI पर करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ.
वीडियो: खर्चा पानी: UPI Payment Charges पर सरकार का क्या जवाब आया है?









