दिल्ली पुलिस ने इंडियन एयरफोर्स के एक विंग कमांडर को गिरफ्तार किया है. अधिकारी पर कथित हनीट्रैप में फंसकर डिफेंस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है. जांचकर्ताओं को शक है कि इस घटना का संबंध जासूसी के किसी बड़े नेटवर्क से हो सकता है. पुलिस के मुताबिक, अधिकारी को दो महीने पहले अरेस्ट किया गया था. उन पर 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट' के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में है और गिरफ्तारी के बाद से उसने जमानत की अर्जी नहीं दी है.
हनीट्रैप में फंसे IAF के विंग कमांडर? 'पाकिस्तानी एजेंट' से डिफेंस डेटा लीक करने का आरोप
यह कार्रवाई Indian Air Force के अधिकारियों की शिकायत के बाद की गई है. आरोपी अधिकारी को 30 मई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था. उस पर आरोप था कि उसे पाकिस्तान के एक संदिग्ध इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने 'हनी-ट्रैप' में फंसाया था

यह कार्रवाई एयरफोर्स के अधिकारियों की शिकायत के बाद की गई है. आरोपी अधिकारी को 30 मई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था. उस पर आरोप था कि उसे पाकिस्तान के एक संदिग्ध इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने 'हनीट्रैप' में फंसाया था. शुरुआत में उससे पुलिस कस्टडी में पूछताछ की गई. बाद में अदालत ने उसे तिहाड़ जेल भेज दिया. सूत्रों ने लल्लनटॉप को बताया कि पहले ही अधिकारी पर नजर रखी जा रही थी. वह कड़ी निगरानी में था. सर्विलांस नेटवर्क के कदमों की वजह से वह पकड़ा गया क्योंकि IAF ऐसी गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है.
दिल्ली पुलिस को शक है कि वह जासूसी के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. इसके जरिए कथित तौर पर सेना से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जा रही थी. एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इस कथित जानकारी लीक के पीछे कोई विदेशी हैंडलर काम कर रहा था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक महिला ने सोशल मीडिया के जरिए अधिकारी से संपर्क किया था. जांच करने वालों को शक है कि वह महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के इशारे पर काम कर रही थी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अधिकारी का महिला से कॉन्टैक्ट हुआ, तब वो अपनी निजी जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. बाद में ऑनलाइन चैट और वीडियो कॉल के जरिए यह बातचीत और बढ़ गई. आरोप है कि अधिकारी ने उस महिला के साथ सेंसिटिव डॉक्यूमेंट्स और रक्षा से जुड़ी जानकारियां डिजिटली शेयर कीं. जांच करने वालों का मानना है कि इसमें सेना की अहम जानकारी शामिल हो सकती है.
जांच का एक और पहलू एक खास मोबाइल ऐप्लीकेशन पर आकर रुका है. अधिकारी ने कथित तौर पर उस ऐप्लीकेशन को इंस्टॉल किया था. आरोप है कि अधिकारी ने एक और सैनिक से फोन में वो ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा था. यह ऐप स्पाईवेयर या रिमोट-एक्सेस मालवेयर के तौर पर काम करने वाला हो सकता है. इन ऐप्स का इस्तेमाल डेटा निकालने, लोकेशन ट्रैक करने और बातचीत सुनने में किया जाता रहा है. इसीलिए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच जारी है.
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जांचकर्ताओं ने 30 जुलाई, 2026 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. इस मामले पर जानकारी देते हुए एयरफोर्स के प्रवक्ता ने बताया,
वह पहले से कड़ी निगरानी में था. उसे संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया है. आगे की जांच जारी है.
अधिकारियों ने बताया कि मामला अब कोर्ट में है. साथ ही इस मामले ने साइबर-स्पाई और रक्षाकर्मियों को निशाना बनाने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.
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