The Lallantop

हनीट्रैप में फंसे IAF के विंग कमांडर? 'पाकिस्तानी एजेंट' से डिफेंस डेटा लीक करने का आरोप

यह कार्रवाई Indian Air Force के अधिकारियों की शिकायत के बाद की गई है. आरोपी अधिकारी को 30 मई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था. उस पर आरोप था कि उसे पाकिस्तान के एक संदिग्ध इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने 'हनी-ट्रैप' में फंसाया था

Advertisement
post-main-image
एयरफोर्स ऑफिसर को ISI ऑपरेटिव ने हनीट्रैप किया था (PHOTO- India Today, IAF)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • दिल्ली पुलिस ने इंडियन एयरफोर्स के एक विंग कमांडर को 30 मई, 2026 को पाकिस्तान के संदिग्ध इंटेलिजेंस एजेंट द्वारा हनीट्रैप में फंसाकर संवेदनशील रक्षा जानकारी साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
  • आधिकारिक शिकायत और गहन सर्विलांस के बाद विंग कमांडर की हिरासत में जांच की गई क्योंकि उनकी निजी समस्याओं का फायदा उठाकर उन्हें पाकिस्तानी एजेंसियों के नेटवर्क से जोड़ा जा रहा था।
  • अधिकारियों ने जांच शुरू कर सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है और मामला अब अदालत में है, जिससे साइबर-स्पाई गतिविधियों पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।

दिल्ली पुलिस ने इंडियन एयरफोर्स के एक विंग कमांडर को गिरफ्तार किया है. अधिकारी पर कथित हनीट्रैप में फंसकर डिफेंस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है. जांचकर्ताओं को शक है कि इस घटना का संबंध जासूसी के किसी बड़े नेटवर्क से हो सकता है. पुलिस के मुताबिक, अधिकारी को दो महीने पहले अरेस्ट किया गया था. उन पर 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट' के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में है और गिरफ्तारी के बाद से उसने जमानत की अर्जी नहीं दी है.

Advertisement
एयरफोर्स ने की थी शिकायत

यह कार्रवाई एयरफोर्स के अधिकारियों की शिकायत के बाद की गई है. आरोपी अधिकारी को 30 मई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था. उस पर आरोप था कि उसे पाकिस्तान के एक संदिग्ध इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने 'हनीट्रैप' में फंसाया था. शुरुआत में उससे पुलिस कस्टडी में पूछताछ की गई. बाद में अदालत ने उसे तिहाड़ जेल भेज दिया. सूत्रों ने लल्लनटॉप को बताया कि पहले ही अधिकारी पर नजर रखी जा रही थी. वह कड़ी निगरानी में था. सर्विलांस नेटवर्क के कदमों की वजह से वह पकड़ा गया क्योंकि IAF ऐसी गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है. 

दिल्ली पुलिस को शक है कि वह जासूसी के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. इसके जरिए कथित तौर पर सेना से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जा रही थी. एजेंसियां ​​अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इस कथित जानकारी लीक के पीछे कोई विदेशी हैंडलर काम कर रहा था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक महिला ने सोशल मीडिया के जरिए अधिकारी से संपर्क किया था. जांच करने वालों को शक है कि वह महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के इशारे पर काम कर रही थी.

Advertisement
अधिकारी परेशान थे, ISI ने फायदा उठाया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अधिकारी का महिला से कॉन्टैक्ट हुआ, तब वो अपनी निजी जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. बाद में ऑनलाइन चैट और वीडियो कॉल के जरिए यह बातचीत और बढ़ गई. आरोप है कि अधिकारी ने उस महिला के साथ सेंसिटिव डॉक्यूमेंट्स और रक्षा से जुड़ी जानकारियां डिजिटली शेयर कीं. जांच करने वालों का मानना ​​है कि इसमें सेना की अहम जानकारी शामिल हो सकती है.

जांच का एक और पहलू एक खास मोबाइल ऐप्लीकेशन पर आकर रुका है. अधिकारी ने कथित तौर पर उस ऐप्लीकेशन को इंस्टॉल किया था. आरोप है कि अधिकारी ने एक और सैनिक से फोन में वो ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा था. यह ऐप स्पाईवेयर या रिमोट-एक्सेस मालवेयर के तौर पर काम करने वाला हो सकता है. इन ऐप्स का इस्तेमाल डेटा निकालने, लोकेशन ट्रैक करने और बातचीत सुनने में किया जाता रहा है. इसीलिए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच जारी है.

(यह भी पढ़ें: AI हनी ट्रैप का खौफनाक खेल, सेना के जवानों को फंसाने में जुटे सुंदर चेहरों वाले ‘डिजिटल जासूस’)

Advertisement

जांचकर्ताओं ने 30 जुलाई, 2026 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. इस मामले पर जानकारी देते हुए एयरफोर्स के प्रवक्ता ने बताया,

वह पहले से कड़ी निगरानी में था. उसे संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया है. आगे की जांच जारी है.

अधिकारियों ने बताया कि मामला अब कोर्ट में है. साथ ही इस मामले ने साइबर-स्पाई और रक्षाकर्मियों को निशाना बनाने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.

वीडियो: नेताओं के हनीट्रैप करा रही पाकिस्तान आर्मी?

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स
Advertisement