“Violence, violence, violence... I don't like it. I avoid. But, violence likes me, I can't avoid.” वैसे तो Yash ने ये डायलॉग KGF 2 में दिया था. मगर Toxic का ट्रेलर देख लगता है कि वो बात इस मूवी पर ज्यादा फिट बैठती है. साढ़े चार मिनट के इस ट्रेलर में भयंकर खून-खराबा है. इतना कि लोग KGF की हिंसा को भूल जाएंगे. मगर इन सबके बीच क्राइम की दुनिया में रची-बसी एक ऐसी कहानी भी है, जहां सिर्फ दूसरे गैंगस्टर्स ही नहीं, बल्कि खुद यश भी यश के दुश्मन बने हुए हैं. कैसे? वो हम बताते हैं.
यश का ‘टॉक्सिक’ ट्रेलर इतना 'खूंखार' है, 'दुश्मनों' के साथ सेंसर बोर्ड से भी जंग छिड़ जाएगी
'टॉक्सिक' के टेक्निकल पक्ष की तारीफ़ की जा सकती है. मगर इसका कॉन्टेन्ट काफी विवाद खड़े कर सकता है.

ट्रेलर की शुरुआत यश के किरदार राया से होती है, जो अपने टीनएज बेटे पर भड़का हुआ है. वो भी इस कद्र कि वो बच्चे पर बंदूक तानने से भी नहीं कतराता. इस गुस्से की वजह क्या है, इस बारे में फिलहाल कुछ रिवील नहीं किया गया है. मगर वो वजह इतनी डरावनी जरूर है कि बाप-बेटे एक-दूसरे का खून पीने को उतारू हो जाते हैं. खैर, फिल्म में 1940 से 1970 के गोवा और वहां के क्राइम वर्ल्ड को दिखाया गया है. राया अंडरवर्ल्ड पर राज करना चाहता है. इसमें नयनतारा उनका खूब साथ निभाती है. देर-सवेर हम राया को क्राइम का किंगपिन बनते देखते हैं. इस तख्त तक पहुंचने के लिए वो कई गैंग्स का नामोनिशान मिटा देता है.
हालांकि कहानी का दूसरा पक्ष ये भी है कि टॉप पर पहुंचने के दौरान उसने कई दुश्मन बना लिए हैं. राइवल गैंग्स तो उसकी जान लेना ही चाहते हैं. साथ ही वो लड़कियां भी, जिन्हें उसने धोखा दिया है. मगर इन सबसे परे यश की असल लड़ाई खुद से है. जी हां, फिल्म में यश ने डबल रोल किया है. यानी वो राया के अलावा उसके बेटे टिकट के किरदार में भी नज़र आए हैं. ट्रेलर की शुरुआत में राया जिस बच्चे पर गुस्सा उतार रहा था, संभव है कि वो टिकट ही हो. हालांकि ट्रेलर में हम टिकट को एक सीन में किसी शख्स को 'नाजायज़' कहते सुनते हैं. इससे ये हिंट भी मिलता है कि यश फिल्म में ट्रिपल रोल में हो सकते हैं. पोस्टर में भी उन्हें तीन अलग-अलग लुक्स में दिखाया गया है. मगर अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है.
जिस बात की पुष्टि हुई है, वो ये कि 'टॉक्सिक' बाप और बेटे के महायुद्ध की कहानी है. वैसे तो भारतीय सिनेमा में हम बाप-बेटों की तल्खी पर कई फिल्में देख चुके हैं. मगर डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने इस मूवी को जो ट्रीटमेंट दी है, वो वाकई अलग है. ट्रेलर में 1940s के बाद के गोवा को दिखाया है. यश तो नहीं, मगर फिल्म की सभी एक्ट्रेस को उस हिसाब से लुक और गेटअप में ढाला गया है. यही नहीं, फिल्म में सर्कस भी एक कैरेक्टर की तरह जीवंत महसूस होता है.
'टॉक्सिक' की सिनेमैटोग्राफी अच्छी नज़र आ रही है. ट्रेलर में हर रंग खूब निखर रहा है. रियल लोकेशंस वाले सभी सीन्स सुंदर लगते हैं. फिल्म को देखकर वाकई महसूस होता है कि इस पर काफी पैसे खर्च हुए हैं. बैकग्राउंड म्यूजिक तो शुरुआत से ही फिल्म की हाइलाइट रहा है. लेकिन लास्ट के एक्शन सीन्स में VFX गड़बड़ा जाता है. कुछ यही हाल एक्टिंग का भी रहा है. KGF और 'रामायण' के बाद यश एक बार फिर लाउड कैरेक्टर में नज़र आए हैं. उनका किरदार हर समय ओवर द टॉप फिजिकल एक्सप्रेशन देता रहा. कियारा आडवाणी का स्क्रीन प्रेजेंस अच्छा है मगर डायलॉग्स बेहद फीके. फिल्म में हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया लोगों को सरप्राइज़ कर सकती हैं. रही बात रुक्मिणी वसंत की, तो इस ट्रेलर में केवल उन्होंने ही नॉर्मल टोन में बात की है. इसलिए फिल्म में उनके हिस्सा क्या आता है, ये देखना मजेदार रहेगा.
'टॉक्सिक' के ट्रेलर पर लोगों का मिक्स्ड रिएक्शन आना तय है. फिल्म के टेक्निकल पक्ष की तारीफ़ की जा सकती है. लेकिन इसके कॉन्टेन्ट पर भी सवाल जरूर उठाया जाएगा. कुछ उसी तरह, जैसा रणबीर कपूर की 'एनिमल' के दौरान उठाया गया था. हालांकि ट्रेलर देखकर लगता है कि मेकर्स खुद भी यही चाहते हैं. फिल्म का बज़ बनाने के लिए उन्होंने फिल्म और ट्रेलर में कुछ ऐसे सीन्स जोड़े हैं, जिनका कोई खास तुक नहीं. जैसे, एक सीन में राया कमरे के कोने में नंग-धड़ंग खड़ा है और रुक्मिणी उससे पूछती हैं- "मैंने सिविलाइज्ड मुलाकात की उम्मीद की थी." बदले में राया कहता है- "क्या मैं तुम्हें सिविलाइज्ड लगता हूं?"
(यह भी पढ़ें: यश की 'टॉक्सिक' सबको पछाड़ बनी देश की मोस्ट अवेटेड फिल्म)
फिल्म में इस बातचीत का कितना योगदान होगा, पता नहीं. मगर अभी इस पर विवाद जरूर होगा. विवाद होगा तो फिल्म की हाइप बढ़ेगी. हाइप बढ़ेगी तो कई लोग इसे देखने भी पहुंचेंगे. लेकिन हॉल पहुंचकर भी लोग इसे देख पाएंगे या नहीं, ये एक बड़ा सवाल है. वो इसलिए क्योंकि सेंसर बोर्ड आजकल अलग रैम्पेज पर है. उनके दफ़्तर में जिस हिसाब से फिल्मों पर कैंची चल रही, कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर आप 'टॉक्सिक' में 20-30 कट्स लगने की खबरें सुन लें. ओवरसीज़ मार्केट में इस मूवी को फिर भी हरी झंडी मिल जाएगी. मगर भारत में सेंसर बोर्ड इसके चिथड़े कर देगा.
वीडियो: बार-बार पोस्टपोन, फिर भी IMDb पर नंबर 1 बनी 'टॉक्सिक'









