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'लड़कों के लिए साउथ अफ्रीका से बहुएं लाऊंगी', पंचायत चुनाव में महिला कैंडिडेट का अजीब वादा

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के झाझड़ गांव में सरपंच पद की उम्मीदवार अनीता सैनी और आशा यादव ने कुंवारे लड़कों की शादी कराने का वादा किया है.

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झूंझनू में सरपंच प्रत्याशी के ऐलान वायरल हो रहे हैं. (फोटो- India today_

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  • राजस्थान के झाझड़ गांव में सरपंच चुनाव के दौरान दो प्रमुख उम्मीदवारों ने कुंवारे लड़कों की शादी कराने को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है।
  • गांव में लड़कों की शादी न होने की समस्या के कारण सामाजिक असमानता और परिवारिक तनाव उत्पन्न हो रहे हैं, जिसे सुधारने की मांग उठी है।
  • चुनाव जीतने पर उम्मीदवारों द्वारा लड़कों की शादी के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करने और विवाह खर्च की जिम्मेदारी लेने का प्रस्ताव रखा गया है।

चुनाव में विकास की बातें तो सब करते हैं. ‘विवाह’ की बात कौन करता है? अगर गांव में लड़कों की शादियां नहीं हो रहीं, ये क्या कम जरूरी मुद्दा है. रोटी, कपड़ा और मकान किसके लिए हो अगर एक अदद दुल्हन जीवन में न आ पाए. इसीलिए राजस्थान के झुंझुनूं जिले के झाझड़ गांव में सरपंच पद की दो दावेदारों ने ऐतिहासिक वादा कर दिया है. उन्होंने बता दिया कि पानी, बिजली और सड़क के मुद्दे पुराने हो गए. अब असली चुनावी दांव 'कुंवारे लड़कों के लिए रिश्ते' लाने पर खेला जाएगा. 

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कहानी झाझड़ गांव की है, जहां सरपंच के चुनाव हो रहे हैं. मैदान में दो उम्मीदवार हैं. अनीता सैनी और आशा देवी. चुनाव प्रचार में उन्होंने गांव की असली समस्या की नस पकड़ ली. शुरुआत की अनीता सैनी ने. उन्होंने वादा किया कि चुनाव जीतेंगी तो गांव के सारे कुंवारे लड़कों की शादी कराना उनकी जिम्मेदारी होगी. लेकिन अब दूसरी दावेदार आशा यादव ने मैदान में आकर ऐसा छक्का मारा है कि चुनावी पिच के सारे दिग्गज हैरान हैं. आशा यादव ने मामला इंटरनेशनल बना दिया है. उनके मैदान में आते ही वादों का लेवल छोटे से गांव से निकलकर सीधा अफ्रीका तक पहुंच गया है.

आशा यादव ने वादा किया कि अगर वो सरपंच बनती हैं तो गांव के कुंवारे लड़कों के लिए साउथ अफ्रीका से बहुएं लाएंगी. चुनाव जीतते ही इस योजना को पूरा करना उनकी निजी जिम्मेदारी होगी.

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वायरल वीडियो में आशा यादव कहती हैं कि गांव में कई ऐसे लड़के हैं, जिनकी शादी नहीं हो पा रही. कुछ परिवार बिहार और उत्तर प्रदेश से बहुएं लेकर आते हैं. इससे कई बार जैसे हालात बन जाते हैं. समाज में अनायास आ गई इस असमानता को जड़ से उखाड़ फेंकने लिए वो साउथ अफ्रीका से बहुएं लाने की कोशिश करेंगी. 

रुकिए सब्र करिए. वादा इतना भर ही नहीं है. आशा यादव ने ये भी कहा है कि इस योजना के तहत शादी का पूरा खर्च और बाकी सारी व्यवस्थाएं उनकी निजी जिम्मेदारी होंगी. यानी लड़के को बस शादी के लिए ‘हां’ कहना है. आशा यादव ने ये तक कहा कि गांव में किसी को ये शिकायत भी नहीं रहेगी कि अलाने के लिए सुंदर बहू आ गई और फलाने के लिए असुंदर. बराबरी ऐसी होगी कि साम्यवादी भी शर्मा जाएंगे. यानी लड़कों को बस ‘बहुमत’ का प्रबंध करना है. फिर बहू की जिम्मेदारी आशा यादव की.

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अब ये सरपंच प्रत्याशी की युवा लड़कों के प्रति सच्ची भावना है या चुनावी जुमला, ये तो चुनाव के नतीजों के बाद के हालात बताएंगे. क्योंकि अभी तक तो इस योजना को लागू करने का कोई खाका भावी सरपंच साहिबा ने सुझाया नहीं है. न तो साउथ अफ्रीका से वीजा-पासपोर्ट को लेकर किसी करार का पता है. न तो अफ्रीकी लड़कियों की राजस्थान के झाझड़ की बहू बनने की रजामंदी का कोई एफिडेविट ही सामने आया है. नेता जी की ओर से सिर्फ एक बात पक्की है. सरपंच बनाई. शहनाई बजाने की जिम्मेदारी मेरी.

अब ये खबर सुनते ही कई सिंगल लड़के एसआईआर में अपना नाम झांझड़ के वोटर लिस्ट में न डलवाने पहुंच जाएं.

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