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मृत पिता के शव को सैकड़ों गाड़ियों ने दो दिन तक रौंदा, बेटे के सामने खुरच-खुरचकर निकाला गया शरीर

झांसी के महाराजगंज गांव के 56 वर्षीय जगमोहन तिवारी 9 अक्टूबर को खेत पर जाने के बाद लापता हो गए थे. दो दिन बाद उनका शव झांसी-कानपुर हाईवे पर मिला, जहां से गुजरती गाड़ियों ने उसे बुरी तरह कुचल दिया था.

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56 साल के जगमोहन तिवारी की सड़क हादसे में मौत हो गई. (फोटो- India today)

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  • झांसी के पूंछ थाना इलाके में 9 अक्टूबर को खेत पर गए जगमोहन तिवारी का सड़क हादसे में निधन हो गया, और उनका शव दो दिनों तक हाईवे पर पड़ा रहा।
  • हादसे के दिन सड़क पर मरम्मत का काम चल रहा था, जिससे किसी ड्राइवर ने मृतक के शरीर को समय रहते नहीं देखा और शव कई गाड़ियों के नीचे आया।
  • पुलिस ने शव के टुकड़े कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है, और मामले की आगे की जांच और कार्रवाई जारी है।

आजकल की दुनिया में ‘धावक’ बने लोगों से संवेदना पीछे छूटती जा रही है. यह भागदौड़ ऐसी है कि अक्सर आसपास की चीजें सामने होते हुए भी नजरों से ओझल रहती हैं. अब वो ‘चीज’ किसी का शव ही क्यों न हो. एक सड़क हादसे में झांसी के रहने वाले जगमोहन तिवारी की जान चली गई. हाईवे पर शव पड़ा रहा. घंटे-दो घंटे नहीं. दो दिन तक. इस बीच उनके ऊपर से सैकड़ों गाड़ियां गुजरती रहीं. 

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रफ्तार के पहिए दो दिनों तक मृत जगमोहन को रौंदते रहे. शरीर की हालत ऐसी हो गई कि एक भी हड्डी सलामत नहीं रही. पूरा शरीर कुचलकर मांस का लोथड़ा बन गया था. सड़क से ऐसे चिपक गया था, जैसे किसी ने आदमकद पोस्टर चिपकाया हो. खुरच-खुरचकर निकालना पड़ा. दो दिन पहले घर से खेत पर निकले जगमोहन इस बार एक गठरी में घर लौटे.

झकझोर देने वाली ये दर्दनाक घटना झांसी जिले के पूंछ थाना इलाके की है. 56 साल के जगमोहन तिवारी इसी इलाके के महाराजगंज गांव के रहने वाले थे. दो बेटों और एक बेटी के पिता थे. बड़े बेटे सागर और बेटी प्राची की शादी हो गई है. छोटा बेटे आयुष की शादी अभी नहीं हुई है. खेती-किसानी करने वाले जगमोहन 9 अक्टूबर की सुबह लगभग 11 बजे अपने घर से झांसी-कानपुर हाईवे के किनारे अपने खेत पर गए थे. उनके बेटे आयुष ने बताया कि उस वक्त घर पर सिर्फ उनकी मां रागिनी थीं. 

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खेत पर गए थे जगमोहन

इंडिया टुडे से जुड़े प्रमोद गौतम की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना वाले दिन आयुष अपनी दादी सोमा को लेने के लिए गुजरात गए थे. बड़े भाई सागर भी मथुरा घूमने गए थे. खेत जाने का बोलकर सुबह जगमोहन घर से निकले थे. ऐसा कई बार होता था कि वो खेत जाते और रात में वहीं रुक जाते थे. उस दिन भी जगमोहन घर वापस नहीं आए. अगले दिन जब बेटा आयुष दादी को लेकर घर आया तो उसने पूछा कि पापा कहां हैं. मां ने बताया कि खेत गए थे लेकिन लौटे नहीं हैं. जगमोहन के पास फोन नहीं था इसलिए मां उनसे पूछ भी नहीं पाईं कि वो कब लौटेंगे.

थोड़ी चिंता हुई तो आयुष पिता को देखने के लिए खेत की ओर गए. जगमोहन वहां नहीं मिले. किसी ने बताया कि सड़क पर एक हादसा हुआ था. आयुष जब वहां पहुंचे तो उन्हें पिता की चप्पल दिखी. फिर उनका गमछा और कपड़े दिखे. इसके बाद उन्होंने जो देखा वो एकदम दिल दहलाने वाला था. 

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गठरी में जुटाए शरीर के टुकड़े

जगमोहन का शव सड़क से चिपका हुआ था. उनके शरीर का कोई हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा था. बाल के साथ मांस के लोथड़े ही बचे थे. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. उसने खरोच-खरोचकर जगमोहन का शव निकाला. शव के टुकड़े बन गए थे, जिसे छोटी गठरी में जुटाया गया. सोमवार, 12 अक्टूबर को उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया. 

पूंछ के थाना प्रभारी विद्या सागर ने बताया कि जगमोहन दो दिन से लापता थे. जहां ये घटना हुई, वहां सड़क मरम्मत का काम चल रहा था. इस वजह से किसी की नजर उनके शव पर नहीं पड़ी. शव के टुकड़ों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया है. आगे की कार्रवाई की जा रही है.

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