महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों को बड़ी जीत मिली है. राज्य सरकार ने उनकी मांगें मानते हुए एक हाईलेवल कमीशन का गठन किया है, जो पेपर लीक के मामलों की जांच करेगा. छात्रों की मांग के मुताबिक, कमीशन में महाराष्ट्र के चर्चित अधिकारी तुकाराम मुंढे को भी शामिल किया गया है. उन्हें आयोग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है.
अब पेपर लीक की 'गंदगी' साफ करेंगे तुकाराम मुंढे, महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दी
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ 11 दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं. जांच के लिए हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दिलीप भोसले की अध्यक्षता में हाईलेवल कमीशन बनाया गया है, जिसमें तुकाराम मुंढे भी शामिल होंगे.

कमीशन के अध्यक्ष हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दिलीप भोसले होंगे. जांच कमीशन को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी. इसके अलावा, MPSC के चेयरमैन विवेक भीमनवार को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है. भीमनवार ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसकी पुष्टि की है.
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने ये फैसला छात्रों के 11 दिनों तक चले प्रोटेस्ट के बाद लिया है. इस प्रोटेस्ट को शरद पवार वाली एनसीपी के नेता रोहित पवार का भी समर्थन मिला था. प्रदर्शन खत्म होने के बाद रोहित पवार ने कमेटी में मुंढे को शामिल किए जाने का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि कमेटी को ठीक से काम करने की आज़ादी मिलेगी. वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों की इस जीत को ‘सत्याग्रह’ से जोड़ा. उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखा,
MPSC के अध्यक्ष को आखिर जाना पड़ा. अब भ्रष्टाचार की पूरी जांच होगी. ये छात्रों की बड़ी जीत है. ये युवाओं की बड़ी जीत है. ये सत्याग्रह की बड़ी जीत है.

पुणे में SM Joshi ब्रिज पर छात्र पिछले 10 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. एमपीएससी में पेपर लीक की जांच के अलावा छात्रों की मांग थी कि कमीशन के चेयरमैन विवेक भीमनवार को पद से हटाया जाए. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले के नेतृत्व में राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात की और उन्हें बताया कि तुकाराम मुंढे जैसे अधिकारियों वाली जांच कमेटी बनाने समेत उनकी ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं.
प्रदर्शनकारियों को शिवेंद्र राजे भोसले ने बताया कि एमपीएससी से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई है. FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के अलावा, इस कमेटी में पूर्व जज दिलीप भोसले चेयरमैन होंगे. साथ ही IPS अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व IAS अधिकारी गणेश पाटिल और रिटायर्ड जज पीडी नाइक भी कमेटी में शामिल होंगे.
भोसले ने प्रदर्शनकारियों को यह भी बताया कि उनकी कई और मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा. इनमें आंदोलन के कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना, तीन साल में 70,000 पदों पर भर्ती, जनवरी में होने वाली ग्रुप C परीक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाना और MPSC के चेयरमैन और सेक्रेटरी की नियुक्ति से पहले उनके बैकग्राउंड की जांच करना शामिल है.
ये भी पढ़ेंः 'ये सरकार जाएगी', शशि थरूर का दावा, मोदी सरकार को वही कविता याद दिलाई
हालांकि, छात्र भीमनवार के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे. छात्रों को सरकार मनाती रही लेकिन वो नहीं माने. इस बीच एनसीपी विधायक रोहित पवार ने बीच का रास्ता निकाला और सुझाव दिया कि अगर विवेक भीमनवार के इस्तीफे में समय लग रहा है तो सरकार उन्हें जांच पूरी होने तक अनिवार्य छुट्टी पर भेज दे. रोहित के इस प्रस्ताव से विरोध स्थल पर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई. प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों के बीच मतभेद उभर आए. कुछ लोग प्रस्ताव से सहमत थे. वहीं कई लोगों ने भीमनवार को पद से हटाए बिना आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया.
सरकार के आश्वासन के बाद MPSC उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों में से एक विवेकानंद पाटिल ने कहा कि उन्होंने फिलहाल आंदोलन खत्म कर दिया है.
वीडियो: ‘अब Supreme Court पर भी भरोसा नहीं’, कपिल सिब्बल ने ऐसा क्यों कहा?











