The Lallantop

'बाहरी' एंट्री बैन वाला रूल राजस्थान के 611 स्कूलों में तो नहीं चलेगा, वजह- बिल्डिंग ही नहीं है

Rajasthan में 611 सरकारी स्कूल बिना इमारत के चल रहे हैं. कई स्कूलों में पानी और शौचालय की कमी है. एक दिन पहले ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया था कि राजस्थान में बच्चों को भैंसों के तबेले में पढ़ाया जा रहा है.

Advertisement
post-main-image
झालावाड़ स्कूल हादसे में 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • राजस्थान सरकार ने विधानसभा में बताया कि प्रदेश के 611 सरकारी स्कूलों के पास बिल्डिंग नहीं है, जिससे हाल ही में जारी आदेश जिसमें बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगाई गई थी, उन स्कूलों में लागू नहीं हो सकेगा।
  • राज्य में कई सरकारी स्कूलों में बिल्डिंग, शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिसका कारण शिक्षा व्यवस्था में पूर्व से चली आ रही अनदेखी और सरकारों के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप हैं।
  • सरकार ने स्कूलों की मरम्मत और नई बिल्डिंग बनाने के लिए कुल 1,000 करोड़ रूपये आवंटित किए हैं और अगले पांच वर्षों में 12,500 करोड़ रूपये के बजट के तहत स्कूलों की स्थिति सुधारने की प्रक्रिया शुरू की है।

राजस्थान सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया था कि सरकारी स्कूलों में ‘बाहरी’ लोगों की एंट्री नहीं होगी. लेकिन प्रदेश के 611 स्कूलों में तो ये नियम लागू ही नहीं हो सकता क्योंकि उनके पास बिल्डिंग ही नहीं है. राजस्थान की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी है कि प्रदेश में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बिल्डिंग ही नहीं है. इतना ही नहीं, हजारों स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. सरकार ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया.  सरकार का ये जवाब ऐसे समय में आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि राजस्थान में ‘बच्चों को भैंसों के तबेले में पढ़ाया जा रहा है’. 

Advertisement

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) टीकाराम जूली के एक सवाल के जवाब में यह जानकारी सरकार ने दी. राज्य सरकार ने 'समग्र शिक्षा अभियान' के तहत 2025-26 के 'यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन' (UDISE) डेटा के आधार पर बताया कि राज्य में 611 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारतें नहीं हैं. इनमें लड़कियों के 10 स्कूल भी शामिल हैं.

क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों से पता चला कि राजधानी जयपुर में अकेले 38 स्कूल बिना इमारत के हैं. वहीं, सबसे खराब हालत झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक (23 स्कूल), खानपुर (16 स्कूल) और झालरापाटन (11 स्कूल) की है. राज्य के जिन 64,484 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारतें हैं, उनमें से भी 2,047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, 1,049 स्कूलों में पीने के पानी (ड्रिंकिंग वाटर) की कोई व्यवस्था नहीं है.

Advertisement
'तबेले में चल रही कक्षाएं'

सीजेपी ने 15 अगस्त से पूरे देश में 'स्कूल ठीक करो' कैंपेन की शुरुआत की थी. इस कैंपेन के तहत सीजेपी के कार्यकर्ता राजस्थान के अलग-अलग सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर रहे थे. इसके बाद राजस्थान सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर बाहरी लोगों के स्कूलों में एंट्री, फोटोग्राफी और वीडियो बनाने पर बैन लगा दिया. विपक्ष और सीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए ऐसा कर रही है.

शुक्रवार, 21 अगस्त को सीजेपी की एक टीम जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में एक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची. यह स्कूल कथित तौर पर भैंसों के तबेले में चल रहा था. आरोप है कि वहां ग्रामीणों ने सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया और उनकी गाड़ियां तोड़ दी गईं. सीजेपी (CJP) और गांव वालों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिवदासपुरा पुलिस स्टेशन में काउंटर एफआईआर (क्रॉस FIR) दर्ज कराई है. मामला बढ़ता देख विपक्ष ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया. इसी के लिखित जवाब में राजस्थान सरकार को आधिकारिक तौर पर मानना पड़ा कि राज्य में 611 स्कूल बिना अपनी इमारत के चल रहे हैं.

सरकार ने फंड का किया ऐलान

राजस्थान सरकार ने कहा कि उसने स्कूलों की मरम्मत और रेनोवेशन के लिए 550 करोड़ दिए हैं. वहीं, बिना बिल्डिंग वाले या खराब हालत वाले स्कूलों के लिए बिल्डिंग बनाने के लिए 450 करोड़ दिए गए हैं. यह भी कहा गया कि स्कूल बिल्डिंग्स के कंस्ट्रक्शन, रिपेयर और मेंटेनेंस के लिए हर साल 2,500 करोड़ यानी पांच साल में 12,500 करोड़ मिलेंगे.

Advertisement
BJP और कांग्रेस आमने-सामने

झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद हुए ऑडिट का जिक्र करते हुए बीजेपी ने कहा कि रिपोर्ट ने सरकारी स्कूलों की खराब हालत की पोल खोल दी. पार्टी ने इसे पिछली अशोक गहलोत सरकार का ‘गुनाह’ बताया. विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने उसी ऑडिट का हवाला देते कहा कि इस इंफ्रास्ट्रक्चर संकट से निपटने के लिए सरकार नाकाम रही है. उन्होंने कहा कि 3,768 सरकारी स्कूलों को पूरी तरह से जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया था. वहीं, 83,783 स्कूल के कमरे भी इस्तेमाल के लिए असुरक्षित थे. टीकाराम ने यह भी कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूलों की हालत को लेकर सरकार को फटकार लगाई थी.

ये भी पढ़ें: आशुतोष रांका को पीटा, मारे पत्थर... जयपुर में स्कूल के निरीक्षण को पहुंचे CJP वालों को खदेड़ा

झालावाड़ स्कूल हादसा

राजस्थान के झालावाड़ जिले के एक सरकारी स्कूल में बीते साल 25 जुलाई को एक दर्दनाक हादसा हुआ था. सुबह प्रार्थना के समय स्कूल की जर्जर इमारत की छत अचानक भरभरा कर ढह गई. इस हादसे में 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी और 28 से ज्यादा छात्र गंभीर रूप से घायल हुए थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह स्कूल पिछले 4 सालों से बेहद खस्ताहाल हालत में था. लेकिन शिकायत के बावजूद प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली थी. इस घटना पर राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से जवाब मांगा था. इसके बाद विभागीय लापरवाही के चलते 6 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था.

वीडियो: Jaipur में CJP के School Inspection पर हंगामा, Ashutosh Ranka ने लगाया मारपीट का आरोप

Advertisement