उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों कुछ सरकारी स्कूलों के वीडियो वायरल हुए थे. वीडियो मिड डे मील की घटिया क्वालिटी दिखाने वाले थे. राज्य के कई जिलों ने इस पर एक्शन लिया है. लेकिन घटिया क्वालिटी पर नहीं. फोटो वीडियो बनाने पर. और फर्रुखाबाद, आगरा, बलिया, बस्ती, अंबेडकरनगर और अयोध्या जिले में ऐसे आदेश जारी किए गए हैं.
यूपी के स्कूलों में बिना इजाजत नहीं घुस पाएंगे यूट्यूबर्स, मिड डे मील के वीडियो के बाद आया आदेश
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों में बिना इजाजत पत्रकारों और यूट्यूबर्स की एंट्री पर बैन लगा दिया है. यही नहीं कई जिलों में स्कूल कैंपस के अंदर जाकर फोटो वीडियो बनाने पर बैन लगा दिया गया है. बताया गया है कि इसकी वजह से स्कूल की इमेज खराब होती है और बच्चों की पढ़ाई में बाधा आती है.

बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने लगाया बैन
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) ने जिलों के सरकारी प्राथमिक और उच्च प्रथामिक स्कूलों में यूट्यूबर्स समेत बाहरी लोगों की बिना इजाजत एंट्री पर रोक लगा दी है. इनका कहना है कि यूट्यूबर्स के स्कूल कैंपस में वीडियो बनाने की इजाजत न दी जाए, इससे सरकारी स्कूलों की इमेज खराब होगी.
ये सिलसिला सबसे पहले फर्रुखाबाद के प्राथमिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने शुरू किया. उन्होंने 17 अप्रैल को स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी. एक सर्कुलर जारी करके उन्होंने खुद को पत्रकार बताने वाले कुछ लोगों पर बिना इजाजत स्कूल में घुसने, क्लास में बच्चों की तस्वीर खींचने, रिकॉर्ड की जांच करने की कोशिश करने और शिक्षा विभाग की इमेज खराब करने के लिए जानकारी मांगने का आरोप लगाया. विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कहा,
अगर कोई व्यक्ति या ग्रुप खुद को पत्रकार बताकर किसी स्कूल में एंट्री लेता है, तो उससे सबसे पहले जिला सूचना अधिकारी द्वारा जारी आईडेंटिटी कार्ड दिखाने के लिए कहा जाना चाहिए. अगर वे कार्ड दिखाते हैं तो उनकी मांगी गई जानकारी दी जाए. लेकिन किसी भी डॉक्यूमेंट की फोटो लेने या रिकॉर्ड चेक करने की इजाजत नहीं दी जाए, साथ ही उनको किसी तरह की डिपार्टमेंटल जानकारी नहीं दी जाए.
इसके बाद शुरू हुआ सिलसिला
इसके बाद से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इसी तरह के आदेश जारी किए हैं. 30 जुलाई को आगरा के प्राथमिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने कहा कि यूट्यूबर्स बिना इजाजत के स्कूल में घुस आते हैं, फोटो, वीडियो बनाते हैं, जिससे शिक्षा विभाग की इमेज खराब होती है. उन्होंने कहा,
सरकार और प्रशासन ने सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के लिए अधिकारी नियुक्त किए हैं, वे समय समय पर स्कूलों का निरीक्षण करते हैं, और स्कूल सिस्टम में सुधार के लिए एक्शन लेते हैं.
इसके बाद आजमगढ़, बलिया, बस्ती, अंबेडकरनगर और अयोध्या में भी इसी तरह के आदेश जारी किए गए हैं. अयोध्या के सरकारी स्कूलों ने प्राथमिक शिक्षा अधिकारी से इजाजत के बिना बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फलुएंसर्स की कैंपस में एंट्री बैन कर दी है. इजाजत के बिना स्कूल कैंपस के अंदर फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी बैन लगा दिया गया है.
बीजेपी और सपा आमने सामने
बेसिक शिक्षा अधिकारियों के आदेशों पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हाफिज गांधी ने इसे चिंता का विषय बताया. उन्होंने कहा,
प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के हिसाब से पत्रकारों, यूट्यूबरों और दूसरे लोगों की सरकारी स्कूलों में एंट्री पर बैन लगाने वाला आदेश चिंताजनक है. सरकार का जोर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने पर होना चाहिए, न कि मीडिया को रिपोर्टिंग से रोकने पर.
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दूसरी तरफ बीजेपी की ओर से इस फैसले का बचाव किया गया है. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बताया कि स्कूल समेत सरकारी संस्थानों के अपने नियम होते हैं, स्कूल कैंपस में एंट्री के लिए इजाजत तो लेनी ही होगी. उन्होंने दावा किया कि किसी को रिपोर्टिंग से नहीं रोका गया है, लेकिन कोई भी रिपोर्टिंग के बहाने स्कूल में नहीं घुस सकता.
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