बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चवन्नी वाले बयान पर ‘आपत्ति’ जताई है. उन्होंने इस बयान पर ‘गुस्सा’ जताते हुए इसे ‘जाट समाज का अपमान’ बताया. हफ्ते भर पहले अखिलेश यादव ने ‘चवन्नी’ शब्द का इस्तेमाल कर एक बयान दिया था. माना जा रहा है सपा प्रमुख का निशाना राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी थे. इस पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने शनिवार, 22 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया.
'सपा गिरगिट, स्वार्थी, जातिवादी', जयंत को 'चवन्नी' कहा तो मायावती ने अखिलेश को जी भर सुनाया
BSP प्रमुख Mayawati ने SP के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav के चवन्नी वाले बयान पर ‘नाराजगी’ जाहिर की है. बसपा सुप्रीमो ने अखिलेश के इस बयान को जाट समाज का 'अपमान' बताया है.

मायावती ने लिखा,
ये बयान अमर्यादित और शर्मनाक है. अखिलेश को सिर्फ पार्टी नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए. सपा की राजनीति अक्सर संकीर्णता और जातिवाद से जुड़ी रही है. इससे सपा के साथियों में भी भरोसा कम हुआ और इसका फायदा कई बार भाजपा को मिला.
मायावती ने आगे कहा कि सपा के अहंकारी रवैये की वजह से 1993 में बना सपा-बसपा गठबंधन टूट गया था, जिसके बाद 2 जून 1995 को लखनऊ गेस्ट हाउस कांड हुआ. बाद में अखिलेश यादव के आश्वासन पर फिर सपा-बसपा गठबंधन हुआ लेकिन चुनाव नतीजे मनमाफिक न आने पर कुछ समय बाद ये गठबंधन भी टूट गया. उन्होंने कहा कि बीएसपी बाबासाहेब अंबेडकर के सिद्धांतों और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति से समझौता नहीं कर सकती.

मायावती ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वो ‘सपा की जातिवादी राजनीति से दूर रहें’. उन्होंने लिखा, ‘सपा गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है. अपना काम निकलते ही ये पार्टी गिरगिट की तरह रंग बदल लेती है और दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का खूब इस्तेमाल करती है. सपा की संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहें.’ आगे उन्होंने कहा कि ये बात जगजाहिर है कि अखिलेश अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग तो कभी पंडितों का हितकारी बता देते हैं. सच्चाई ये है कि वे अपनी जाति के अलावा दूसरे पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और खासकर ब्राह्मण समाज के हितैषी नहीं रहे हैं.
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मायावती ने आरोप लगाया कि सपा की सरकार में दूसरी जातियों खासकर ब्राह्मण समाज का खूब शोषण हुआ है. इनकी सरकार में केवल गुंडों, बदमाशों और माफियाओं का ही भला हुआ है. यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता में कतई न आने दें. मायावती के अलावा उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश के बयान को चौधरी चरण सिंह का अपमान बताया. केशव प्रसाद ने भी एक्स पर लिखा,
नेताजी की कमाई, सपा बहादुर ने गंवाई. ये सोलह आने सच है. इस छटपटाहट ने अखिलेश यादव का मनोबल ऐसा तोड़ा है कि अपनी ज़ुबान से अगड़ा, पिछड़ा और दलितों में किसी पर भी अपनी लाठी चला देते हैं. जयंत चौधरी पर घटिया बयान देकर अपनी उसी छटपटाहट को उजागर कर दिया. भारत रत्न चौधरी चरण सिंह का सैफई परिवार पर इतना कर्ज है कि सपा बहादुर उसे चुका नहीं सकते. सपा बहादुर को जयंत चौधरी से तुरंत माफी मांगनी चाहिए.

21 अगस्त को खुद जयंत चौधरी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी थी. जयंत ने लिखा था,
सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते. जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई? मैं इस अहंकार को करीब से देख चुका हूं. और मानता हूं ऐसा आचरण सिर्फ पतन लाता है.

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और RLD साथ थीं. इस दौरान एनडीए में जाने के सवाल पर एक बार जयंत चौधरी ने कहा था कि वो ‘चवन्नी’ नहीं हैं जो पलट जाएंगे. हालांकि, बाद में उनकी पार्टी एनडीए के साथ चली गई. यही वजह है कि अखिलेश जयंत को लेकर ‘चवन्नी’ वाला तंज कसते हैं.
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