स्विट्ज़रलैंड को दुनिया भर में इस ‘चीज़’ के लिए जाना जाता है. अब यह भी बता दें कि यह कोई सामान वाला नहीं, बल्कि खाने वाला चीज़ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब कुछ ऐसा किया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान ‘भारतीय चीज़’ की ओर खींचा है. 5 अक्टूबर को स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति गाई पार्मेलिन भारतीय दौरे पर थे. इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें तीन तरह की भारतीय अवॉर्ड विनिंग चीज़ भेंट की - गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर. आखिर इनमें ऐसा क्या खास है? बताते हैं.
स्विट्जरलैंड के प्रेसिडेंट को PM Modi ने ऐसी कौन सी चीज़ दी, जिसकी हो रही चर्चा? आप भी जान लें
स्विट्जरलैंड दुनिया भर में चीज़ की वजह से फेमस है. इस खूबसूरत देश में 450 से ज्यादा वैरायटी की चीज़ मिलती हैं. स्विस प्रेसिडेंट के हालिया भारत दौरे पर पीएम मोदी की ओर से उन्हें 3 होममेड चीज़ ही भेंट की गई. जानिए इसकी खासियत.

गौर करने वाली बात ये है कि जिस देश में खुद 450 से ज़्यादा तरह की चीज़ मिलती है, उस देश को भारत ने तीन होममेड चीज़ दिया है. ये तीनों चीज़ मौसम नारंग एलेफ़थेरिया क्रीमरी से आते हैं. मौसम नारंग मुंबई में आर्टिसन (कारीगर) चीज़ बनाने वाली कंपनी चलाती हैं.
तीनों ‘चीज़’ की खासियतगुलमर्ग: फ्रांसीसी शैली का ब्री चीज़ है. यह दिल के आकार का नरम और क्रीमी चीज है, जिसे पाश्चुरीकृत गाय के दूध से तैयार किया जाता है. इसके ऊपर सफेद रंग की परत होती है और इसमें मिट्टी और मशरूम जैसी खुशबू आती है. इसका स्वाद भी बेहतरीन होता है. गुलमर्ग चीज ने 2026 में ब्राजील में आयोजित प्रतियोगिता में सुपर गोल्ड पुरस्कार जीता है.
कोणार्क: फ्रांसीसी टोम शैली का चीज है. इसकी बाहरी परत प्राकृतिक और कुछ खुरदरी होती है. इसका स्वाद नरम, हल्का नमकीन और खुशबू मिट्टी जैसा होता है. इसमें नींबू जैसा स्वाद भी महसूस होता है. कोणार्क ने 2023 में नॉर्वे में आयोजित वर्ल्ड चीज अवॉर्ड्स में गोल्ड और 2025 में स्विट्जरलैंड में सिल्वर पुरस्कार जीता था.
वहीं, येऊर पहाड़ी शैली का चीज़ है, जिसे स्विस ग्रुइयर से प्रेरणा लेकर बनाया गया है. इसे करीब आठ से नौ महीने तक पकाया जाता है. इससे इसमें मेवे, मीठा और जड़ी-बूटियों जैसा स्वाद आता है. इसकी बाहरी परत पर गुलाब की पंखुड़ियां और सौंफ लगाई जाती है, जिससे इसकी भारतीय पहचान निखरकर सामने आती है.
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मौसम नारंग मुलुंड की रहने वाली हैं. उन्होंने फ्रांस और जर्मनी में आठ साल तक ह्यूमन रिसोर्स में काम किया. वहां उन्हें चीज़ कल्चर के बारे में पता चला. जब वह मुंबई लौटीं, तो उन्होंने 2015 में एक असिस्टेंट के साथ किराए की एक छोटी सी जगह से 'एलेफ्थेरिया' (जिसका ग्रीक भाषा में मतलब 'आज़ादी' होता है) शुरू किया. आज उनके पास 65 लोगों की टीम है और वह ताज और ओबेरॉय जैसे होटलों को अपना प्रोडक्ट बेचती हैं.
स्विस लोग भारत में कलिम्पोंग चीज़ लाए थे. 1990 में ये चीज़ बनाने वाले डेरी के ओनर का वीज़ा लैप्स कर गया था, जिसके बाद डेरी बंद हो गई थी. मगर कालिम्पोंग चीज़ हमारे लिए छोड़ गए. इस नज़र से, पीएम मोदी के गिफ्ट को एक रिटर्न गिफ्ट के तौर पर भी देखा जा सकता है.
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