उत्तर प्रदेश के चीफ इलेक्टोरल अफसर (CEO) नवदीप रिणवा ने ‘राम ने सिर्फ यादव को नहीं, शर्मा को भी मारा’ वाले बयान पर माफ़ी मांग ली है. उन्होंने X हैंडल से पोस्ट कर लिखा कि CEO की तरफ से जिस तरह की भाषा और लहजे का इस्तेमाल होना चाहिए था, वो नहीं हुआ. 26 अक्टूबर को इलेक्टोरल अफसर ने X पर लिखा था कि ‘भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा’. अब इसी पोस्ट पर उन्होंने माफ़ी मांगी है.
‘राम ने यादव को ही नहीं, शर्मा को भी मारा’, चुनाव अधिकारी ने अपने पोस्ट पर माफी मांगी
उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने अपनी जातिवादी टिप्पणी 'राम ने सिर्फ यादव को नहीं, शर्मा को भी मारा’ पर माफी मांग ली है. ये पूरा विवाद उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की वोटर लिस्ट से जुड़ा है. जानिए पूरा मामला.

नवदीप रिणवा ने 27 अक्टूबर को अपने माफीनामे में लिखा,
‘इस हैंडल से किए गए पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा के स्तर और भाव और इनकी तीखी प्रकृति इस आधिकारिक हैंडल से अपेक्षित नहीं है. पोस्ट में टिप्पणियों से हुए वास्तविक आक्रोश को अच्छी तरह से नोट किया गया है. हम इससे नाराज़ लोगों से ईमानदारी से माफी मांगते हैं. अब से हमारा संचार शालीन और औपचारिक होगा.’
माफ़ी मांगते हुए उत्तर प्रदेश CEO ने ये वादा भी किया कि अब से उनका पोस्ट शालीन होगा. ये सब कुछ तब हो रहा है जब SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लग रहे हैं. इसके खिलाफ देश भर में प्रोटेस्ट भी हो रहे हैं. 2027 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं. ऐसे में ये गड़बड़ी चुनाव आयोग पर और गंभीर सवाल खड़े कर देती है.
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मामला शुरू कैसे हुआ?नामों को लेकर ये गड़बड़ी एक सॉफ्टवेयर की वजह से हुई. चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने नामों के ‘ट्रांस्लिट्रेशन’ की जगह ‘ट्रांसलेशन’ कर दिया. इसी वजह से ‘राम ने यादव को मारा’, ‘राम ने शर्मा को मारा’ और ‘मूर्ख काली देवी’ जैसे अजीबोगरीब नाम देखने को मिले.
जब ये गड़बड़ी सामने आई तब AAP सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर जातिवादी होने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, ‘राम ने यादव को ही क्यों मारा? राम ने किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय, बिष्ट को क्यों नही मारा?’ इसी पोस्ट का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश CEO ने ‘राम ने शर्मा को मारा’ वाला उदाहरण दे दिया. लेकिन एक जातिवादी आरोप का जवाब उन्होंने खुद एक जातिवादी टिप्पणी के ज़रिए ही दिया. इसी बात पर लोगों का गुस्सा फूटा जिसके बाद ये माफीनामा आया है.
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ये पूरा केस इसी चुनाव की वोटर लिस्ट का है. चुनाव में दर्ज कुल 14.81 लाख मतदाताओं की सूची में ऐसी 158 गड़बड़ियां सामने आई हैं.
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