उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी अब देश के शिक्षा मंत्री का भी काम देखेंगे. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी गई है. अतिरिक्त प्रभार के तौर पर मिली जिम्मेदारी के बाद जोशी ने कहा कि वह कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ इसे स्वीकार करते हैं. पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वह अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे. प्रह्लाद जोशी को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर होने के कुछ घंटों बाद ही ये जिम्मेदारी दे दी गई.
प्रह्लाद जोशी कौन हैं? शिक्षा मंत्री बनाने के लिए जिन्हें कर्नाटक से 'तुरंत' बुलाया गया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. 64 वर्षीय जोशी 2004 से धारवाड़ से लोकसभा सांसद हैं और मोदी सरकार में पहले भी कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं.

शनिवार, 25 जुलाई को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है.
प्रह्लाद जोशी कौन हैं?अब बात प्रह्लाद जोशी की कर लेते हैं. जब ये सब हो रहा था, तब प्रह्लाद जोशी कर्नाटक में अपने संसदीय क्षेत्र में एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे. रविवार 26 जुलाई को उन्हें वापस दिल्ली लौटना था लेकिन इससे पहले ही उन्हें नई दिल्ली से फोन आ गया. इसके बाद हुबली हवाई अड्डे से फ्लाइट पकड़कर शनिवार की शाम साढ़े 7 बजे वो दिल्ली आ गए. प्रह्लाद जोशी को बताया गया कि धर्मेंद्र प्रधान की जगह अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी देखना है.
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64 साल के जोशी साल 2004 से कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने जा रहे हैं. 2019 से वह मोदी सरकार में मंत्री हैं. पहले उन्होंने 2019 से 2024 के बीच कोयला, खान और संसदीय मामलों के मंत्री के रूप में काम किया. 2024 के बाद से वह मोदी कैबिनेट में खाद्य मंत्री और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं. अतिरिक्त प्रभार के तौर पर अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय भी मिल गया है.
प्रह्लाद जोशी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ से की. साल 1995 से लेकर 1998 तक वह बीजेपी के जिलाध्यक्ष रहे. 1998 में उन्हें धारवाड़ जिले में ही बीजेपी का महासचिव बनाया गया. 2003 तक वो इसी पद पर रहे. 2004 में पहली बार उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत भी गए. तब से वह लगातार इस क्षेत्र से सांसद हैं. वह मोदी मंत्रिमंडल में संसदीय कार्यमंत्री, कोयला और खान मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं.
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