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स्पीड देखकर लगा मरीज ले जा रही, गुजरात की एंबुलेंस में शराब की हजारों बोतलें मिलीं

गुजरात के अमरेली में पुलिस ने एक Ambulance से 1,968 शराब की बोतलें बरामद कीं, जिनकी कीमत करीब 3.56 लाख रुपये बताई गई है. पुलिस के मुताबिक, शराब को Ambulance के मेडिकल कैबिनेट में छिपाकर ले जाया जा रहा था। ड्राइवर को गिरफ्तार कर गाड़ी जब्त कर ली गई.

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एंबुलेंस में मिली शराब की हजारों बोतलें. (सांकेतिक फोटो- India today)

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  • अमरेली पुलिस ने एक तेज रफ्तार एंबुलेंस को रोककर उसमें मेडिकल कैबिनेट की जांच की, जहां करीब 1968 विदेशी शराब की बोतलें बरामद कीं और ड्राइवर को गिरफ्तार किया।
  • गुजरात में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है, इसलिए पुलिस को सूचना मिली थी कि मध्य प्रदेश व गुजरात के बीच अवैध शराब तस्करी हो रही है, जिसके बाद हाईवे पर कड़ी जांच शुरू हुई।
  • शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एंबुलेंस जब्त की और आरोपी के खिलाफ गुजरात निषेध अधिनियम, 1949 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की।

सड़क पर भाग रही एंबुलेंस देखकर कोई क्या सोचेगा? इसमें मरीज होगा. तुरंत इलाज की उसे जरूरत होगी. सड़क पर चलने वाली बाकी के ड्राइवर भी उसे तुरंत रास्ता दे देते हैं. किसी की जान से बढ़कर क्या है? गुजरात के अमरेली में भी एक एंबुलेंस इसी तरह से तेज रफ्तार में भाग रही थी. सबको यही लगा कि इसमें मरीज है. हो सकता है ज्यादा सीरियस हो लेकिन पता है एंबुलेंस में क्या था? मरीज की जगह गाड़ी के अंदर एक हजार से ज्यादा शराब की बोतलें भरी थीं. इंडियन मेड फॉरेन लिकर यानी IMFL. विदेशी शराब बाजारों में भारत में बनने वाले अंग्रेजी शराब को यही कहा जाता है. 

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ये पूरा मामला क्या है? ड्राइ स्टेट गुजरात में शराब की तस्करी कर रही एंबुलेंस की पोल कैसे खुली? सब विस्तार से बताते हैं.

दरअसल, अमरेली पुलिस को सूचना मिली थी कि एक गाड़ी से मध्य प्रदेश और गुजरात के राजकोट के बीच अवैध शराब की तस्करी की जा रही है. इसके बाद पुलिस ने हाइवे पर सारी गाड़ियों की जांच शुरू कर दी. इसी वक्त पुलिस को एक एंबुलेंस आती दिखी. गाड़ी रोकी गई. ड्राइवर से गाड़ी का पिछला हिस्सा खोलने के लिए कहा गया. पुलिस ने ठीक से जांच की और एंबुलेंस में सब ठीक लगा. फिर अचानक पुलिस अधिकारियों ने एंबुलेंस का मेडिकल कैबिनेट चेक करने का फैसला किया. इसमें जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट्स रखे होते हैं.

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पुलिस ने पेचकस की मदद से कैबिनेट का ऊपरी हिस्सा खोल दिया. इसके बाद उन्हें जो सीन दिखा, उसने पुलिस वालों को भौचक्का कर दिया. जिसकी तलाश वो कर रहे थे, वो तो यहां छिपाकर रखा गया था. कैबिनेट की खाली जगह शराब की बोतलों से भरी थी. बोतलें गिनी गईं तो पता चला कि उनकी संख्या 1 हजार 968 है. 

साढ़े तीन लाख की शराब बरामद

एंबुलेंस से पुलिस ने 180 मिलीलीटर क्षमता वाली ‘मैकडॉवेल्स नंबर-1 ओरिजिनल रिजर्व व्हिस्की’ की 672 बोतलें बरामद कीं. इनकी कीमत करीब 1.35 लाख रुपये होती है. इसके अलावा ब्लेंडर्स प्राइड रिजर्व व्हिस्की की 180 मिलीलीटर क्षमता वाली 1 हजार 296 बोतलें एंबुलेंस में मिलीं. ये तकरीबन 2.21 लाख रुपये का माल था.

पुलिस ने एंबुलेंस भी जब्त कर ली और ड्राइवर को भी गिरफ्तार कर लिया. उसकी पहचान 34 साल के सागर उर्फ लालो कमलेश गोहेल के तौर पर हुई है. वह गोंडल का रहने वाला है. बाबरा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर आरआर परमार ने इंडियन एक्सप्रेस को  बताया कि गोहेल ही एंबुलेंस का मालिक भी था. यह एंबुलेंस ने किसी दूसरे व्यक्ति से सेकेंड हैंड खरीदी थी. 

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चूंकि गुजरात देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां शराब पर पूरी तरह से बैन है. इसलिए गोहेल के खिलाफ शराबबंदी की धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

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क्या है कानून?

गुजरात निषेध अधिनियम, 1949 के तहत राज्य के भीतर शराब और संबंधित मादक पदार्थों के बनाने, बेचने, खरीदने और पीने पर प्रतिबंध है. ऐक्ट की धारा 65 के तहत, कोई भी व्यक्ति जो किसी नशीले पदार्थ का आयात या निर्यात करता है, शराब की बोतलें भरता है, या किसी नशीले पदार्थ पर कब्ज़ा रखता है, ट्रांसपोर्ट करता है. बेचता है या खरीदता है. तो उसे 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा.

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