ब्रिक्स समिट के दूसरे दिन और आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'सबको साथ लेकर चलने' यानी 'इंक्लूसिविटी' की अहमियत पर जोर दिया. रविवार 13 सितंबर को स्वागत संबोधन में पीएम मोदी ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के 'वेपनाइजेशन' के खतरे के बारे में चेतावनी दी. तकनीक और जरूरी खनिज को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें देशों की तरक्की में रुकावट डाल सकती हैं. उनका बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि ये चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में दिया गया. इन बातों को बीजिंग के लिए एक मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन का दबदबा है.
'क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार बनाना गलत,' ब्रिक्स में जिनपिंग के सामने पीएम मोदी की 10 बड़ी बातें
BRICS Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के 'वेपनाइजेशन' को गलत बताया. उन्होंने कहा कि तकनीक और जरूरी खनिजों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना देशों की ग्रोथ में रोड़ा बन सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की उपलब्धियों के बारे में बताया. उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और रिप्रेजेंटेटिव्स के सामने ब्रिक्स को लेकर कई बड़े ऐलान भी किए. इनमें अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग प्रोग्राम और फ्रेमवर्क का जिक्र है.
पीएम मोदी ने समिट के दूसरे दिन वेलकम स्पीच देने की शुरुआत ब्रिक्स देशों का स्वागत करके की. संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,
पीएम मोदी की स्पीच की 10 बड़ी बातें"ब्रिक्स के विस्तृत परिवार में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. आज यह सभागार अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है. यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के सामने कई अहम मुद्दे उठाए. उन्होंने मौजूदा चुनौतियों से निपटने और ब्रिक्स के भविष्य के बारे में भी बात की-
- चार बड़ी प्राथमिकताएं: भारत की अध्यक्षता में BRICS का पूरा फोकस चार चीजों पर रहा: रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी.
- संक्रामक रोग से निपटने की नई व्यवस्था: संक्रामक बीमारियों की पहचान और रोकथाम के लिए 'ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम' बनाने पर सहमति बनी.
- आपदाओं से पहले चेतावनी: भूकंप, बाढ़, चक्रवात जैसे नेचुरल डिजास्टर के लिए 'अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइन' तैयार की गई हैं, ताकि समय रहते तैयारी की जा सके.
- सप्लाई चेन की मजबूती: ब्रिक्स देशों का 'ब्रिक्स लॉजिस्टिक सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क' से सामान की सप्लाई को भरोसेमंद और मजबूत बनाना.
- स्टार्टअप के लिए सपोर्ट: ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स को जोड़ने के लिए ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ बनाया जाएगा. साथ ही ‘ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड’ का प्रस्ताव रखा गया.
- किसानों के लिए AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी: ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ के जरिए AI, जियो-स्पेशल टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की असल जरूरतों से जोड़ा जाएगा.
- क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार ना बनाया जाए: टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन देशों की प्रोग्रेस में रुकावट बन सकता है. इसलिए ब्रिक्स देशों ने टेक्नोलॉजी अपनाने में इंक्लूसिविटी पर बल दिया.
- रोजगार और छोटे कारोबार पर जोर: ब्रिक्स कोऑपरेशन केवल सरकारों तक सीमित ना रखना. एंटरप्रेन्योर्स, फार्मर्स, रिसर्चर्स, वुमेन, यूथ और आम लोगों की भागीदार बढ़ाना. ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ से स्किल, रोजगार, महिलाओं की भागीदारी और सोशल सिक्योरिटी को बढ़ावा दिया जाएगा. छोटे कारोबारों के लिए ‘ब्रिक्स MSME कोऑपरेशन पोर्टल’ भी शुरू करने की पहल हुई है.
- क्लीन एनर्जी और पर्यावरण अहम: स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाया गया है. एग्रो इकोलॉजी और रीजनरेटिव एग्रीकल्चर के सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को मॉडर्न साइंस से जोड़ेंगे.
- ब्रिक्स का फायदा पूरे ग्लोबल साउथ को मिले: पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स में बने सॉल्यूशंस सिर्फ ब्रिक्स देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए. इन्हें ग्लोबल साउथ के दूसरे देशों के लिए भी सस्ता, आसान और उपयोगी बनाया जाना चाहिए. उन्होंने ब्रिक्स की ताकत को उसकी विविधता और सहयोग में बताया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी निजी अनुभव से दावा किया कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि ब्रिक्स में उनकी आवाज सुनी जाती है. उनके अनुभव का सम्मान होता है और सॉल्यूशन उनके लिए ही नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं. आखिर में पीएम मोदी ने कहा, “हमारी विविधता हमारी पहचान रहे. हमारा सहयोग, हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए.”
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