नई दिल्ली में भारत, चीन और रूस के राष्ट्राध्यक्षों के जमघट पर पूरी दुनिया नजरें टिकाए रही. बीते तीन साल में ये तीनों नेता नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन एक साथ एक ही फोटो फ्रेम में तीन बार नजर आए. 12 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स समिट की कई फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर की. इसमें हंसी-ठहाके लगाते तीनों लीडर एक साथ दिख रहे हैं. एक फोटो में पीएम मोदी ने पुतिन और जिनपिंग का हाथ पकड़ा हुआ है. टैरिफ वॉर और कई देशों के बीच जारी सैन्य संघर्षों के दौर में एशिया के तीनों नेताओं की यह साझेदारी बेहद अहम मानी जा रही है.
तीन साल में वो तीन मौके, जब PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग की 'तिकड़ी' साथ दिखी
12 सितंबर को पीएम मोदी ने BRICS समिट से जुड़ी कई तस्वीरें शेयर कीं. इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी तस्वीर ने खास तौर पर ध्यान खींचा.

इन तस्वीरों में तीनों नेताओं के बीच आपसी तालमेल साफ दिख रहा है. दरअसल, अब ब्रिक्स (BRICS) का दायरा बढ़ गया है. यह अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है. पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ बातचीत करते हुए अपनी एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें पुतिन उनके बगल में खड़े थे. एक और तस्वीर में पीएम मोदी को पुतिन के साथ चलते और मुस्कुराते हुए देखा गया.

साल 2025 के सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी प्रेसिडेंट जिनपिंग की एक साथ वाली फोटो वायरल हुई थी. इसमें तीनों नेता सुकून के साथ गपशप करते नजर आ रहे थे. लोगों ने इस तस्वीर को देखने के बाद ‘एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत’ की भविष्यवाणी भी कर दी थी. ये फोटो चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन की थी. तब प्रधानमंत्री मोदी 7 साल बाद चीन की यात्रा पर गए थे. मोदी की पुतिन और जिनपिंग से इस मुलाकात को तब भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में भारत की विदेश नीति में हो रहे बदलाव के रूप में विश्लेषित किया गया था.

कुछ दिन पहले 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की तिकड़ी एक साथ दिखी थी. सामने आई तस्वीरों में तीनों नेता मुस्कुराते हुए और एक सीरीज बनाकर एक दूसरे से हाथ मिलाते दिखे थे.इसे तीनों देशों के बीच सौहार्द का एक छोटा सा लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन बताया गया.

इन दोनों मुलाकातों के बाद दो साल के अंदर तीसरी बार तीनों नेता शनिवार, 12 सितंबर को दिल्ली में मिले. समिट में शामिल होने वाले अन्य नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं.
(यह भी पढ़ें: 'अच्छे पड़ोसी की तरह...', BRICS समिट में PM मोदी और जिनपिंग की मीटिंग से पहले चीन का बड़ा मैसेज)
संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UN Secretary General) एंटोनियो गुटेरेस, डब्ल्यूटीओ (World Trade Organisation) के महानिदेशक नगोजी ओकोन्जो-इवेला, डब्ल्यूएचओ (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्येयियस, न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank) के अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के अध्यक्ष ज़ो जियायी भी शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं. इसी बीच, 12 सितंबर तड़के तक चली लंबी बातचीत के बाद ब्रिक्स देशों ने एक साझा बयान पर सहमति बना ली है. इस बातचीत में कई विवादित मुद्दों पर मतभेद थे; भारत ने सदस्यों के बीच अलग-अलग विचारों में तालमेल बिठाने और आम सहमति बनाने के लिए सुबह 4 बजे तक लगातार बातचीत की अगुवाई की.
वीडियो: BRICS: शैतान हैं वो.. भारत से अमेरिका को ईरान ने क्या कह दिया?











