अमेरिका के साथ सैन्य कार्रवाई में उलझे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने साफ कर दिया है कि उनका देश किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है. दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने आए पेजेश्कियान ने यहीं से अमेरिका को नाम लिए बिना साफ-साफ संदेश दे दिया.इंडिया टुडे से खास बातचीत में पेजेश्कियान ने कहा कि अगर हम जिंदा हैं तो हमें जवाब देना होगा. जब हम मर जाएंगे, तब जवाब नहीं दे पाएंगे. इसलिए हम जिंदा हैं और जवाब देंगे. उन्होंने इस दौरान वह तरीका भी बताया, जिससे होर्मुज का रास्ता खुल सकता है. पेजेश्कियान ने कहा कि इसके लिए अमेरिका को अपनी नाकाबंदी हटानी होगी और हरकतें ठीक करनी होगी. मोजतबा खामेनेई के मारे जाने की अफवाहों पर से भी पेजेश्कियान ने पर्दा उठाया.
'जिंदा हैं तो जवाब देंगे', ईरानी प्रेसिडेंट पेजेश्कियान का दिल्ली से अमेरिका को साफ संदेश
BRICS समिट के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की एक तस्वीर ने खूब ध्यान खींचा. तस्वीर में दोनों नेता हाथ में हाथ डालकर चलते नजर आए. अब ईरानी राष्ट्रपति ने इस वायरल तस्वीर के पीछे की कहानी बताई है.

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भारत और ईरान के प्राचीन रिश्ते पर जोर देते हुए कहा कि उनका देश दिल्ली के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करने के लिए काम कर रहा है. दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं. यह ऐसी चीज है जो समय के साथ कभी नहीं बदलेगी. प्रेसिडेंट पेजेश्कियान ने अमेरिका को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच मजबूत सहयोग दुनिया में ‘बढ़ती तानाशाही’ का मुकाबला करने में मदद कर सकता है. ‘तानाशाही’ से उनका इशारा अमेरिका की ओर था. उन्होंने कहा,
हम अपने रिश्तों को गहरी सांस्कृतिक जड़ों पर आधारित करने की कोशिश कर रहे हैं. मजबूत सहयोग हमें दुनिया में पनप रही तानाशाही का मुकाबला करने में मदद करेगा.
प्रेसिडेंट पेजेश्कियान ने ये भी क्लियर कर दिया कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर चल रही अटकलें बकवास हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर जिंदा हैं और अपना काम कर रहे हैं. बकौल पेजेश्कियान,
अमेरिका ने हमारे अधिकतर नेताओं को निशाना बनाया है. मोजतबा जिंदा हैं और अपना काम कर रहे हैं. अमेरिका मोजतबा का पता नहीं लगा पा रहा है. इसीलिए वे प्रोपेगैंडा फैला रहा है.
फरवरी 2026 में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के ज्यादातर सदस्यों की मौत हो गई थी. मोजतबा भी इस हमले में घायल हो गए थे. बाद में मुजतबा ने ईरान के सुप्रीम लीडर का पद संभाला. हालांकि, तब से मुजतबा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. न ही उन्हें कहीं देखा या सुना गया है. ऐसी अफवाहें भी चलती हैं कि अमेरिकी हमलों के बाद वह कोमा में हैं और बुरी तरह घायल हैं. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया था कि मुजतबा का चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया है.
हालांकि, मोजतबा के ठिकाने और हालात के बारे में बहुत कम जानकारी है. लेकिन अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने मीडिया को बताया है कि वह किसी गुप्त ठिकाने पर हो सकते हैं, जहां से बाहरी दुनिया से संपर्क बहुत कम है.
अमेरिका से जंग पर क्या कहा?अमेरिका के साथ जंग पर पेजेशकियन ने कहा कि न तो हिज्बुल्लाह और न ही ईरान ने इसकी शुरुआत की थी. ये सभी समूह अपना बचाव कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बाद उसे जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा. जब अमेरिका खुद इस इलाके में हथियार ला रहा है और इलाके के रास्तों को रोक रहा है तो ईरान चुप क्यों रहेगा?
होर्मुज बंदी पर पेजेश्कियान ने साफ-साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय नियमों के तहत यह रास्ता खोला जा सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी नाकाबंदी और अपनी गलत हरकतें बंद करनी होंगी.
दिल्ली में ब्रिक्स समिट (BRICS Summit 2026) की एक तस्वीर भी खूब वायरल है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियान हाथ में हाथ डालकर चल रहे हैं. प्रेसिडेंट पेजेश्कियान ने इस तस्वीर के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा,
जब से मैंने पद संभाला है. पीएम मोदी के साथ हमारे रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे हैं.

(यह भी पढ़ें: 'अच्छे पड़ोसी की तरह...', BRICS समिट में PM मोदी और जिनपिंग की मीटिंग से पहले चीन का बड़ा मैसेज)
जंग के बीच भारत आए पेजेश्कियानबता दें कि प्रेसिडेंट पेजेश्कियान की यह बात इंडिया टुडे की ग्रुप एडिटर (विदेश मामले) गीता मोहन के साथ हुई. ब्रिक्स समिट के लिए पेजेश्कियान का भारत दौरा 2024 में उनके राष्ट्रपति बनने के बाद पहला दौरा है.
यह दौरा भी ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई है. इस नए तनाव के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण का मुद्दा है. होर्मुज से दुनिया की 20% तेल-गैस की आपूर्ति होती है. हालांकि संघर्ष के बावजूद, भारत ने ईरान के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे हैं. साथ ही भारत ने खाड़ी देशों के साथ भी रणनीतिक और व्यापारिक संबंध कायम रखे हैं. खाड़ी के अधिकतर देशों पर ईरान ने जबरदस्त हमले किए हैं.
वीडियो: BRICS: शैतान हैं वो.. भारत से अमेरिका को ईरान ने क्या कह दिया?











