भारत नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) की मेजबानी कर रहा है. आज यानी 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम द्विपक्षीय बैठक होगी. इस बैठक से ठीक पहले चीन ने 'अच्छे पड़ोसी' होने का मैसेज दिया है. बीजिंग का कहना है कि दोनों देशों को अपनी पुरानी दोस्ती पर ध्यान देना चाहिए और बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाना चाहिए.
'अच्छे पड़ोसी की तरह...', BRICS समिट में PM मोदी और जिनपिंग की मीटिंग से पहले चीन का बड़ा मैसेज
भारत 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है. इस दौरान PM Narendra Modi और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी. इससे ठीक पहले China ने 'अच्छे पड़ोसी' होने का मैसेज दिया है.

भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि बीजिंग दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगा. 11 सितंबर को शू फेइहोंग ने X पर लिखा,
"चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा. हम दूर की सोच के साथ आपसी रिश्तों को मजबूत बनाएंगे. बातचीत और सहयोग बढ़ाकर हर मतभेद को समझदारी से सुलझाया जाएगा. चीन एक अच्छे पड़ोसी की तरह भारत के साथ दोस्ती निभाएगा, ताकि दोनों देश एक-दूसरे की तरक्की में मददगार बन सकें."
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे नई दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शाम 5.45 बजे होगी. यह लगातार तीसरा साल होगा, जब दोनों नेता एक-दूसरे से मिलेंगे. इससे पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी, रूस के कजान और चीन के तियानजिन में मिल चुके हैं.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं. साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच सैन्य झड़प और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सीमा विवाद की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था. अब बीजिंग और नई दिल्ली दोनों एक बार फिर अपने कूटनीतिक और राजनयिक संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.
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चीन ने बातचीत पर जोर दियाचीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी 'अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध' बनाए रखने पर जोर दिया. माओ ने यह भी कहा कि ईरान-अमेरिका टकराव और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच, चीन बातचीत और समझौते के जरिए विवाद सुलझाने और शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए ब्रिक्स देशों के साथ काम करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स विकासशील देशों के लिए एक अहम प्लेटफॉर्म के तौर पर उभरा है.
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