Gen Z ने कई देशों की राजनीति को प्रभावित किया है और अब उसका असर और ज्यादा मुखर होता जा रहा है. तो क्या बांग्लादेश और नेपाल के बाद, अब पाकिस्तान में भी Gen Z चुपचाप क्रांति की तैयारी कर रहे हैं? अमेरिका में पीएचडी कर रहे पाकिस्तानी छात्र ज़ोरैन निज़ामनी का आर्टिकल तो इसी तरफ इशारा कर रहा है. भले ही सेना के आदेश पर इसे कुछ ही घंटों में डिलीट करवा दिया गया हो, लेकिन पाकिस्तानी Gen Z के लिए ज़ोरैन रातोंरात नेशनल आइकन बन गए.
Gen Z पर लिखे एक आर्टिकल से पाकिस्तान में इतना बवाल क्यों है? जिसे सेना ने डिलीट करा दिया
Pakistan में Gen Z चुपचाप क्रांति की तैयारी कर रहे हैं? अमेरिका में पीएचडी कर रहे पाकिस्तानी छात्र Zorain Nizamani का आर्टिकल तो इसी तरफ इशारा कर रहा है.


ऐसा क्या लिखा था आर्टिकल में?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 'इट इज ओवर' (It is Over) नाम से यह आर्टिकल (ओपिनियन) 1 जनवरी को अंग्रेजी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में छपा था. वेबसाइट से तो इसे डिलीट करवा दिया गया, लेकिन अखबार में छपे आर्टिकल की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. ज़ोरैन ने लिखा कि कैसे पाकिस्तान के Gen Z, सरकार और सेना के बहकावे में नहीं आ रहे हैं.

अपने ओपिनियन में ज़ोरैन ने लिखा कि पाकिस्तान की सत्ता में बैठे बुज़ुर्ग नेता और देश की युवा आबादी के बीच की खाईं बहुत बढ़ चुकी है. युवा अब नेताओं की बातों पर भरोसा नहीं करते. हालांकि, इस आर्टिकल में उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर या शहबाज शरीफ सरकार का जिक्र नहीं किया.
ज़ोरैन का कहना है कि देशभक्ति भाषणों से नहीं आती है. जब नौकरी, बराबरी के मौके और अच्छी सुविधाएं मिलती हैं, तो देशभक्ति अपने आप पैदा हो जाती है. पाकिस्तान में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, इसलिए युवा निराश हैं.
पाकिस्तान से बड़ी मात्रा में पलायन
जौरेन ने लिखा कि डर और दबाव की वजह से युवा खुलकर बोल नहीं पा रहे, लेकिन चुपचाप देश छोड़ रहे हैं. हज़ारों डॉक्टर और इंजीनियर पहले ही पाकिस्तान छोड़ चुके हैं. उन्होंने लिखा,
युवा पीढ़ी तंग आ चुकी है, और चूंकि उन्हें पता चल गया है कि वे सत्ता को चुनौती नहीं दे सकते, इसलिए वे देश छोड़ रहे हैं... वे चुपचाप देश छोड़ना चाहते हैं और पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहते क्योंकि उनके जिन दोस्तों ने आवाज उठाई, उन्हें चुप करा दिया गया.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में 5,000 से ज्यादा डॉक्टर और 11,000 इंजीनियर पाकिस्तान छोड़ चुके हैं. ज़ोरैन के मुताबिक, युवा बेहतर इंटरनेट, सस्ते फोन और आज़ादी चाहते हैं, जबकि सत्ता में बैठे लोग पाबंदियां बढ़ा रहे हैं. इसी वजह से Gen Z अब पाकिस्तान में भविष्य नहीं देख पा रहा है.
आर्टिकल डिलीट होने पर लोगों ने जताई आपत्ति
आर्टिकल डिलीट किए जाने पर पाकिस्तान के कई बड़े पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया. कई पत्रकार, वकील और कार्यकर्ताओं ने ज़ोरैन के आर्टिकल की तारीफ भी की. उनका कहना है कि यह आर्टिकल पाकिस्तान के युवाओं, खासकर जेनरेशन Z की नाराज़गी को साफ दिखाता है. पाकिस्तानी वकील अब्दुल मोइज़ जाफरी ने ट्वीट किया,
यह एक बहुत ही शानदार लेख है. इसे पाकिस्तान में अपने काम में असफल हो रहे हर युवा से लेकर हर बुजुर्ग शख्स के दिल से लिखा गया है.
कार्यकर्ता मेहलाका समदानी ने कहा कि सच्चाई छिपाने की कोशिश अब काम नहीं करेगी. पूर्व मंत्री मूनिस इलाही ने इसे हकीकत दिखाने वाला बेहतरीन विश्लेषण कहा. इमरान खान की पार्टी PTI ने भी आर्टिकल को शेयर किया और कहा कि बिना न्याय और नौकरी के सिर्फ प्रचार का कोई मतलब नहीं है, यह बेकार है.
ज़ोरैन निज़ामनी ने दी सफाईविवाद के बीच ज़ोरैन ने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने बताया कि लेख उनके अपने अनुभव और सोच पर आधारित था. आगे कहा,
मैं किसी के लिए नफरत नहीं रखता. दुनिया में पहले से ही बहुत नफरत है, सच्चाई हमेशा विवादित होती है.
वहीं, ज़ोरैन की मां फ़ाज़िला क़ाज़ी ने भी कहा कि इस आर्टिकल का मकसद किसी खास संस्था या व्यक्ति पर हमला करना नहीं था.
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कौन हैं ज़ोरैन निज़ामनीज़ोरैन निज़ामानी, पाकिस्तान के मशहूर एक्टर कैसर ख़ान निज़ामानी और एक्ट्रेस फ़ाज़िला क़ाज़ी के बेटे हैं. वे अमेरिका की अर्कांसस यूनिवर्सिटी में अपराध विज्ञान (क्रिमिनोलॉजी) में पीएचडी कर रहे हैं. ज़ोरैन एक वकील और प्रोफेसर भी हैं.
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