‘मैं हाईकोर्ट के इस जजमेंट के खिलाफ हूं. हमारी बेटी सिर पर हिजाब पहन रही है. कोई दिमाग पर नहीं पहन रही. जिसके सिर पर बाल नहीं, वो एनकाउंटर करवा रहा है.' ये बयान है हैदराबाद से AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी का. ओवैसी इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर बोल रहे थे. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य नहीं है. हाईकोर्ट एक मुस्लिम फीमेल स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. हाईकोर्ट के स्टेटमेंट पर नाराजगी जाहिर करते हुए ओवैसी ने कहा कि ये फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन है.
हिजाब सिर पर है, दिमाग पर नहीं... ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर पूछे तीखे सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े फैसले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की मांग करने वाली मुस्लिम छात्रा की याचिका को खारिज किया था. और कहा था कि हिजाब को इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए.

26 अगस्त को जश्न-ए-ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,
‘आज इलाहबाद हाईकोर्ट का जजमेंट आया. हमारी एक बेटी स्कूल में हिजाब पहन रही थी. कोर्ट ने कह दिया कि आप हिजाब नहीं पहन सकते. मैं हाईकोर्ट के इस जजमेंट के खिलाफ हूं. मैं इससे बिल्कुल सहमत नहीं हूं. क्योंकि सबरीमाला केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, और सुप्रीम कोर्ट रिजर्वड फॉर जजमेंट है. इलाहबाद हाईकोर्ट के फाजिल जजों को अपना जजमेंट रोकना चाहिए था. जज ये डिसाइड कर रहे हैं कि Essential क्या है. फिर वो हमारी धार्मिक इबादतों को प्रोटेक्ट करेंगे या नहीं करेंगे.’
असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा,
‘आज का फैसला भारत के संविधान की धारा 25 और 19 के खिलाफ है. आप होते कौन हैं Islam की Essentiality को डिसाइड करने वाले. राइट टू प्राइवेसी को सुप्रीम कोर्ट ने फंडामेंटल राइट कह दिया है. मेरी प्राइवेसी है. और फिर यूपी के हाईस्कूल लेवल के स्कूलों में सबसे कम संख्या किसी की है तो वो मुस्लिम बच्चियों की है. आप उनकी तालीम को रोक रहे हैं? मैं हाईकोर्ट के इस जजमेंट के खिलाफ हूं. हमारी बेटी सिर पर हिजाब पहन रही है. कोई दिमाग पर नहीं पहन रही. जिसके सिर पर बाल नहीं, वो एनकाउंटर करवा रहा है.’
क्या है पूरा मामला?उत्तर प्रदेश में एक छात्रा ने कोर्ट में तर्क दिया कि स्कूल यूनिफॉर्म के साथ वो हिजाब पहनना चाहती है और ये एक धार्मिक प्रथा है. उसका कहना था कि उसने 6th क्लास से ही हिजाब पहनना शुरू कर दिया था. और अब तक किसी ने आपत्ति नहीं जताई. हालांकि, स्कूल अब आपत्ति जता रहा है. स्कूल का कहना है कि हिजाब उनके स्कूल ड्रेस कोड का उल्लंघन करता है. बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा ने स्कूल पर आरोप लगाया है कि उसके हिजाब पहनने की वजह से उसे एडमिशन देने से इनकार किया गया है. 21 अगस्त को इस याचिका पर सुनवाई हुई थी. जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. बेंच ने कहा,
‘सिर्फ ये कह देने भर से कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत कोई अधिकार मिलता है, किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसके लिए जरूरी तथ्य और कानूनी आधार भी पेश करना होगा. स्कूल जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए तय यूनिफॉर्म कई मकसद पूरे करती है. इससे बच्चों में अनुशासन और समानता आती है. संस्थान की पहचान बनती है और क्लास रूम में भेदभाव खत्म होता है. यूनिफॉर्म पहनने का नियम धर्म-निरपेक्ष माहौल बनाता है.’
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इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे ये साबित हो सके कि मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना धर्म का एक जरूरी हिस्सा है. इसी के साथ छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई थी. कोर्ट के इसी फैसले पर ओवैसी ने नाराजगी जाहिर की है.
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