‘अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक ढांचा नहीं बदला गया होता तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोग आज हमारे साथ जुड़ने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे होते.’ पीओके में सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच ये बात जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कही है. 2019 की 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा लिया गया था, जो प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देता था. अब्दुल्ला का इशारा इसी ‘संवैधानिक ढांचे में बदलाव’ की ओर था.
‘PoK के लोग हमसे जुड़ने को तैयार होते, अगर 370 न हटता’, उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा
उमर अब्दुल्ला ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कहा कि अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक ढांचा नहीं बदला होता तो PoK में भारत से जुड़ने के लिए प्रदर्शन हो रहे होते.

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भाषण देते हुए सीएम अब्दुल्ला ने देश में संघवाद यानी Federalism को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्यों की शक्तियां छीनने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाएगा तो नतीजा वही होगा, जो हमने जंतर-मंतर पर देखा था.
PoK में हो रहे प्रदर्शन पर भी बोलेबता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं. महंगाई, प्रतिनिधित्व और सरकारी दमन के खिलाफ उपजा यह विद्रोह जून 2026 में शुरू हुआ था और अगस्त 2026 में भी जारी है. अब्दुल्ला ने इसका जिक्र करते हुए कहा,
जब मैं सीमा के उस पार के हालात देखता हूं तो मुझे लगता है कि हमारे नेताओं ने 80 साल पहले हमारे लिए जो फैसला लिया था, वह सही था. जिन लोगों ने ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’ के नारे लगाए थे, वो सही थे. लोगों ने जो कुर्बानियां दीं. वो सही मकसद के लिए थीं.
आगे उन्होंने कहा,
जम्मू-कश्मीर के दूसरे हिस्से (पीओके) के हालात देखकर हमें दुख होता है. हमें लगता है कि अगर 2019 में हमारा स्टेटस नहीं बदला गया होता तो आज दूसरे कश्मीर (पीओके) के लोग हमारे साथ फिर से जुड़ने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे होते.
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शायर इकबाल की मशहूर पंक्ति ‘सारे जहां से अच्छा’ से भाषण शुरू करते हुए सीएम अब्दुल्ला ने पूछा कि क्या हम देश को महान बना पाए हैं? उन्होंने कहा,
अगर हमने अभी तक इसे महान नहीं बनाया है. तो शायद आजादी का 80वां साल इस बारे में सोचने और जरूरी कदम उठाने का सही समय है.
सीएम उमर ने पिछले महीने हुए Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों को राज्यों के मामलों में केंद्र सरकार के दखल का नतीजा बताया. उमर ने कहा कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों की शक्तियों में दखल देने लगती हैं तो संघवाद कमजोर होता है. जब राज्यों की शक्तियां कम और खोखली कर दी जाती हैं, तो संघवाद कमजोर होता है. उन्होंने कहा कि जब केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राज्यों को दी गई शक्तियों में दखल देने के लिए किया जाता है तो संघवाद कमजोर होता है. अक्सर इसके नतीजे सड़कों पर देखने को मिलते हैं.
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