आगरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. कुछ पुलिसकर्मी एक शख्स को पीटते-घसीटते ले जाते दिख रहे हैं. जिस शख्स को घसीटा जा रहा है, वो कोई उपद्रवी नहीं है. एक रेलवे ऑफिसर है. हमने कई बार यात्री और TTE या पैसेंजर और पुलिस के बीच झड़पें देखी हैं लेकिन यहां रेलवे के ही दो विभाग आमने-सामने आ गए. मामला इतना बढ़ गया कि स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई. आरोप है कि RPF के कुछ जवानों ने DSS यानी डिप्टी स्टेशन सुपरिनटेंडेंट के साथ मारपीट की. इसके बाद तत्काल RPF इंचार्ज, 2 ASI और 2 कॉन्स्टेबल पर कार्रवाई हो गई. उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.
पैसेंजर नहीं रेलवे अफसर को ही घसीट ले गई RPF! आगरा स्टेशन पर ये क्या हुआ?
आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेन रोकने को लेकर RPF और डिप्टी स्टेशन सुपरिनटेंडेंट के बीच विवाद मारपीट तक पहुंच गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और शुरुआती कार्रवाई में RPF के 5 कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है.


लेकिन सवाल है कि ऐसा क्या हुआ कि RPF यानी Railway Protection Force और रेलवे ऑफिसर के बीच बात पीटने और घसीटकर ले जाने तक पहुंच गई? विस्तार से समझते हैं.
ये घटना आगरा कैंट स्टेशन की है. पूरा विवाद ट्रेन नंबर-20808 हीराकुंड एक्सप्रेस के स्टेशन पर रुकने के दौरान शुरू हुआ. आजतक से जुड़े अरविंद शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जुलाई सुबह करीब 11 बजे ट्रेन में एक यात्री के घायल होने की सूचना मिली थी. इसके बाद डिप्टी स्टेशन सुपरईंटेंडेंट नरेंद्र चाहर ने ट्रेन को कुछ देर रोकने का फैसला लिया. बस, यहीं से मामला बिगड़ गया. ट्रेन रोकने के फैसले को लेकर डिप्टी SS और RPF कर्मियों के बीच बहस शुरू हुई.
बहस बढ़ी और देखते ही देखते मारपीट में बदल गई. दोनों विभाग आमने-सामने आ गए. एक तरफ रेलवे के अधिकारी थे. दूसरी तरफ RPF के जवान और अधिकारी. आरोप है कि इसी दौरान डिप्टी स्टेशन सुपरिन्टेंडेंट को पीटा गया.
दूसरा पक्ष भीहालांकि, इसका एक दूसरा पक्ष भी है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट कहती है कि एक महिला यात्री के ट्रेन में न चढ़ पाने पर ट्रेन रुकवा दी गई थी. महिला यात्री कुछ सामान खरीदने के लिए उसी ट्रेन से नीचे उतरी थी. तभी ट्रेन चलने लगी. महिला यात्री ने चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन नहीं चढ़ पाई. उन्हें भागते देखकर DSS ने वॉकी-टॉकी से लोको पायलट से कहकर ट्रेन रुकवा दी. ट्रेन की रफ्तार इससे कम हुई और वो महिला पैसेंजर ट्रेन में चढ़ गईं.
बस, यही देख लिया वहां तैनात RPF जवानों ने. उन्होंने महिला को चेन पुलिंग के आरोप में रोक लिया. बता दें कि चेन पुलिंग दंडनीय अपराध है.
नरेंद्र चाहर ने आरपीएफ के लोगों की कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि ट्रेन उन्होंने रुकवाई थी. महिला की कोई गलती नहीं है. ट्रेन रोकने के फैसले को लेकर डिप्टी स्टेशन सुपरईंटेंडेंट और RPF कर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई. दोनों तरफ से यही आरोप है कि शुरुवात दूसरे ने की.
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मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने फौरन जांच के आदेश दिए. पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई. एक टीम गठित की गई, जिसमें आगरा कैंट के ASC, स्टेशन डायरेक्टर और AOM को शामिल किया गया है. शुरुआती फैक्ट्स के आधार पर रेलवे ने बड़ी कार्रवाई भी की है. कुल 5 पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया. इसमें शामिल हैं- RPF इंचार्ज सुरेंद्र चौधरी, ASI मेघराज मीणा, ASI बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह. रेलवे का कहना है कि जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद नियमों के मुताबिक आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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