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पत्नी का हाथ छूटा, वो बह गई, बस देखते रह गए... नेपाल की बाढ़ में जो जिंदा बचे, उनकी आपबीती

Nepal में अचानक आई भीषण बाढ़ से 163 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लापता हैं. हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू जारी है. हादसे में बचे लोगों ने अब अपनी आपबीती सुनाई है. किसी को पेड़ ने बचाया तो किसी की पत्नी का हाथ छूटा और जिंदगी खत्म.

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नेपाल में आई बाढ़ के बाद सैकड़ों लोग लापता हैं. (फोटो: इंडिया टु़डे)

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  • नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 163 हो गई है और सैकड़ों लोग लापता हैं।
  • बाढ़ का कारण तेज बारिश के बाद नदी में आई भारी जलधारा और कीचड़ का बहाव है, जिसने रसुवा जिले जैसे निचले इलाकों को प्रभावित किया।
  • सरकार और सुरक्षा बलों ने बचाव कार्य तेज कर दिया है, जिसमें हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे हुए लोगों को निकाला जा रहा है।

नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने कई जिंदगियां छीन लीं. मरने वालों का आंकड़ा 163 पहुंच गया है. सैकड़ों लोग लापता हैं. फंसे हुए लोगों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया जा रहा है. रेस्क्यू किए गए एक नेपाली मजदूर ने बताया कि कैसे उन्होंने एक आम के पेड़ को पकड़कर अपनी जान बचाई. वहीं, बाढ़ के खौफनाक मंजर को याद करते हुए एक शख्स ने बताया कि उसकी पत्नी पहले ही मलबे में दब गई थी, जबकि उसकी जान पांच घंटे बाद बचाई जा सकी.

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पेड़ पकड़कर बचाई जान

बुधवार, 26 अगस्त की सुबह तिब्बत सीमा की तरफ से भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई थी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाली मजदूर बिबेक कुमाल एक नए बने घर के बाहर शौचालय का गड्ढा खोद रहे थे. तभी पानी, कीचड़ और चट्टानों का एक सैलाब तेजी से नीचे आया और उन्हें व उनके आस-पास की हर चीज को बहा ले गया.

24 साल के बिबेक बिदुर इलाके में काम कर रहे थे. यह जगह रसुवा जिले के निचले इलाके में है, जो इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था. काम के दौरान उन्हें फुसफुसाहट जैसी आवाज सुनाई दी. पांच फीट गहरे गड्ढे के ऊपर खड़े उनके चार साथियों ने उन्हें बाहर निकलकर भागने के लिए जोर से आवाज लगाई. जब तक वे गड्ढे से बाहर निकले, उनके साथ काम करने वाले पहले ही भाग चुके थे. काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में अपने बिस्तर पर लेटे हुए बिबेक ने कहा, 

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"मैं भागने लगा. फिर पानी की एक दीवार ऐसे गरजने लगी जैसे भूकंप आया हो." 

तेज बहाव उन्हें कीचड़ और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा ले गया. उन्होंने कहा, 

"किस्मत से मैं आम के एक पेड़ पर अटक गया. अगर आम का पेड़ न होता, तो मैं बहकर मर जाता."

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बाद में पुलिस वहां पहुंची और बिबेक को सुरक्षित बाहर निकाला. पहले पानी की जोरदार टक्कर और फिर एक बड़े पत्थर के लगने से उसके दाहिने पैर में चोट आई. 

11 साल की बच्ची बाल-बाल बची

बिबेक के सामने वाले अस्पताल के बिस्तर पर लेटी 11 साल की रिहाना लामिछाने बाल-बाल बची. उन्होंने कहा, 

"मैं स्कूल में थी. इसकी वजह से स्कूल बंद कर दिया गया और हमें घर जाने के लिए कहा गया. जब मैं नदी पार कर रही थी, तो अचानक बाढ़ का पानी तेजी से बहता हुआ आया."

उन्हें छाती और पैर में चोटें आईं. उन्होंने कहा, 

"मैं सुरक्षित हूं, इसलिए खुश हूं. मुझे नहीं पता कि मेरे दोस्तों के साथ क्या हुआ."

'पत्नी मलबे में दब गई'

68 साल के केशव प्रसाद बराल एक छोटे से अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं. उन्होंने बताया,

"कीचड़ का एक बड़ा बहाव सीधे हमारी तरफ आ रहा था. जैसे-जैसे वह पास आया, उसकी ऊंचाई बढ़ती गई. जब मैंने उसे हमारे घर में घुसते देखा, तो मैंने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे छत पर ले जाने की कोशिश की. हाथ छूटा और वह कीचड़ में बह गई."

केशव ने बताया कि चार-पांच घंटे बाद उन्हें बचाने के लिए एक हेलिकॉप्टर आया. उन्होंने बताया, 

“मेरी पत्नी अभी भी कहीं कीचड़ के नीचे दबी हुई है. वह अब नहीं रही.”

ये भी पढ़ें: नेपाल बाढ़: 163 लोगों की मौत, 750 से ज्यादा लापता, 133 भारतीय भी नहीं मिल रहे

ताजा जानकारी के मुताबिक, रसुवा जिले में 403 नेपाली और विदेशी पर्यटक लापता हैं. इनमें से 133 भारतीय हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश में नेपाल से सटे जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन के लिए सेना और पुलिस को तैनात किया गया है. फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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